॥ दोहा॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम । अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम । पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज । जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज । ॥ चौपाई ॥ जय यदुनन्दन जय जगवन्दन । जय वसुदेव देवकी नन्दन । जय यशुदा सुत नन्द दुलारे । जय प्रभु भक्तन के दृग तारे । ... ॥ दोहा ॥ यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि। अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥