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करवा चौथ बनाम हरतालिका तीज: दोनों व्रतों में क्या अंतर है
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करवा चौथ बनाम हरतालिका तीज: दोनों व्रतों में क्या अंतर है

7 मिनट पढ़ेंप्रकाशित अगस्त 15, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

दो व्रत जो अक्सर एक समझे जाते हैं

करवा चौथ और हरतालिका तीज उत्तर भारत की सुहागिनों के दो सबसे प्रचलित व्रत हैं, और दोनों में पति की दीर्घायु के लिए दिनभर उपवास होने के कारण अक्सर इन्हें एक जैसा मान लिया जाता है। वास्तव में दोनों अलग हैं। हरतालिका तीज वर्ष चक्र में पहले आती है, प्रायः अगस्त-सितंबर में, और इसे अधिक कठोर व्रतों में गिना जाता है। करवा चौथ लगभग दो महीने बाद, अक्टूबर-नवंबर में आती है और पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान में इसकी लोकप्रियता तथा फिल्मों में इसके चित्रण के कारण अधिक प्रचलित मानी जाती है।

दोनों व्रत श्रृंगार, प्रार्थना और सहनशीलता के माध्यम से देवी पार्वती की भक्ति के आदर्श पर आधारित हैं, परंतु तिथि से लेकर व्रत खोलने के क्षण तक दोनों में स्पष्ट अंतर हैं, जिन्हें जानना हर व्रती के लिए उपयोगी है।

पंचांग में दोनों व्रतों की तिथि

दोनों व्रतों में सबसे स्पष्ट अंतर तिथि का है। हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को आती है, गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले, यानी अगस्त-सितंबर के आसपास। करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को आती है, दिवाली से लगभग नौ दिन पहले, यानी अक्टूबर-नवंबर में।

  • हरतालिका तीज: भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, तृतीया
  • करवा चौथ: कार्तिक, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी
  • दोनों के बीच सामान्यतः सात से आठ सप्ताह का अंतर होता है
  • दोनों ही एक-दिवसीय व्रत हैं, बहु-दिवसीय पर्व नहीं

चूंकि दोनों तिथियां हर वर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर पर बदलती हैं, सटीक तिथि और चंद्रोदय समय स्थानीय पंचांग से अवश्य जांच लें।

उपवास के नियम: चंद्रोदय बनाम पूरी रात्रि

यहीं दोनों व्रतों में सबसे बड़ा अंतर है। करवा चौथ में सूर्योदय से पहले सरगी खाई जाती है, फिर दिनभर निर्जला व्रत रखा जाता है और शाम को चंद्रोदय पर छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत खोला जाता है।

हरतालिका तीज को अधिक कठोर माना जाता है। कई व्रती पिछली शाम से ही निर्जला व्रत आरंभ कर देती हैं और पूरी रात्रि जागरण करते हुए अगली सुबह पूजा के बाद ही व्रत खोलती हैं। यह रात्रि जागरण तीज की विशेष पहचान है, जो करवा चौथ में नहीं होता।

  • करवा चौथ: सरगी, दिनभर निर्जला, शाम को चंद्रोदय पर व्रत समाप्त
  • हरतालिका तीज: लगभग पूरे दिन-रात निर्जला, अगली सुबह पूजा बाद व्रत समाप्त

मधुमेह, निम्न रक्तचाप या गर्भावस्था में महिलाओं को व्रत में लचीलापन रखने की सलाह दी जाती है।

दोनों व्रतों की अलग-अलग पौराणिक कथाएं

दोनों व्रतों की अलग-अलग पौराणिक कथाएं

दोनों व्रतों की पौराणिक कथाएं भी अलग हैं। हरतालिका तीज का नाम हरत (हरण) और अलिका (सखी) से बना है - पार्वती जी को उनकी सखियां वन में ले गईं ताकि वे पिता हिमालय की इच्छा के विरुद्ध शिव जी को पति रूप में पाने हेतु कठोर तपस्या कर सकें। यह तपस्या इतनी कठिन थी कि इसी कारण आज भी यह व्रत शारीरिक रूप से सबसे कठोर व्रतों में गिना जाता है।

करवा चौथ वीरावती की कथा से जुड़ी है, जिसमें उनके भाइयों ने उन्हें झूठा चांद दिखाकर व्रत तुड़वा दिया था, जिसके दुखद परिणाम बाद में उनकी अटूट भक्ति से ही पलटे। यह सावित्री-सत्यवान और द्रौपदी की कथाओं से भी जुड़ी है। दोनों ही कथाओं का केंद्र पत्नी की भक्ति से भाग्य के बदलने का विचार है, और करवा व मिट्टी की प्रतिमाएं इसी प्रतीकात्मक महत्व से जुड़ी हैं।

पूजा विधि में अंतर

दोनों व्रतों की पूजा विधि भी भिन्न है। करवा चौथ में महिलाएं लाल वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, शाम को गौरी-गणेश पूजा करती हैं, कथा सुनती हैं और बाया (उपहार) का आदान-प्रदान करती हैं; करवा और छलनी से चंद्र दर्शन की रस्म से व्रत पूर्ण होता है। हरतालिका तीज में स्वयं मिट्टी से बनाई गई शिव-पार्वती-गणेश प्रतिमाओं की पूजा होती है, हरे वस्त्र व पूर्ण सोलह श्रृंगार के साथ महिलाएं मंदिर या सामूहिक स्थल पर रातभर जागरण करते हुए भजन गाती हैं, और अगली सुबह विसर्जन होता है।

  • करवा चौथ: लाल वस्त्र, गौरी-गणेश पूजा, करवा, छलनी व चंद्र दर्शन
  • हरतालिका तीज: स्वनिर्मित प्रतिमाएं, हरे वस्त्र, रात्रि जागरण, प्रातः विसर्जन
  • करवा चौथ उसी शाम संपन्न होता है; हरतालिका तीज शाम से अगली सुबह तक फैला रहता है

🪔 वंदना ऐप पर दोनों व्रतों की कथा, पूजा विधि और चंद्रोदय समय हिंदी व अंग्रेजी में उपलब्ध है, ताकि आप बिना किसी पुस्तिका के हर चरण आसानी से पूरा कर सकें।

कौन-सा व्रत अधिक कठिन है, और कहां अधिक प्रचलित है

जिन महिलाओं ने दोनों व्रत किए हैं, वे प्रायः हरतालिका तीज को अधिक कठिन मानती हैं क्योंकि इसमें निर्जला अवधि लंबी होती है और रात्रि जागरण अनिवार्य है, जबकि करवा चौथ उसी शाम चंद्रोदय पर समाप्त हो जाता है।

करवा चौथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, हिमाचल, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिक प्रचलित है, जबकि हरतालिका तीज राजस्थान, बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और नेपाल में गहराई से रचा-बसा है, जहां इसे हरियाली तीज और कजरी तीज के साथ "तीज सीजन" कहा जाता है।

दोनों व्रतों में स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सावधानी और संकल्प के साथ आरंभ करना सर्वोपरि है।

पाठकों के प्रश्न

करवा चौथ या हरतालिका तीज में से कौन-सा व्रत अधिक कठिन है?+

हरतालिका तीज को सामान्यतः अधिक कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें निर्जला व्रत लगभग पूरे दिन-रात चलता है और रात्रि जागरण अनिवार्य है, जबकि करवा चौथ उसी शाम चंद्रोदय पर समाप्त हो जाता है।

क्या अविवाहित महिलाएं हरतालिका तीज या करवा चौथ रख सकती हैं?+

अविवाहित महिलाएं सामान्यतः हरतालिका तीज रखती हैं, शिव जैसे पति की कामना के साथ। करवा चौथ परंपरागत रूप से विवाहित महिलाओं का व्रत है, हालांकि कुछ स्थानों पर मंगेतर भी इसे रखने लगी हैं।

क्या दोनों व्रतों में पानी की भी पूरी तरह मनाही होती है?+

परंपरागत रूप से दोनों व्रत निर्जला होते हैं। स्वास्थ्य कारणों से कई परिवार, विशेषकर हरतालिका तीज में, लचीलापन अपनाते हैं। किसी स्वास्थ्य समस्या में परिवार के बड़ों या डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

करवा चौथ और हरतालिका तीज में सामान्यतः कितने सप्ताह का अंतर होता है?+

दोनों व्रतों में सामान्यतः सात से आठ सप्ताह का अंतर होता है - हरतालिका तीज भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) में और करवा चौथ बाद में कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) में, दिवाली से ठीक पहले आती है।

क्या हरतालिका तीज और हरियाली तीज एक ही पर्व हैं?+

नहीं, दोनों अलग हैं। हरियाली तीज पहले श्रावण शुक्ल तृतीया को आती है और अपेक्षाकृत सरल उत्सव है। हरतालिका तीज लगभग एक माह बाद भाद्रपद में आती है और अधिक कठोर व्रत है।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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