Hanuman Chalisa is the 40-verse devotional hymn (chaalis = forty) dedicated to Hanuman. Composed in simple Awadhi or Hindi verse, the chalisa narrates the deity's qualities, deeds, and protective powers across forty short chaupai stanzas, ending in a doha couplet. Devotees recite it after morning bath or before sleep at night - reading aloud is considered more powerful than silent reading because the sound vibrations carry the prayer to the deity. The chalisa is most auspiciously read on Tuesday or Saturday. Children, elders, and beginners often start their devotional journey with the chalisa because the verses are short, rhythmic, and easy to memorise. Read the full Hindi text below and watch the embedded recording to hear the traditional pronunciation and rhythm.
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ ॥ दोहा ॥ जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ राम दूत अतुलित बलधामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ ॥ चौपाई ॥ महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन विराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा॥ हाथ वज्र औ ध्वजा विराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाए। श्री रघुवीर हरषि उर लाए॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कवि कोविद कही सके कहाँ ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा॥ तुम्हरो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही। जलधि लाँघि गये अचरज नाही॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक ते काँपै॥ भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीर॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ ॥ दोहा ॥ पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
Daily reading is the traditional practice - once in the morning after bath, once at night before sleep. Tuesday or Saturday is considered the most spiritually charged day for this chalisa. Some devotees do 11 or 21 readings on the deity's day for specific intentions.
Both are accepted. Memorising allows you to chant during travel or work, while reading from text gives full attention to each verse. Most devotees gradually memorise the chalisa over months of daily reading.
East-facing (toward sunrise) is preferred for most chalisas. For Hanuman specifically, the direction matters less than the consistency of practice. Sit on a clean asana, light a diya, and read with attention.
Hanuman Aarti
Aarti
Hanuman Ashtak
Mantra
Hanuman Bajrang Baan
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Hanuman Beej Mantra
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Hanuman Gayatri Mantra
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