जय शनि देव, जय शनि देव। जय शनि देव, जय शनि देव॥ कोण स्तुति तुम्हारी करै, मन जुगति न उपजै। दीन दयाल कृपाल तुम्हीं, करत सदा हित सज्जन कै॥ जय शनि देव, जय शनि देव॥ काला वरन, काले वस्त्र, काले ही तेरा रूप। तेरी दृष्टि जब पड़त है, मिटत सकल संताप॥ जय शनि देव, जय शनि देव॥ तेल तिल अर्पण जो करै, मन वांछित फल पावै। शनि की कृपा दृष्टि पड़ै, दुख संकट सब भागै॥ जय शनि देव, जय शनि देव॥ भक्त करें जो विनती, मन वांछित फल पावै। साधु, संत, जन की रक्षा, हरि की आज्ञा पावै॥ जय शनि देव, जय शनि देव॥ जो यह आरती गावे, शनि दुख दूर करै। कृपा करहु जय शनि देव, भक्तन संकट हरै॥ जय शनि देव, जय शनि देव॥