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गोविंद दामोदर स्तोत्र: अर्थ, श्लोक और लाभ
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गोविंद दामोदर स्तोत्र: अर्थ, श्लोक और लाभ

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 23, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

गोविंद दामोदर स्तोत्र का महत्व

गोविंद दामोदर स्तोत्र एक प्रिय कृष्ण स्तुति है जो परंपरागत रूप से संत बिल्वमंगल ठाकुर (लीला शुक) को मानी जाती है। इसका दूसरा नाम करावलंबम है, जिसका अर्थ है 'हाथ का सहारा' - वह प्रार्थना जिसे जीवन की हर स्थिति में सहारा देने वाले हाथ की तरह थामा जाता है।

इसकी सुंदरता इसकी टेक में है। हर श्लोक पावन नामों गोविंद दामोदर माधवेति से समाप्त होता है - 'हे गोविंद, हे दामोदर, हे माधव!' स्तोत्र कृष्ण के जीवन के दृश्य चित्रित करता है - गोपियाँ उन्हें पुकारती हुईं, यशोदा उन्हें रस्सी से बाँधती हुईं (इसीलिए वे दामोदर कहलाते हैं, 'जिनका उदर बँधा हो'), द्रौपदी सहायता के लिए रोती हुईं - और दिखाता है कि सुख में, संकट में, और अंतिम साँस में एकमात्र करने योग्य कार्य उनके नामों का जप है।

मूल शिक्षा सरल और गहन है: कृष्ण के नामों का निरंतर स्मरण और उच्चारण करें, क्योंकि इस युग में पावन नाम सबसे सरल और सर्वशक्तिमान साधना है।

मुख्य श्लोक अर्थ सहित

आरंभिक भाव: अग्रे कुरूणाम् ... राधा वन में, श्रीवत्स चिह्न हृदय पर, अनंत नाग के साथ विराजमान।

सबसे प्रिय और बार-बार उद्धृत श्लोक अंतिम समय का है:

श्रीकृष्ण राधावर गोकुलेश गोपाल गोवर्धननाथ विष्णो। जिह्वे पिबस्वामृतमेतदेव गोविन्द दामोदर माधवेति॥

श्री कृष्ण राधावर गोकुलेश गोपाल गोवर्धननाथ विष्णो, जिह्वे पिबस्वामृतमेतदेव गोविन्द दामोदर माधवेति।

अर्थ: हे जिह्वा, केवल यही अमृत पी - श्री कृष्ण, राधा के प्रिय, गोकुल के स्वामी, गोपाल, गोवर्धन के नाथ, विष्णु के नाम - गोविंद, दामोदर, माधव!

हर श्लोक के अंत की टेक: गोविन्द दामोदर माधवेति (गोविंद दामोदर माधवेति) - 'हे गोविंद, हे दामोदर, हे माधव!' गोविंद का अर्थ है गायों और इंद्रियों के रक्षक, दामोदर वे जिनका उदर यशोदा के प्रेम से बँधा, और माधव लक्ष्मी के स्वामी तथा माधुर्यमय।

गोविंद दामोदर स्तोत्र के जप के लाभ

  • कृष्ण का निरंतर स्मरण: टेक जिह्वा और मन को दिन भर पावन नामों के जप में प्रशिक्षित करती है।
  • शांति और रक्षा: द्रौपदी की तरह भक्त हर कठिनाई में कृष्ण को पुकारना और उनका सहारा अनुभव करना सीखता है।
  • हृदय की शुद्धि: ये नाम चिंता, भय और सांसारिक आसक्ति को घोल देते हैं।
  • अंतिम क्षण की तैयारी: परंपरा मानती है कि जो इन नामों का अभ्यास करता है वह मृत्यु के समय इन्हें स्मरण करेगा, जो सभी आशीर्वादों में सर्वश्रेष्ठ है।
  • भक्ति की गहराई: कृष्ण की लीलाओं की मधुर छवि स्वाभाविक रूप से प्रेम और भक्ति जगाती है।

ये भक्ति परंपरा में वर्णित पारंपरिक आध्यात्मिक लाभ हैं; स्तोत्र एक भक्ति साधना है, किसी चिकित्सकीय या सांसारिक प्रयास का विकल्प नहीं।

जप कैसे करें - विधि

जप कैसे करें - विधि

1. उत्तम समय: स्नान के बाद प्रातः, या संध्या में घर के देवता के समक्ष। स्तोत्र किसी भी खाली क्षण में मन ही मन भी पढ़ा जा सकता है। 2. आसन और चित्र: कृष्ण के चित्र के समक्ष पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठें; घी का दीप जलाएँ और तुलसी उपलब्ध हो तो अर्पित करें। 3. भाव से पढ़ें: श्लोक स्वर में पढ़ें, टेक गोविंद दामोदर माधवेति को प्रेम से जिह्वा पर बहने दें। इसकी धुन सरल है और गाने के लिए बनी है। 4. एक श्लोक भी पर्याप्त: समय कम हो तो केवल 'श्री कृष्ण राधावर...' श्लोक और टेक दोहराएँ - पावन नाम स्वयं में पूर्ण है। 5. टेक साथ रखें: दिन भर, चलते या काम करते हुए, धीरे से 'गोविंद दामोदर माधव' दोहराएँ ताकि नाम साँस पर बने रहें। 6. प्रणाम के साथ समापन करें और जप कृष्ण के चरणों में अर्पित करें।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

गोविंद दामोदर स्तोत्र किस बारे में है?+

यह एक कृष्ण स्तुति है जिसमें हर श्लोक पावन नामों 'गोविंद दामोदर माधवेति' से समाप्त होता है। यह कृष्ण के जीवन के दृश्य दर्शाता है और भक्त को हर परिस्थिति में उनके नामों का निरंतर स्मरण और जप सिखाता है।

इसे करावलंबम भी क्यों कहते हैं?+

करावलंबम का अर्थ है 'हाथ का सहारा'। स्तोत्र इसलिए ऐसा कहलाता है क्योंकि सहारा देने वाले हाथ की तरह कृष्ण के नामों का जप भक्त को जीवन की हर स्थिति में और अंतिम क्षण में थामे और स्थिर रखे, यही इसका उद्देश्य है।

कृष्ण को दामोदर क्यों कहते हैं?+

दामोदर का अर्थ है 'जिनका उदर रस्सी (दाम) से बँधा हो'। यह उस लीला का स्मरण कराता है जिसमें माता यशोदा ने नन्हे कृष्ण को प्रेमपूर्वक ऊखल से बाँधा - इसका संकेत कि प्रभु केवल भक्त के प्रेम से बँधते हैं।

क्या गोविंद दामोदर स्तोत्र कोई भी पढ़ सकता है?+

हाँ। कोई प्रतिबंध नहीं है - किसी भी पृष्ठभूमि का कोई भी इसे श्रद्धा से पढ़ सकता है। दिन भर केवल एक टेक 'गोविंद दामोदर माधव' दोहराना भी पूर्ण और आशीर्वादमय साधना मानी जाती है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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