हनुमान अष्टोत्तर क्या है?
हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली भगवान हनुमान - बजरंग बली, पवन पुत्र, मारुति, अंजनेय भी कहलाते - के 108 नामों का पवित्र स्तोत्र। यह हनुमत् सहस्रनामावली (1000 नाम) और स्कंद पुराण में पाया जाता। हर 108 नामों में से एक हनुमान के एक पहलू को दर्शाता - उनके जन्म (अंजनेय, अंजना के पुत्र) से लेकर उनकी अपार शक्ति (वज्रांग, वज्र-शरीर), उनकी राम भक्ति (रामदास) से लेकर ब्रह्मांडीय रूप (भीम विक्रम) तक। हनुमान चालीसा (तुलसीदास द्वारा अवधी में 40 चौपाइयाँ, भक्ति काव्य) और हनुमान बाहुक (44 उपचार श्लोक) के विपरीत, अष्टोत्तर संस्कृत में है और केंद्रित नामकरण ध्यान के रूप में संरचित। यह इन हेतु पसंदीदा प्रार्थना: मंगलवार/शनिवार भक्ति, कठिन विषयों का सामना करने वाले परीक्षा छात्र, संपत्ति/विरासत विवादों वाले परिवार (हनुमान परम विवाद-समाधक), और काला जादू से सुरक्षा चाहने वाला कोई भी। प्रमुख हनुमान मंदिर (राजस्थान का मेहंदीपुर बालाजी, वाराणसी का संकट मोचन, बेंगलुरु का अंजनेयस्वामी) इसे दैनिक अभिषेक का हिस्सा बनाते। भक्त इसे हनुमान चालीसा के साथ मिलाकर पूर्ण 20-मिनट दैनिक हनुमान साधना करते।
हनुमान के सम्पूर्ण 108 नाम (संस्कृत + अर्थ)
नाम 1-24: ॐ हनुमते (टूटी ठोड़ी), ॐ श्रीप्रदाय, ॐ वायुपुत्राय, ॐ रुद्राय, ॐ अंजनेयाय, ॐ महाबलाय, ॐ महावीराय, ॐ ब्रह्मचारिणे, ॐ महाबुद्धि, ॐ महातेजाय, ॐ महाप्राणाय, ॐ महायोगिने, ॐ महासत्त्वाय, ॐ महाद्युतये, ॐ महादेवाय, ॐ महावज्र, ॐ हरिमर्कट, ॐ महासेनाय, ॐ रामाय प्रियाय, ॐ बजरंगाय, ॐ रामादूताय, ॐ अक्षासुर अंत करिणे, ॐ लंका दाहकाय, ॐ सीता शोक विनाशनाय। नाम 25-48 में सुमति प्रदायक, पुत्र प्रदायक, लक्ष्मण प्राण दाता, रामायण नायक, पिङ्गाक्षाय, वारिधि लंघनाय, सर्व मूर्ति प्रदाय, रावणान्त करिणे, विभीषण सहायाय, सुंदर नामाय, सुंदर काण्ड नायक, अतुल्य बल धाम्ने, वेगवंत, वातात्मजाय, संकट मोचनाय, भक्त वत्सलाय, भक्त कल्प द्रुमाय शामिल। नाम 49-72 में महा कपि, मनोजवाय, मारुति संघ सेविते, द्रोण पर्वत उद्धर्त्रि, संजीवनी औषधि दाता, लक्ष्मण प्राण रक्षण, सूर्य मण्डल भास्कराय, अक्ष हन्त्रे, साम वेद विदुषे शामिल। नाम 73-96 में कवच धराय, दैत्यार्य नाशनाय, दानवारिणे, यशस्विने, विद्वते, साधुवे, यशसा विभाविताय, पिङ्गल अक्ष, महा हनु महायुक्ताय, सहस्र मुखि भैरवाय, सुरार्च्य, सुर वंदिता, महाप्रभु, आगमध्य, वेदाग्य शामिल। नाम 97-108: ॐ कार्य साधकाय, ॐ साधुवे सेविता, ॐ वज्र हनवे, ॐ वज्र नख, ॐ सन्ध्या वन्दनादिरतेश, ॐ ब्रह्माञ्जनीति, ॐ ईश्वराय, ॐ भक्त वन्दित, ॐ महा सुभद्राय, ॐ सर्व कार्य साधक, ॐ महा मारुति, ॐ श्री हनुमते। समापन - 'इति श्री हनुमदष्टोत्तर शतनामावली सम्पूर्णम्'।
दैनिक पाठ के 7 शक्तिशाली लाभ
1. काला जादू व नज़र निवारण - 'संकट मोचनाय', 'दैत्यार्य नाशनाय', 'सहस्र मुखि भैरवाय' सुरक्षात्मक ढाल बनाते। अस्पष्ट बीमारी या पुरानी बदकिस्मती 11-21 दिनों में राहत। 2. करियर बाधाएं व अटकी पदोन्नतियाँ हल - 'कार्य साधकाय' और 'सर्व कार्य साधक' विशेष रूप से व्यावसायिक अवरोध हटाते। 41-दिन मण्डल मापने योग्य करियर गति। 3. परीक्षा सफलता व मानसिक स्पष्टता - 'महा बुद्धि', 'वेदाग्य', 'मनिष्य' नाम संज्ञानात्मक तीक्ष्णता। छात्र कठिन परीक्षाओं से पहले जप अनुशंसा करते। 4. न्यायालय मुकदमे व संपत्ति विवाद हल - हनुमान न्याय के सुरक्षा देवता। 'दैत्यार्य नाशनाय' कानूनी लड़ाई में सहायक। भारतीय हाई कोर्ट के कई वकील अटके मामलों वाले ग्राहकों को हनुमान अष्टोत्तर अनुशंसा करते। 5. शनि दोष निवारण - हनुमान एकमात्र देवता जिनसे शनि डरते। साढ़े साती या ढैय्या में शनिवार दैनिक अष्टोत्तर करने वाले बाधाओं में नाटकीय कमी बताते। 6. भय, चिंता, पैनिक अटैक उपचार - 'भक्त वत्सलाय' और 'महा प्राणाय' नाम साहस बनाते। चिंता विकारों हेतु चिकित्सा का प्रभावी पूरक। 7. भक्ति व आध्यात्मिक जागरण - भौतिक से परे, हनुमान भक्ति के सर्वोच्च उदाहरण। दीर्घकालिक साधक दैनिक हनुमान स्मरण के दुष्प्रभाव के रूप में अपनी गहरी भक्ति विकसित।
हनुमान अष्टोत्तर जप विधि

श्रेष्ठ दिन: मंगलवार (मंगलवार) और शनिवार (शनिवार) - हनुमान के दिन। शुक्रवार से नई शुरुआत न करें (लक्ष्मी का दिन)। श्रेष्ठ समय: ब्रह्म मुहूर्त (4-6 AM) या सायं संध्या (5:30-7 PM)। सामग्री: 1. लाल ऊनी आसन (हनुमान का रंग)। 2. दक्षिण मुख हनुमान मूर्ति/चित्र। 3. सरसों तेल दीया (घी नहीं - सरसों तेल विशेष रूप से हनुमान हेतु)। 4. लाल पुष्प (गेंदा, गुलाब)। 5. हनुमान मूर्ति पर अर्पण हेतु लाल सिंदूर। 6. बूँदी लड्डू, गुड़, या गुड़-चना प्रसाद। 7. बिल्व पत्र या कोई हरे पत्ते। तैयारी (5 मिनट): 8. स्नान। लाल, केसरिया, या नारंगी वस्त्र। 9. लाल ऊनी आसन पर दक्षिण मुख। 10. अपने ललाट पर लाल सिंदूर तिलक। संकल्प: 11. जल पकड़ें। बोलें: 'मैं [नाम], इस मंगलवार/शनिवार [दिनांक], हनुमान अष्टोत्तर 108 नाम [प्रयोजन] हेतु जपता हूँ'। जप (12-15 मिनट): 12. 'ॐ हुं हनुमते नमः' से शुरू (हनुमान बीज, 7 बार)। 13. फिर 'ॐ श्री राम जय राम जय जय राम' (3 बार - हनुमान का स्वामी मंत्र)। 14. 108 नाम धीमे जपें, लाल चंदन माला पर प्रति नाम एक मनका। 15. गति: 6-7 सेकंड प्रति नाम = 12 मिनट कुल। 16. जप करते समय संजीवनी पर्वत के साथ उड़ते हनुमान की कल्पना। समापन: 17. नाम 108 के बाद 'इति श्री हनुमदष्टोत्तर शतनामावली सम्पूर्णम्'। 18. हनुमान के ललाट पर सिंदूर (या चित्र के सामने)। 19. सरसों तेल दीये से आरती: 'आरती कीजे हनुमान लाला की'। 20. प्रसाद अर्पण (पहले मूर्ति चरण स्पर्श)। 21. किसी शारीरिक दर्द (यदि लागू) के स्थान को छुएं और उपचार हेतु प्रार्थना।
श्रेष्ठ पर्व व अवसर
साप्ताहिक: मंगलवार प्राथमिक, शनिवार द्वितीयक। वार्षिक प्रमुख अवसर: 1. हनुमान जयंती (चैत्र पूर्णिमा, मार्च-अप्रैल उत्तर भारत में; मार्गशीर्ष कृष्ण 14 दक्षिण भारत में) - अधिकतम दैनिक संख्या के रूप में 5 अष्टोत्तर। 2. सुंदर काण्ड पारायण दिन (हनुमान जयंती से पहले मंगलवार) - सुंदर काण्ड पाठ + अष्टोत्तर परम हनुमान साधना। 3. बजरंग बली के रक्षा दिन - शनि साढ़े साती या किसी ज्योतिषीय गोचर के दौरान, 41 सप्ताह तक शनिवार 11 अष्टोत्तर। 4. मंगलवार व्रत (अविवाहित लड़कियों हेतु मंगलवार उपवास) - विवाह-प्राप्ति शक्ति हेतु 9 मंगलवार उपवास के साथ अष्टोत्तर। 5. न्यायालय सुनवाई दिन - किसी भी प्रमुख सुनवाई से एक रात पहले अनुकूल परिणाम हेतु 11 अष्टोत्तर।
पाठकों के प्रश्न
क्या हनुमान अष्टोत्तर हनुमान चालीसा जितना शक्तिशाली है?+
दोनों समान शक्तिशाली परन्तु विभिन्न प्रयोजन। चालीसा अवधी में (तुलसीदास), अधिक भक्ति/भावनात्मक, शुरुआती हेतु आसान। अष्टोत्तर संस्कृत में, अधिक ध्यानात्मक/केंद्रित, साधकों हेतु गहरा। आदर्श: दोनों दैनिक - चालीसा (7-8 मिनट) भक्ति हेतु + अष्टोत्तर (12-15 मिनट) मांत्रिक शक्ति हेतु। पूर्ण दैनिक हनुमान अभ्यास हेतु कुल 20 मिनट।
क्या मैं रात में हनुमान अष्टोत्तर जप सकता हूँ?+
हाँ - हनुमान उन कुछ देवताओं में से जिन्हें रात में बिना प्रतिबंध आह्वान कर सकते। बुरे सपने, नींद-पक्षाघात, या भय का सामना करने वाले कई भक्त सोने से पहले अष्टोत्तर जपते। सुरक्षात्मक स्पंदन नकारात्मक सत्ताएं भगाता। सबसे मज़बूत रात्रि सुरक्षा हेतु हनुमान चालीसा के साथ। केवल 2-4 AM टालें यदि आसानी से विचलित होते - किसी भी गहन अभ्यास हेतु श्रेष्ठ विंडो नहीं।
क्या महिलाएं मासिक धर्म के दौरान हनुमान अष्टोत्तर जप सकती हैं?+
मानसिक जप अनुशंसित। हनुमान अद्वितीय रूप से समायोजनकारी - स्वयं ब्रह्मचारी योगी होने से, स्त्री चक्र से कोई विरक्ति नहीं। परंपरागत निषेध केवल भौतिक मूर्ति संपर्क व सिंदूर अर्पण पर। कई महिला भक्त बताती हनुमान की ऊर्जा इस समय 'मातृ आलिंगन' के रूप में अधिक सुरक्षात्मक महसूस होती। रिकॉर्ड पाठ सुनें और मन में दोहराएं। 4-दिन शुद्धिकरण के बाद पूर्ण अभ्यास फिर से।
यदि एक बैठक में 108 नाम पूरा न कर पाऊँ तो?+
विभाजन अनुमत परन्तु आदर्श नहीं। श्रेष्ठ: दैनिक 11 या 21 नाम जपें, सप्ताह में पूर्ण 108 तक बढ़ें। विकल्प: प्रातः 54 + सायं 54। एक बार शुरू करने के बाद पाठ के भीतर विराम न करें - शौचालय विराम, फोन, बात करना सभी ऊर्जा श्रृंखला तोड़ते। सहनशक्ति बनाएं: अधिकांश शुरुआती निरंतर अभ्यास के 30 दिनों में 108 पूर्ण कर सकते।
मुझे कितने समय में परिणाम दिखेंगे?+
दिन 11: पहला सूक्ष्म संकेत (अक्सर सपनों में)। दिन 21: प्राथमिक चिंता में स्पष्ट परिवर्तन। दिन 41: प्रमुख जीवन स्थिति गति। दिन 90: स्थापित सुधार। हनुमान तेज़ प्रतिक्रिया के लिए प्रसिद्ध - कई भक्त 7 दिनों में संकेत देखते। दिन 21 तक कुछ न हो: (1) क्या आप भाव से जप रहे या यांत्रिक? (2) मंगलवार/शनिवार नियम पालन (इन दिनों मांसाहार/शराब नहीं)? (3) इरादा शुद्ध (दूसरों को हानि माँगना नहीं)?
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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