हनुमान आरती में विशेष शक्ति क्यों
हिंदू घरों में गाई जाने वाली सभी आरतियों में, हनुमान आरती - आरती कीजै हनुमान लला की का अनूठा स्थान। संत तुलसीदास (वही संत जिन्होंने हनुमान चालीसा व रामचरितमानस लिखे) द्वारा रचित, यह आरती मात्र छह संक्षिप्त छंदों में शुद्ध भक्ति का उद्गार।
हर हनुमान मंदिर इसे दिन में दो बार क्यों गाता -
- प्रातः आरती - दिन हेतु हनुमान की रक्षा का आह्वान
- संध्या आरती - दिन को कृतज्ञता से समाप्त
- मंगल व शनिवार संध्या - पूर्ण घी दीये के साथ विस्तारित संस्करण
आरती की संरचना - प्रत्येक 4 पंक्तियों के छह छंद। प्रत्येक छंद हनुमान जी की एक विशिष्ट विभूति का गायन - बल, भक्ति, लंका दहन, पर्वत उठाना, राम के समक्ष बाल-सुलभ कृपा, व भक्तों हेतु राम-नाम का परम वरदान। छह छंदों के अंत तक, आप तीन मिनट में हनुमान की पूरी महिमा से गुज़र चुके।
एक पंक्ति जो पूरी आरती समेटे - 'आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट-दलन रघुनाथ कला की' - 'हनुमान लला (प्रिय बालक) की आरती करें, दुष्टों के नाशक, रघुनाथ (राम) के बल।'
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पूर्ण हनुमान आरती बोल - हिंदी
देवनागरी (पूर्ण पाठ) -
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग दोष जाके निकट न झाँके॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारि सिया सुधि लाये॥ लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥ लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। लाये संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जम कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥ बाएँ भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारे। जय जय जय हनुमान उचारे॥ कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमान जी की आरती गावे। बसि बैकुंठ परम पद पावे॥
उच्चारण सुझाव -
- 'लला' = प्रिय बालक
- 'गिरिवर' = महान पर्वत ('पर्वतों में श्रेष्ठ')
- 'पवनसुत' = वायु के पुत्र
- पहली बार धीरे गाएँ, दोहराव में तेज़
- ताल पर ताली - 1-2-3 विराम, 1-2-3 विराम
हनुमान आरती - पूर्ण अंग्रेज़ी अनुवाद अर्थ सहित
छंद 1 - आरंभिक आह्वान - 'आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट-दलन रघुनाथ कला की।'
प्रिय हनुमान की आरती करें, दुष्टों के नाशक व रघुनाथ (राम) के बल।
छंद 2 - हनुमान का ब्रह्मांडीय बल - 'जाके बल से गिरिवर काँपे, रोग दोष जाके निकट न झाँके। अंजनि पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई।'
जिनके बल से पर्वत भी काँपते, जिनके निकट कोई रोग-दोष आने का साहस न करे। माता अंजनी के पुत्र, महान बल देने वाले, संत-भक्तों के शाश्वत सहायक।
छंद 3 - लंका मिशन - 'दे बीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सिया सुधि लाये।'
रघुनाथ द्वारा वीर भेजे गए, लंका जलाकर सीता का समाचार लाए।
छंद 4 - दानवों को पराजित व लक्ष्मण को बचाना - 'लंका जारि असुर संहारे, सियारामजी के काज सँवारे। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे, लाये संजीवन प्राण उबारे।'
लंका जलाकर असुरों का संहार कर सिया-राम का कार्य संवारा। युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित होने पर, संजीवनी लाकर प्राण बचाए।
छंद 5 - अहिरावण-वध - 'पैठि पाताल तोरि जम कारे, अहिरावण की भुजा उखारे।'
पाताल लोक में प्रवेश कर मृत्यु के द्वार तोड़ अहिरावण की भुजाएँ उखाड़ीं।
छंद 6 - सार्वभौमिक पूजा - 'सुर नर मुनि आरती उतारे, जय जय जय हनुमान उचारे।'
देव, मानव, मुनि आरती उतारते - 'जय, जय, जय हनुमान!'
समापन दोहा - वचन - 'जो हनुमान जी की आरती गावे, बसि बैकुंठ परम पद पावे।'
जो हनुमान आरती गाता वह बैकुंठ में निवास कर परम पद प्राप्त करता।
हनुमान आरती कब गाएँ - सर्वोत्तम समय, दिन व विधि

दिन के सर्वोत्तम समय -
- सूर्योदय (5:30–6:30) - हनुमान सूर्योदय पर सर्वाधिक ग्रहणशील; यह उनकी चरम ऊर्जा-खिड़की
- सूर्यास्त (6:00–7:30) - दिन समापन; हर हनुमान मंदिर का मानक 'संध्या आरती' समय
- रात 8 बजे - जो सूर्यास्त नहीं पकड़ सके; फिर भी शुभ संधि-काल में
सप्ताह के सर्वोत्तम दिन -
- मंगलवार - हनुमान का मुख्य दिवस; भक्तों हेतु अनिवार्य आरती
- शनिवार - शनि-संबंधी कष्ट दूर करने हेतु (शनि साढ़े साती, ढैय्या)
- हनुमान जयंती - विस्तारित आरती, पूर्ण भजन-कीर्तन
घरेलू आरती की चरण-दर-चरण विधि - 1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (हनुमान हेतु लाल/केसरिया बेहतर) पहनें 2. हनुमान जी के चित्र/मूर्ति के सामने पूर्व या उत्तर मुख बैठें 3. ताज़ा फूल (लाल गुड़हल हनुमान का प्रिय) व माला अर्पित 4. हनुमान जी को सिंदूर या लाल कुमकुम तिलक 5. सरसों तेल का दीया जलाएँ (हनुमान का प्रिय तेल) - दैनिक एकवाटी, मंगलवार 4 या 5 वाटी 6. छोटी थाली में कपूर जलाएँ 7. बूंदी लड्डू या केला भोग अर्पित 8. खड़े या बैठे, आरती थाली दाएँ हाथ में पकड़ें 9. हनुमान जी के सामने आरती को घड़ी की दिशा में गोलाकार घुमाएँ - पहले शीर्ष, फिर पूरी मूर्ति का पूर्ण चक्र, धीरे 10. पूरे 6 छंद बिना जल्दबाज़ी गाएँ - सामान्य अवधि 3–4 मिनट 11. आँखें बंद, हाथ जोड़ें, 1 मिनट मौन प्रार्थना 12. भोग प्रसाद रूप वितरित करें - कभी वापस न लें
मुख्य नियम -
- दीये हेतु सरसों तेल सबसे महत्वपूर्ण विवरण। हनुमान को इसकी सुगंध प्रिय कही जाती।
- शारीरिक रूप से सक्षम हों तो आरती खड़े होकर अनिवार्य; केवल वृद्ध/बीमार बैठ सकते।
- हनुमान को कभी तुलसी न चढ़ाएँ - तुलसी केवल विष्णु/कृष्ण रूपों के लिए।
हनुमान आरती के 10 आध्यात्मिक व व्यावहारिक लाभ
परंपरा कहती हनुमान आरती का नियमित गायन आंतरिक रूपांतरण व बाह्य रक्षा दोनों लाता। शताब्दियों के भक्ति साहित्य में सर्वाधिक उद्धृत 10 लाभ -
1. भय निवारण - हनुमान हर रूप के भय के नाशक। दैनिक आरती धीरे-धीरे चिंता, पैनिक, अतार्किक भय घोलती।
2. नज़र व नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा - 'बाएँ भुजा असुर दल मारे' पंक्ति प्रत्यक्ष कवच मानी जाती।
3. विपत्ति में बल - हनुमान बल के देवता। न्यायालय, व्यवसाय, स्वास्थ्य संकटों में नई इच्छा-शक्ति।
4. शनि दोष / साढ़े साती राहत - हनुमान एकमात्र देव जो शनि देव को शांत कर सकते। शनिवार हनुमान आरती शनि-कष्ट का शास्त्रीय उपाय।
5. मानसिक शांति व स्पष्टता - दोहराई लय व भक्ति-समर्पण अति-सोच मन को शीतल करते।
6. अटकी स्थितियों का समाधान - जहाँ तर्क, धन, प्रयास विफल, हनुमान कृपा गतिरोध तोड़ती। निरंतर 21 दिन गाएँ।
7. स्वास्थ्य पुनर्प्राप्ति - संजीवनी का छंद स्वास्थ्य कष्टों हेतु आह्वानित। औषधि का स्थान नहीं - शक्तिशाली पूरक।
8. वैवाहिक व पारिवारिक सामंजस्य - हनुमान शुद्ध, अहंकार-रहित प्रेम के देव।
9. मांगलिक / विवाह विलंब निवारण - विलंबित विवाह हेतु शास्त्रीय उपाय।
10. मोक्ष का मार्ग - समापन दोहा बैकुंठ का वचन देता।
41-दिन का वचन - लगातार 41 दिन बिना एक भी छूटे पूर्ण हनुमान आरती गाएँ, हनुमान कृपा दृश्य रूप जीवन में प्रवेश। एक दिन भी छूटा तो गिनती फिर से।
हनुमान आरती गाते समय से बचने योग्य सामान्य गलतियाँ
धार्मिक घरों में भी छोटी त्रुटियाँ आरती की आध्यात्मिक शक्ति कम करतीं। 8 सर्वाधिक सामान्य -
1. दीये हेतु सरसों तेल के स्थान पर साधारण तेल। हनुमान हेतु सरसों तेल अनिवार्य। तिल, घी, अन्य तेल अन्य देवताओं हेतु।
2. खड़े होने के बजाय बैठकर गाना। आरती भौतिक अर्पण - खड़ा होना, दीये के साथ झूमना, लयबद्ध ताली।
3. छंदों में जल्दबाज़ी। हर छंद 25–30 सेकंड लेना चाहिए। पूर्ण आरती = न्यूनतम 3–4 मिनट।
4. दीया जलाए बिना आरती गाना। दीया आंतरिक प्रकाश के जागरण का प्रतीक।
5. हनुमान को तुलसी अर्पण। तुलसी केवल विष्णु/कृष्ण के लिए। हनुमान को लाल फूल (गुड़हल, गुलाब)।
6. कोरस के दौरान आँखें बंद न करना। 'जय जय जय हनुमान' पंक्ति आँखें बंद कर ध्वनि भीतर गूँजने देने का क्षण।
7. मांसाहार/मद्यपान के तुरंत बाद गाना। आरती हेतु सात्विक स्थिति आवश्यक। न्यूनतम 4 घंटे प्रतीक्षा।
8. आरती समाप्ति से पहले प्रसाद वितरण। सभी भोग पूर्ण आरती समाप्ति के बाद ही।
हनुमान आरती को दैनिक आधार बनाएँ

हिंदू भक्ति जीवन से यदि एक अभ्यास लें व शेष वर्षों के लिए रखें, हनुमान आरती को रखें। दिन में तीन मिनट। छह छंद। एक सरसों तेल का दीया। बस इतना।
यह अभ्यास लगभग किसी अन्य के ऊपर क्यों -
- किसी भी कार्यक्रम में फिट (3 मिनट)
- महँगी वस्तुओं की आवश्यकता नहीं (सरसों तेल + दीया = ₹50)
- शुरुआती या उन्नत भक्त - सब के लिए कार्य
- हर जीवन समस्या को संबोधित - भय, धन, स्वास्थ्य, विवाह, शनि - एक देवता के माध्यम से
- साथ गाने पर पारिवारिक बंधन बनाता
- बच्चों को लय व दोहराव के माध्यम से भक्ति सिखाता
आरंभ प्रोटोकॉल - पूर्णतया शुरुआती -
- दिन 1–7 - दिन में दो बार केवल ऑडियो सुनें। गाने का प्रयास न करें।
- दिन 8–14 - सुनते हुए धीरे साथ गाएँ। उच्चारण की चिंता न करें।
- दिन 15–21 - बोल सामने रखकर बिना ऑडियो गाएँ।
- दिन 22 आगे - स्मृति से गाएँ। दीया, भोग, खड़ी मुद्रा जोड़ें।
अनुभवी भक्तों हेतु - 41-दिन अबाधित प्रोटोकॉल लें।
जय हनुमान। जय श्री राम।
🪔 वंदना ऐप दैनिक हनुमान आरती सहज बनाता।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
'आरती कीजै हनुमान लला की' किसने रचित?+
हनुमान आरती संत तुलसीदास (1532–1623 ई.) द्वारा रचित - वही संत जिन्होंने हनुमान चालीसा व रामचरितमानस लिखे।
क्या मैं प्रतिदिन हनुमान आरती गा सकता हूँ?+
हाँ - दैनिक हनुमान आरती हिंदू धर्म में सर्वाधिक अनुशंसित भक्ति अभ्यासों में से एक। प्रातः व संध्या (दिन में दो बार) आदर्श।
हनुमान आरती दीये के लिए सरसों तेल क्यों?+
सरसों तेल हनुमान का प्रिय तेल - इसका धुआँ उन्हें प्रत्यक्ष रूप से प्रसन्न करता। इसमें रोगाणुरोधी गुण भी जो भौतिक रूप से कमरे को शुद्ध करते।
हनुमान जी को कौन से फूल चढ़ाएँ?+
लाल गुड़हल हनुमान का प्रिय। लाल गुलाब, गेंदा, लाल कमल भी स्वीकार्य। हनुमान को कभी तुलसी न चढ़ाएँ - तुलसी केवल विष्णु/कृष्ण रूपों के लिए।
क्या स्त्रियाँ हनुमान आरती गा सकती हैं?+
हाँ - हनुमान आरती में लिंग प्रतिबंध नहीं। पूरे भारत में स्त्रियाँ शताब्दियों से गाती। एकमात्र परंपरागत शर्त - मासिक धर्म के दौरान न गाएँ (व्यक्तिगत विकल्प, सख्त नियम नहीं)।
हनुमान आरती गाने में कितना समय?+
पूर्ण हनुमान आरती (6 छंद + समापन दोहा) उचित भक्ति गति में गाने पर 3–4 मिनट लेती। 2 मिनट से कम मतलब जल्दबाज़ी।
41-दिन हनुमान आरती संकल्प में एक दिन छूट जाए तो?+
परंपरा कहती एक दिन भी छूटा तो 41-दिन गिनती दिन 1 से पुनः आरंभ। यह कठोरता ही अभ्यास की शक्ति का स्रोत - अनुशासन स्वयं अर्पण। बिना अपराधबोध फिर शुरू करें।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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