सुखकर्ता दुःखहर्ता, वार्ता विघ्नाची। नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची। सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची। कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥ जय देव जय देव जय मंगल मूर्ती। दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ती॥ रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा। चंदनाची उटी कुंकुम केशरा। हिरे जडित मुकुट शोभतो बरा। रुन्झुनती नूपुरे चरणी घागरिया॥ जय देव जय देव जय मंगल मूर्ती। दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ती॥ लंबोदर पीतांबर फणिवर वंदना। सरल सोंड वक्रतुंड त्रिनयना। दास रामाचा वाट पाहे सदना। संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना॥ जय देव जय देव जय मंगल मूर्ती। दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ती॥