Lakshmi Chalisa

    📜ChalisaGoddess Lakshmi
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    ॥ दोहा ॥ मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध करि, देहु हमें सुख-रास॥ ॥ चौपाई ॥ जय लक्ष्मी जगदंबिका, करि करुणा भव मोचन। विष्णुप्रिया कल्याणमयी, दुःख-दरिद्र विमोचन॥ सिंहासन बैठी दिव्य छवि, कंचन की जग शोभा। कमलासन में विराजति, चतुर्भुज रूप अनोखा॥ वरदाभय कर कमल दल, स्वर्ण माला दृग भावे। किरण जू चमकति अनूप, ललित अति मन भावे॥ धन लक्ष्मी धान्यलक्ष्मी, आदिशक्ति सर्वेश्वरी। गज लक्ष्मी सुखदायिनी, जय जय जगदम्बिके॥ अन्नपूर्णा अंबिके भवानी, सरस्वती शारदा जाई। रूप अनेक निरखत गावत, नारद ऋषि मन लाई॥ जो साधक नित ध्यान धरत, उनको सिद्धि मिलत भारी। रिद्धि-सिद्धि सुख-सम्पत्ति, लक्ष्मी कृपा अपारि॥ जो कोई तुमको ध्यान धरत, करत सदा सेवकाई। उनके भवन में सतत, धन–धन्य समृद्धि छाई॥ जिनके गृह तुम रहति, मन वचन कर्म निरमल। सुख सम्पत्ति भरपूर रहत, कटत विपत्ति के बादल॥ विष्णु प्रिया जगदम्बा माता, तुम करुणा अम्बुधि महा। मांगत दीन दयालु जन, भरत कोष झर–झर बहा॥ तुम्हरा प्रभाव अपार महिमा, वेद–शास्त्र गावत नित। तुम बिन यज्ञ न होते माता, न ही होता कोई सत्कृत॥ जो कोई पाठ करे श्रद्दा से, मन–वांछित फल पावे। रोग–शोक–दरिद्रता मिटे, सुख–शांति नित्य सुहावे॥ भक्तन की रक्षा करती, लक्ष्मी माता दयावन्त। सुख–सौभाग्य समृद्धि दै, करति सदा कल्याण॥ ॥ दोहा ॥ मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध करि, देहु हमें सुख-रास॥