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देव दिवाली / कार्तिक पूर्णिमा - महत्व, स्नान और विधि
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देव दिवाली / कार्तिक पूर्णिमा - महत्व, स्नान और विधि

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

देव दिवाली और कार्तिक पूर्णिमा क्या है

देव दिवाली, देवताओं की दिवाली, मुख्य दिवाली के पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है। माना जाता है देवता पवित्र गंगा में स्नान हेतु उतरते और आनंद में दीप जलाते हैं, विशेषकर वाराणसी में, जहाँ घाट हजारों दीयों से जगमगाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय का भी स्मरण कराती है, जिससे इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा कहा जाता है।

तिथि और यह कब आती है

देव दिवाली कार्तिक मास की पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र) को आती है, वह उज्ज्वल पूर्णिमा रात्रि जो पवित्र मास का समापन करती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह प्रायः नवंबर में आती है। मुख्य उत्सव और दीप-प्रज्वलन उस संध्या को होता है जब प्रदोष (सांझ) में पूर्णिमा रहती है। 2026 या 2027 की सटीक तिथि और स्नान मुहूर्त वंदना पंचांग पर अवश्य देखें, क्योंकि समय प्रतिवर्ष बदलता है।

महत्व और गंगा स्नान

कार्तिक पूर्णिमा हिंदू वर्ष के सबसे पवित्र स्नान दिनों में एक है। सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में, विशेषकर वाराणसी, प्रयागराज या हरिद्वार में गंगा में गंगा स्नान (पवित्र स्नान) पापों का नाश करता और महान पुण्य देता माना जाता है। नदी पर तैराए और घाटों पर जलाए दीप देवताओं, पूर्वजों और दिवंगत आत्माओं का सम्मान करते हैं। सिखों के लिए यह दिन गुरु नानक जयंती, गुरु नानक देव जी के अवतरण के रूप में भी मनाया जाता है।

स्नान और पूजा विधि

स्नान और पूजा विधि

1. सूर्योदय से पूर्व उठें और गंगा या किसी नदी में पवित्र स्नान करें; संभव न हो तो घर के स्नान जल में थोड़ा गंगाजल मिलाएँ। 2. सूर्य या विष्णु मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य (जल) अर्पित करें। 3. घी के दीप, तुलसी, पुष्प और नैवेद्य से भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें। 4. संध्या को दीप दान करें - देवताओं और पूर्वजों हेतु नदी पर या घर में दीप तैराएँ या जलाएँ। 5. कार्तिक पूर्णिमा और त्रिपुरारी कथा सुनें या पढ़ें। 6. जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, घी या धन का दान करें, और दिनभर सात्विक, दानशील भाव रखें।

कार्तिक पूर्णिमा के मंत्र

स्नान और अर्घ्य अर्पण के समय विष्णु मंत्र का जाप करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

त्रिपुरासुर का नाश करने वाले शिव हेतु जाप करें:

ॐ नमः शिवाय

एक सरल स्नान संकल्प जो अनेक पढ़ते हैं:

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।

यह सभी पवित्र नदियों का स्नान जल में आह्वान करता है।

इस दिन के लाभ और भाव

कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान और दीप दान पापों का नाश करता, पूर्वजों को शांति देता और स्थायी पुण्य प्रदान करता माना जाता है। इस दिन दान सामान्य से कई गुना फलदायी माना जाता है। अनुष्ठान से परे, दिन का सच्चा भाव कृतज्ञता और प्रकाश है - दीप अर्पित करना ताकि भीतरी और बाहरी अंधकार ईश्वर की आभा को स्थान दे।

पाठकों के प्रश्न

देव दिवाली और कार्तिक पूर्णिमा कब है?+

यह कार्तिक की पूर्णिमा को आती है, प्रायः नवंबर में, दिवाली के पंद्रह दिन बाद। सटीक तिथि और स्नान मुहूर्त वंदना पंचांग पर अवश्य देखें।

इसे देव दिवाली क्यों कहते हैं?+

यह देवताओं की दिवाली है। माना जाता है देवता गंगा में स्नान हेतु उतरते और उत्सव में दीप जलाते हैं, विशेषकर वाराणसी के घाटों पर जो असंख्य दीयों से जगमगाते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान क्यों महत्वपूर्ण है?+

यह वर्ष के सबसे पवित्र स्नान दिनों में एक है। सूर्योदय से पूर्व पवित्र स्नान, विशेषकर गंगा में, पापों का नाश करता और महान पुण्य व आशीर्वाद देता माना जाता है।

देव दिवाली पर दीप दान क्या है?+

दीप दान दीपों का अर्पण है - संध्या को घर में जलाए या नदी पर तैराए - देवताओं, पूर्वजों और दिवंगत आत्माओं हेतु। यह देव दिवाली का केंद्रीय अनुष्ठान है।

क्या कार्तिक पूर्णिमा स्नान घर पर कर सकते हैं?+

हाँ। यदि पवित्र नदी तक न पहुँच सकें, तो स्नान जल में थोड़ा गंगाजल मिलाएँ, स्नान संकल्प लें, और घर पर उसी भक्ति से उपासना करें।

क्या कार्तिक पूर्णिमा अन्य पर्वों से जुड़ी है?+

हाँ। यह शिव की त्रिपुरासुर पर विजय (त्रिपुरारी पूर्णिमा) का स्मरण कराती है और इसी दिन गुरु नानक जयंती, गुरु नानक देव जी का अवतरण, भी मनाया जाता है।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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