गंगोत्री में किसकी पूजा होती है
गंगोत्री मंदिर देवी गंगा को समर्पित है और उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी के तट पर उस हिमनद के निकट स्थित है, जहाँ से परंपरागत रूप से इस नदी का उद्गम माना जाता है।
यह उत्तराखंड के चार धामों में से एक है और गंगा नदी के मैदानों में बहने से पहले देवी गंगा का प्रतीकात्मक आसन माना जाता है।
इतिहास और कथा
कथा के अनुसार राजा भगीरथ ने पीढ़ियों तक कठोर तपस्या की ताकि स्वर्ग से गंगा को धरती पर ला सकें और अपने पूर्वजों की आत्माओं को मुक्ति दिला सकें। गंगा मान गईं, परंतु उनका वेग इतना प्रचंड था कि केवल भगवान शिव ही उन्हें धारण कर सकते थे; शिव जी ने उन्हें अपनी जटाओं में समेटा और फिर धीरे-धीरे धरती पर उतारा।
मंदिर के निकट स्थित शिला, जिसे भगीरथ शिला कहा जाता है, परंपरागत रूप से उनकी तपस्या के स्थल से जोड़ी जाती है।
महत्व और श्रद्धालु क्या प्रार्थना करते हैं
श्रद्धालु गंगोत्री की यात्रा शुद्धि, माँ गंगा के आशीर्वाद और पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना से करते हैं। अनेक श्रद्धालु यहाँ से गंगाजल घर ले जाते हैं, यह मानते हुए कि उद्गम स्थल का जल विशेष रूप से पवित्र होता है।
मंदिर के निकट शीतल भागीरथी में स्नान को श्रद्धा का गहरा शुद्धिकरण कार्य माना जाता है।
दर्शन गाइड: समय, मौसम और उत्सव

मंदिर लगभग छह महीने के लिए खुलता है, सामान्यतः अप्रैल-मई में अक्षय तृतीया से कार्तिक मास में दीपावली के आसपास तक, जिसके बाद भारी बर्फबारी से यह बंद हो जाता है।
प्रतिदिन दर्शन सामान्यतः प्रातःकालीन आरती, दिनभर दर्शन और संध्या गंगा आरती के क्रम में होता है, सटीक समय हर वर्ष मंदिर समिति द्वारा तय किया जाता है। खुले मौसम में अनेक श्रद्धालु आगे गौमुख तक भी जाते हैं, जिसे नदी का परंपरागत उद्गम माना जाता है।
गंगोत्री कैसे पहुँचें
गंगोत्री उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है और निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जहाँ से उत्तरकाशी होते हुए सड़क मार्ग से मंदिर पहुँचा जाता है।
श्रद्धालु प्रायः इसे यमुनोत्री के साथ मिलाकर चार धाम यात्रा के रूप में करते हैं।
जप हेतु मंत्र और सार
श्रद्धालु ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं और माँ गंगा को ॐ गंगा देव्यै नमः जैसे मंत्रों से प्रार्थना अर्पित करते हैं। सरल अर्थ - माँ गंगा को प्रणाम।
गंगोत्री यह स्मरण कराती है कि भगीरथ की तपस्या के समान श्रद्धा और धैर्यपूर्ण भक्ति पीढ़ियों तक आशीर्वाद ला सकती है - पूजा एक विश्वास और प्रेम का कार्य है, कोई सौदा नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गंगोत्री का क्या महत्व है?+
यह गंगा नदी का प्रतीकात्मक उद्गम स्थल है और उत्तराखंड के चार धामों में से एक, देवी गंगा को समर्पित, भागीरथी नदी के तट पर स्थित है।
गंगा के धरती पर अवतरण की कथा क्या है?+
परंपरा के अनुसार राजा भगीरथ की तपस्या से गंगा स्वर्ग से उतरीं, और भगवान शिव ने उनके प्रचंड वेग को अपनी जटाओं में धारण कर धीरे-धीरे धरती पर उतारा।
क्या गंगोत्री ही गंगा नदी का वास्तविक उद्गम है?+
मंदिर परंपरागत और प्रतीकात्मक उद्गम स्थल है; नदी का वास्तविक उद्गम माना जाने वाला हिमनद गौमुख आगे स्थित है, जहाँ श्रद्धालु खुले मौसम में जाते हैं।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
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