मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत क्या है?
मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत देवी महालक्ष्मी के लिए गुरुवार का व्रत है, जो पवित्र मार्गशीर्ष (अग्रहायण) माह के प्रत्येक गुरुवार को रखा जाता है। यह विशेषकर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में प्रचलित है, मुख्यतः स्त्रियाँ इसे धन, सामंजस्य और परिवार के कल्याण के लिए रखती हैं।
मार्गशीर्ष माह भगवान कृष्ण को प्रिय है, जिन्होंने भगवद गीता में कहा, 'महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ।' इस माह के गुरुवारों को लक्ष्मी की पूजा घर में उनकी स्थायी कृपा लाती है, ऐसा माना जाता है।
मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत 2026 - तिथियाँ
व्रत मार्गशीर्ष माह के प्रत्येक गुरुवार को रखा जाता है, जो 2026 में लगभग नवंबर के अंत से दिसंबर के अंत तक चलता है। माह में सामान्यतः चार या पाँच गुरुवार होते हैं।
पहला गुरुवार स्थापना (कलश स्थापना) का होता है और अंतिम उद्यापन (समापन पूजा) का। चंद्र माह का आरंभ क्षेत्र अनुसार बदलने के कारण, सटीक मार्गशीर्ष गुरुवार अपने स्थानीय पंचांग में देखें।
पूजा विधि
1. सुबह: जल्दी स्नान करें, पूजा स्थान साफ करें और रंगोली या कमल बनाएँ। 2. कलश: जल से भरा कलश रखें, ऊपर आम के पत्ते और नारियल, तथा महालक्ष्मी का चित्र या सिक्के रखें। 3. पूजा: हल्दी-कुमकुम, अक्षत, लाल या पीले पुष्प, फल और घी का दीप अर्पित करें। गुरुवार को पीली वस्तुएँ गुरु (बृहस्पति) और लक्ष्मी दोनों को प्रिय हैं। 4. भोग: खीर या गुड़-चने का मीठा अर्पित करें; गुरुवार को चना दाल और केला भी अर्पित किए जाते हैं। 5. मंत्र और कथा: 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' जपें और व्रत कथा पढ़ें। 6. फलाहार व्रत रखें, संध्या पूजा के बाद एक बार भोजन करें, और अंतिम गुरुवार को सुहागिनों या ब्राह्मणों को भोजन कराकर उद्यापन करें।
कथा और लाभ

व्रत कथा एक निर्धन पर भक्त स्त्री की है, जिसकी सच्ची गुरुवार महालक्ष्मी पूजा ने उसके घर को समृद्धि से भर दिया, जबकि एक धनी पड़ोसन जिसने देवी का तिरस्कार किया और धन बर्बाद किया, सब कुछ खो बैठी - जब तक उसने भी विनम्रता से व्रत न किया और क्षमा पाई। कथा दर्शाती है कि लक्ष्मी वहीं रहती हैं जहाँ भक्ति, स्वच्छता और विनम्रता हो, और वहाँ से चली जाती हैं जहाँ अहंकार और बर्बादी हो।
लाभ:
- स्थिर धन और ऋण से मुक्ति
- परिवार में सामंजस्य और स्वास्थ्य
- गुरुवार को लक्ष्मी के साथ गुरु (बृहस्पति) का आशीर्वाद
- अनुशासित, कृतज्ञ हृदय
सभी लक्ष्मी व्रतों की भाँति, घर स्वच्छ रखें, मधुर बोलें, और माह भर संध्या को दीप जलाएँ।
पाठकों के प्रश्न
2026 में मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत कब है?+
यह मार्गशीर्ष माह के प्रत्येक गुरुवार को रखा जाता है, जो 2026 में लगभग नवंबर के अंत से दिसंबर के अंत तक चलता है। सटीक गुरुवार और मार्गशीर्ष का आरंभ अपने स्थानीय पंचांग में देखें।
इस व्रत में किस देवी की पूजा होती है?+
मार्गशीर्ष के गुरुवारों को धन और समृद्धि की दात्री देवी महालक्ष्मी की पूजा होती है। कलश और चित्र या सिक्के उनकी उपस्थिति का प्रतीक होते हैं।
मार्गशीर्ष गुरुवार को क्या अर्पित करें?+
पीले या लाल पुष्प, हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फल, घी का दीप और खीर या गुड़-चने का मीठा अर्पित करें। पीली वस्तुएँ और चना गुरुवार के लिए विशेष उपयुक्त हैं, जो लक्ष्मी और गुरु बृहस्पति दोनों का सम्मान करते हैं।
व्रत का समापन कैसे होता है?+
मार्गशीर्ष के अंतिम गुरुवार को उद्यापन करें - पूर्ण पूजा के बाद सुहागिनों या ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और दान दें। फिर कलश का जल तुलसी या किसी स्वच्छ स्थान पर अर्पित करें।
About the author
Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies
Anjali is the managing editor for Vandnaa and oversees the festival and vrat coverage. She holds an M.A. in Religious Studies and reviews every published article for accuracy, accessibility, and tradition-fidelity.
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