Best Day to Worship Lord Shiva – Monday, Mahashivratri, Shravan & Pradosh Vrat Guide
Why Choosing the Right Day for Shiva Puja Matters
भगवान शिव को 'देवों के देव महादेव' कहा जाता है – जो ब्रह्मा (सृष्टि) और विष्णु (पालन) से ऊपर हैं क्योंकि वे संहार और पुनर्निर्माण दोनों के स्वामी हैं। शिव जी 'आशुतोष' हैं – यानी 'जो शीघ्र प्रसन्न होते हैं'। एक लोटा जल, एक बेलपत्र, और सच्चा 'ॐ नमः शिवाय' – इतना ही उनकी कृपा के लिए पर्याप्त है।
लेकिन एक important point है – शिव जी की पूजा हर दिन सही फल नहीं देती। कुछ दिन ऐसे हैं जब उनकी ऊर्जा (शिव-तत्व) सबसे प्रबल होती है। इन दिनों में की गई पूजा का असर साधारण दिन से 100-1000 गुना ज़्यादा होता है।
यह सिर्फ tradition नहीं है – इसके पीछे astronomical, mythological, और spiritual logic है:
- चंद्रमा शिव के मस्तक पर है – इसलिए सोमवार (चंद्र-वार) शिव-दिवस है
- हर महीने 2 प्रदोष होते हैं – जब शिव-शक्ति का संगम होता है
- महाशिवरात्रि वो रात है जब शिव-पार्वती विवाह हुआ था
- श्रावण मास में समुद्र मंथन हुआ था – शिव जी ने हलाहल विष पीया था
इन सभी 'शिव-काल' को समझकर पूजा करें तो result दोगुना तेज़ी से मिलता है।
इस article में जानेंगे:
- सोमवार क्यों supreme है (5 ठोस कारण)
- 16 सोमवार व्रत की पूरी विधि
- Pradosh Vrat – the hidden gem
- महाशिवरात्रि की 4 प्रहर पूजा
- श्रावण सोमवार – सबसे powerful वर्ष की 4 तिथियाँ
- Abhishek के 11 द्रव्य और उनके specific लाभ
- 8 गलतियाँ जो शिव पूजा में नहीं करनी चाहिए
🎧 शिव आरती, शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र, रुद्राष्टकम, शिव तांडव स्तोत्रम् – सब Vandnaa App पर एक ही जगह।
सोमवार शिव जी का मुख्य दिन क्यों है? (5 गहरे कारण)
सोमवार (Somvar / Monday) सिर्फ tradition से शिव-दिवस नहीं है – इसके 5 ठोस spiritual और astronomical कारण हैं:
🌙 कारण 1: सोम = चंद्रमा 'सोम' का मतलब चंद्रमा है। शिव जी ने स्वयं अपने मस्तक पर चंद्रमा धारण किया है – इसलिए वे 'सोमेश्वर' और 'चंद्रशेखर' कहलाते हैं। सोमवार उन्हीं की energy का दिन है।
🕉️ कारण 2: मन और चंद्रमा का सीधा संबंध Vedic psychology में 'मन' का स्वामी चंद्रमा है। सोमवार को मन की चंचलता सबसे ज़्यादा होती है। शिव पूजा से मन शांत होता है – इसलिए सोमवार को मानसिक शांति के लिए शिव पूजा सबसे प्रभावी है।
📿 कारण 3: सोमवार व्रत का प्राचीन विधान पुराणों में स्पष्ट उल्लेख है – सोमवार व्रत 4 प्रकार के होते हैं:
- साधारण सोमवार व्रत – साप्ताहिक
- 16 सोमवार व्रत – कन्याओं के लिए (अच्छा वर पाने के लिए)
- सोलह सोमवार – सभी इच्छा पूर्ति
- सोम प्रदोष – जब सोमवार + त्रयोदशी एक साथ
🌑 कारण 4: सोमवती अमावस्या – Bonus power जब सोमवार + अमावस्या एक साथ आते हैं तो उसे 'सोमवती अमावस्या' कहते हैं। यह बहुत दुर्लभ और शक्तिशाली होता है। पितरों को तर्पण और शिव पूजा एक साथ करने का सबसे शुभ संयोग।
💍 कारण 5: विवाह और सौभाग्य अविवाहित कन्याएँ 16 सोमवार व्रत करती हैं माँ पार्वती जैसा वर पाने के लिए। माँ पार्वती ने स्वयं शिव जी को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी – सोमवार उसी का स्मरण है।
🎯 सोमवार पूजा की विशेषताएँ:
- कपड़े: सफेद या हल्के रंग के
- तिलक: सफेद चंदन या भस्म (विभूति)
- फूल: सफेद कमल, धतूरा, आक के फूल
- भोग: सफेद मिठाई, दूध, खीर
- Mantra: ॐ नमः शिवाय (108 बार), महामृत्युंजय (11 बार)
- विशेष: शिवलिंग पर जलाभिषेक
- दिशा: उत्तर मुख (शिव दिशा)
💡 Pro Tip: सोमवार सुबह स्नान के बाद पहली चीज़ – शिवलिंग पर ठंडा जल। यह 5 minute का काम है, लेकिन पूरे हफ्ते की energy set कर देता है।
साल के 6 सबसे शुभ शिव पूजा दिन (Tithi-wise Power Days)
सोमवार weekly best है, लेकिन ये 6 तिथियाँ शिव पूजा का असर हज़ार गुना बढ़ा देती हैं:
🔱 1. महाशिवरात्रि (Mahashivratri) — साल का सबसे महत्वपूर्ण दिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात। शिव-पार्वती विवाह की रात। 4 प्रहर पूजा (हर 3 घंटे में अलग द्रव्य)। पूरी रात जागरण। Mantra: ॐ नमः शिवाय 108 बार × 4 बार 2026: 17 फरवरी 2026 (बीत चुकी) 2027: 7 मार्च 2027
🌙 2. प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) — हर महीने में 2 बार हर माह की त्रयोदशी (कृष्ण और शुक्ल पक्ष की)। सूर्यास्त के समय पूजा (शिव-नटराज नृत्य का समय)।
- सोम प्रदोष – सबसे शुभ (सोमवार + त्रयोदशी)
- शनि प्रदोष – पुत्र प्राप्ति के लिए
- भौम प्रदोष – ऋण मुक्ति के लिए
☔ 3. श्रावण मास (Shravan Maas) — पूरा सावन का महीना जुलाई-अगस्त। समुद्र मंथन का समय जब शिव ने हलाहल विष पीया था। पूरे महीने व्रत और जलाभिषेक। श्रावण के 4 सोमवार सबसे powerful – कांवड़ यात्रा भी इसी समय। 2026: 27 जुलाई - 24 अगस्त 2026 श्रावण सोमवार 2026: 27 जुलाई, 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त, 24 अगस्त
🌑 4. सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) — दुर्लभ संयोग जब सोमवार + अमावस्या मिलते हैं। साल में 1-3 बार। पितरों को तर्पण + शिव पूजा एक साथ। 2026: 19 जनवरी 2026, 17 अगस्त 2026 (श्रावण सोमवार के साथ)
🍂 5. कार्तिक मास (Kartik Maas) — विशेष व्रत कार्तिक के सभी सोमवार और कार्तिक चतुर्दशी। आत्म-शुद्धि के लिए श्रेष्ठ।
🌟 6. शिवरात्रि हर मास (Masik Shivratri) — हर महीने हर माह कृष्ण चतुर्दशी की रात मासिक शिवरात्रि। महाशिवरात्रि का mini version। रात की पूजा।
📅 2026 का शिव पूजा कैलेंडर (Quick Reference):
- महाशिवरात्रि: 17 फरवरी 2026 (पास)
- मासिक शिवरात्रि: हर महीने (calendar में देखें)
- श्रावण आरंभ: 27 जुलाई 2026
- श्रावण समाप्त: 24 अगस्त 2026
- सोमवती अमावस्या: 19 जनवरी, 17 अगस्त 2026
- कार्तिक पूर्णिमा: 24 नवंबर 2026
🎧 Vandnaa App में 'Shiv Puja Calendar' है – सभी प्रदोष, सोमवती और शिवरात्रि की automatic notification।
प्रदोष व्रत – The Hidden Gem of Shiva Worship
ज़्यादातर भक्त सोमवार और महाशिवरात्रि के बारे में जानते हैं, लेकिन प्रदोष व्रत एक hidden gem है जो हर महीने 2 बार आता है।
📜 प्रदोष का अर्थ: 'प्रदोष काल' = सूर्यास्त के 1.5 घंटे का समय। यह वो समय है जब शिव जी कैलाश पर्वत पर नटराज रूप में नृत्य करते हैं। इसी समय की गई पूजा सबसे फलदायी है।
🗓️ कब होता है? हर महीने त्रयोदशी (13वीं तिथि) – कृष्ण पक्ष में 1 बार, शुक्ल पक्ष में 1 बार। यानी हर महीने में 2 प्रदोष।
📊 प्रदोष के प्रकार और उनका विशेष फल:
☀️ Ravi Pradosh (रविवार) — स्वास्थ्य और दीर्घायु 🌙 Som Pradosh (सोमवार) — मनोकामना पूर्ति, सबसे शक्तिशाली 🔥 Bhauma Pradosh (मंगलवार) — ऋण मुक्ति, स्वास्थ्य 🌿 Saumya Pradosh (बुधवार) — संतान सुख 🪔 Guru Pradosh (गुरुवार) — शत्रु शमन 💎 Bhrigu Pradosh (शुक्रवार) — सौभाग्य, धन ⚖️ Shani Pradosh (शनिवार) — पुत्र प्राप्ति, शनि दोष शमन
🕉️ प्रदोष व्रत की विधि:
Step 1 (दिन भर): उपवास – फलाहार ही। नमक नहीं। Step 2 (शाम 4-5 PM): स्नान, साफ कपड़े (सफेद/हल्के रंग) Step 3 (सूर्यास्त के समय): शिव पूजा शुरू
- शिवलिंग पर अभिषेक (जल, दूध, गंगाजल)
- बेलपत्र चढ़ाएं (3 पत्ते की डंडी, ulta side)
- भस्म तिलक
- धूप, दीप
Step 4: मंत्र जाप
- महामृत्युंजय मंत्र 108 बार (mandatory)
- ॐ नमः शिवाय 108 बार
- रुद्राष्टकम (अगर आता हो)
Step 5: प्रदोष कथा सुनें/पढ़ें Step 6 (आरती): शिव आरती + तांडव स्तोत्रम् Step 7: फलाहार ग्रहण करें
💫 प्रदोष व्रत के लाभ (शास्त्रों के अनुसार):
- 100 गायों के दान का फल मिलता है
- 7 जन्मों के पाप नष्ट होते हैं
- मनोकामना पूर्ण होती है
- पितृ दोष शांत होता है
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ दूर होती हैं
- मानसिक शांति मिलती है
🎯 11 प्रदोष व्रत continuous करने का संकल्प सबसे प्रभावी है – ज़्यादातर लोग 6-9वें प्रदोष तक result देखते हैं।
📅 2026 में प्रदोष व्रत:
- हर महीने 2 बार आता है – Vandnaa App में पूरी list है।
- पहला सोम प्रदोष 2026: 9 फरवरी 2026 (बीत चुका)
- अगला सोम प्रदोष: 7 अप्रैल 2026 (बीत चुका)
- आगामी: 26 मई 2026 (मंगल प्रदोष), 8 जून 2026 (सोम प्रदोष)
🎧 Vandnaa App में प्रदोष व्रत की कथा audio + अभिषेक के सटीक मंत्र available हैं।
अभिषेक के 11 द्रव्य और उनके विशेष लाभ
शिवलिंग पर अभिषेक करना सबसे महत्वपूर्ण शिव पूजा है। अलग-अलग द्रव्य अलग-अलग फल देते हैं – यह बहुत कम लोग जानते हैं:
💧 1. जल (शुद्ध पानी) — सबसे आवश्यक हर रोज़, every situation। ठंडा पानी सबसे अच्छा। गर्मियों में extra लाभकारी। लाभ: मानसिक शांति, ज्वर निवारण, सामान्य आरोग्य
🥛 2. दूध (कच्चा गाय का दूध) — सोमवार को लाभ: चंद्र दोष शांति, मन की चंचलता दूर, प्रजनन क्षमता Mantra: ॐ चन्द्रमौलीश्वराय नमः
🍯 3. शहद — मधुर वाणी, मिठास लाभ: व्यक्तित्व आकर्षण, परिवार में मधुरता, संबंधों में सुधार
🍶 4. दही — पुत्र प्राप्ति, परिवार सुख लाभ: संतान सुख, family disputes दूर
🌾 5. घी — दीर्घायु, स्वास्थ्य, धन गाय का घी श्रेष्ठ। हर पूजा में। लाभ: आर्थिक स्थिरता, सेहत, मानसिक तेज
🍬 6. शक्कर / बूरा — दु:ख निवारण लाभ: जीवन की कड़वाहट दूर, मानसिक तनाव शांत
🌊 7. गंगाजल — पाप शुद्धि, सर्व शक्ति Most powerful। महाशिवरात्रि और श्रावण में extra। लाभ: 7 जन्मों के पाप नष्ट, आत्मा की शुद्धि
🥥 8. नारियल पानी — समृद्धि लाभ: नया घर, नया venture शुरू करने पर। धन वृद्धि।
🍵 9. इक्षु रस (गन्ने का रस) — मधुर रिश्ते, मीठा जीवन लाभ: marriage proposals, family harmony
🌿 10. भांग का दूध — विशेष occasions पर महाशिवरात्रि और श्रावण में। साधारण दिनों में नहीं। लाभ: तंत्र साधना, मानसिक mukti
🌹 11. इत्र / सुगंधित तेल — विशेष पूजा रुद्राभिषेक में। चंदन, गुलाब, चमेली। लाभ: इच्छा पूर्ति, आकर्षण शक्ति
🎯 दशामहाअभिषेक (10 द्रव्यों का अभिषेक) सबसे शक्तिशाली है – बड़ी मनोकामना पूर्ति के लिए।
🎯 साधारण क्रम (हर पूजा में): जल → दूध → दही → घी → शहद → शक्कर → फिर जल → बेलपत्र यह 'पंचामृत अभिषेक' कहलाता है।
🌿 बेलपत्र (Bilva Patra) — Most Sacred Offering:
- 3 पत्तियों वाली डंडी ही चढ़ाएं
- Ulta side (रोएंदार side) नीचे
- डंडी आपकी तरफ
- 'श्री' लिखी हुई बेलपत्र = सबसे शुभ
- तोड़ते समय मंत्र: 'ॐ बिल्व पत्राय नमः'
- चढ़ाते समय: 'ॐ नमः शिवाय'
❌ बेलपत्र नियम:
- कभी भी बासी (पुरानी) नहीं चढ़ाएं – 1 दिन से ज़्यादा पुरानी अशुभ
- शिव जी की बेलपत्र दूसरे देवता को नहीं
- 11/21/108 की संख्या में चढ़ाना श्रेष्ठ
🎧 Vandnaa App में 'Rudra Abhishek Audio' है – पूरे मंत्रों के साथ guided abhishek।
❌ शिव पूजा में 8 गलतियाँ जो भक्तों को नहीं करनी चाहिए
शिव जी 'भोलेनाथ' हैं – सरल हैं, लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जो शास्त्रों में स्पष्ट रूप से वर्जित हैं:
❌ Mistake 1: तुलसी पत्र चढ़ाना तुलसी जलंधर की पत्नी वृंदा थी, जिसका वध शिव जी ने किया था। इसलिए तुलसी शिव को कभी नहीं चढ़ाते। तुलसी विष्णु जी के लिए है।
❌ Mistake 2: केतकी का फूल ब्रह्मा जी ने झूठ बोलने में केतकी की गवाही ली थी, इसलिए शिव जी ने उसे श्राप दिया। केतकी कभी नहीं चढ़ाएं।
❌ Mistake 3: शिवलिंग पर शंख से जल शंख विष्णु जी का प्रतीक है, और शंखासुर का वध शिव जी ने किया था। इसलिए शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाते। तांबे या पीतल के लोटे से चढ़ाएं।
❌ Mistake 4: हल्दी चढ़ाना हल्दी स्त्रीत्व (शक्ति) का प्रतीक है। शिवलिंग पुरुष-तत्व है, इसलिए हल्दी सीधे शिवलिंग पर नहीं चढ़ती। केवल पार्वती जी या योनी पीठ पर चढ़ती है।
❌ Mistake 5: टूटा हुआ चावल (अक्षत) 'अक्षत' का मतलब ही 'जो टूटा नहीं' है। टूटे हुए चावल अशुभ हैं – खासकर शिव पूजा में। पूरे, साबुत चावल चढ़ाएं।
❌ Mistake 6: शिवलिंग पर पूरी प्रदक्षिणा शिवलिंग की पूरी 360° प्रदक्षिणा नहीं करते क्योंकि नंदी और जलाधारी (पानी निकलने का रास्ता) को cross नहीं करना चाहिए। 'अर्ध-प्रदक्षिणा' करें (180° तक जाकर वापस आएं)।
❌ Mistake 7: रात 8 बजे के बाद बेलपत्र तोड़ना पौधों की life cycle का सम्मान। रात में बेलपत्र तोड़ना वर्जित। दिन में तोड़ें, अगले दिन भी ताज़ी रहती है (पानी छिड़ककर)।
❌ Mistake 8: भस्म पूरे शरीर पर लगाना (बिना दीक्षा) भस्म तिलक मस्तक पर ही लगाएं। पूरे शरीर पर भस्म साधुओं और दीक्षित भक्तों के लिए है। आम गृहस्थ केवल माथे पर लगाएं।
✅ अतिरिक्त नियम:
- जूते-चप्पल पहनकर पूजा कक्ष में नहीं
- चमड़े का बेल्ट या पर्स पास में नहीं
- पूजा में मोबाइल silent
- शिवलिंग को नंगे हाथ से नहीं छूते (पुष्प/पत्ता रखकर)
- स्त्रियाँ रजस्वला अवस्था में पूजा नहीं करतीं (3 दिन)
🎧 Vandnaa App में 'Shiv Puja Etiquette Guide' है – सब विस्तार से।
निष्कर्ष – आज से शुरू करें (Final Action Plan)
📌 Quick Recap:
🌟 Best Day: सोमवार (Monday) ⏰ Best Time: ब्रह्म मुहूर्त (4-6 AM) या प्रदोष काल (शाम) 🔱 Best Annual Days: महाशिवरात्रि, श्रावण सोमवार, सोमवती अमावस्या, हर प्रदोष 📿 Best Mantra: ॐ नमः शिवाय (108) + महामृत्युंजय (11) 🌿 Best Offering: जल + बेलपत्र + सच्चा भाव 🍚 Best Bhog: सफेद मिठाई, दूध, खीर 🧭 Best Direction: उत्तर मुख
🎯 आज से शुरू करने के लिए 3-step Plan:
Week 1-2 (Daily Practice):
- रोज़ सुबह शिवलिंग पर एक लोटा जल
- 11 बार 'ॐ नमः शिवाय'
- शाम को दीपक
Week 3-8 (Weekly Power):
- हर सोमवार पूरी पूजा (45 min)
- हर प्रदोष व्रत
- महामृत्युंजय 108 बार
Month 3+ (Deep Practice):
- 16 सोमवार व्रत शुरू
- महाशिवरात्रि की रात जागरण
- श्रावण मास में रोज़ अभिषेक
🌟 Remember: शिव जी 'आशुतोष' हैं – कोई दिखावा नहीं, कोई complex ritual नहीं। सच्चा 'ॐ नमः शिवाय' और एक लोटा जल ही उन्हें प्रसन्न करने के लिए काफी है। बाकी सब वैभव है।
🔱 'भोले बाबा की जय!' 🙏
🎧 शिव आरती, शिव चालीसा, महामृत्युंजय, रुद्राष्टकम, शिव तांडव, सोमवार व्रत कथा, प्रदोष कथा, और महाशिवरात्रि 4 प्रहर पूजा audio – सब Vandnaa App पर। आज से शुरू करें।
Frequently Asked Questions
शिव जी की पूजा का सबसे शुभ दिन और समय कौन सा है?+
सोमवार (Monday) सबसे शुभ है क्योंकि सोम = चंद्रमा, और शिव जी 'चंद्रशेखर' हैं। समय की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त (4-6 AM) सुबह की पूजा के लिए और प्रदोष काल (सूर्यास्त के 1.5 घंटे) शाम की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है। प्रदोष काल में शिव जी कैलाश पर नटराज नृत्य करते हैं – इसलिए यह विशेष शक्तिशाली है।
शिवलिंग पर क्या-क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?+
5 चीज़ें वर्जित हैं: (1) तुलसी – विष्णु जी को है, (2) केतकी का फूल – ब्रह्मा जी से जुड़ा श्राप है, (3) हल्दी – स्त्री-तत्व है, शिवलिंग पुरुष-तत्व, (4) शंख से जल – शंखासुर का वध शिव ने किया था, (5) टूटा हुआ चावल। हमेशा साबुत अक्षत, ताज़ी बेलपत्र, सादा जल या दूध चढ़ाएं।
16 सोमवार व्रत क्या है? कौन कर सकता है?+
16 सोमवार व्रत = लगातार 16 सोमवार शिव-पार्वती पूजा + उपवास। माँ पार्वती ने स्वयं यह व्रत किया था शिव जी को पाने के लिए। मुख्यतः अविवाहित कन्याएँ अच्छा वर पाने के लिए करती हैं, लेकिन कोई भी मनोकामना के लिए कर सकता है। श्रावण मास के पहले सोमवार से शुरू करना सर्वश्रेष्ठ है। हर सोमवार उपवास, शिव-पार्वती पूजा, मंत्र जाप, कथा श्रवण। 17वें सोमवार उद्यापन – 16 कन्याओं/लोगों को भोजन।
क्या रोज़ शिव पूजा कर सकते हैं? घर पर शिवलिंग रख सकते हैं?+
हाँ, बिल्कुल! रोज़ शिव पूजा अत्यंत शुभ है – बस सुबह एक लोटा जल और 'ॐ नमः शिवाय' 11 बार – यह 5 minute में हो जाता है। घर पर शिवलिंग रख सकते हैं – लेकिन नर्मदेश्वर (नर्मदा नदी से) या स्फटिक (crystal) शिवलिंग ही घर के लिए। बहुत बड़ा शिवलिंग घर में नहीं – अंगूठे जितना ideal है। रोज़ अभिषेक करें, बिना miss किए। अगर एक दिन miss हो तो अगले दिन double नहीं – बस continue करें।
Pradosh Vrat क्या है? यह कब करना चाहिए?+
प्रदोष व्रत = हर माह की त्रयोदशी (कृष्ण और शुक्ल पक्ष की) को सूर्यास्त के समय शिव पूजा। यह वो समय है जब शिव जी नटराज नृत्य करते हैं। हर महीने में 2 बार आता है। दिन भर उपवास, सूर्यास्त के समय अभिषेक, महामृत्युंजय 108 बार, प्रदोष कथा। सोम प्रदोष (सोमवार + त्रयोदशी) सबसे शक्तिशाली। 100 गायों के दान का फल मिलता है। 11 प्रदोष continuous करना सबसे प्रभावी।
महाशिवरात्रि की 4 प्रहर पूजा क्या होती है?+
महाशिवरात्रि की रात 4 भागों (प्रहरों) में बंटी होती है। हर प्रहर अलग द्रव्य से अभिषेक: (1) पहला प्रहर (शाम 6-9): दूध से, (2) दूसरा प्रहर (9 PM-12 AM): दही से, (3) तीसरा प्रहर (12-3 AM): घी से, (4) चौथा प्रहर (3-6 AM): शहद से। पूरी रात जागरण, 'ॐ नमः शिवाय' का अखंड जाप, शिव चालीसा, रुद्राष्टकम, शिव तांडव। यह साल की सबसे शक्तिशाली पूजा है। 2026 में महाशिवरात्रि बीत चुकी (17 फरवरी) – अगली 7 मार्च 2027।
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