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नवग्रह शांति पूजा विधि: नौ ग्रहों की भक्तिमय उपासना
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नवग्रह शांति पूजा विधि: नौ ग्रहों की भक्तिमय उपासना

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 24, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

नवग्रह शांति पूजा क्या है?

नवग्रह शांति पूजा नौ ग्रहों की भक्तिमय उपासना है जो उनकी कृपा और आशीर्वाद का आह्वान करती है। हिंदू परंपरा में ग्रहों को दिव्य सत्ताओं के रूप में सम्मानित किया जाता है, और यह पूजा प्रार्थना तथा कृतज्ञता का कार्य है - शांति, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना।

यह लेख पूर्णतः उपासना और भक्ति के बारे में है - मंत्र, दीप, अर्पण और दान - भविष्य की भविष्यवाणी के बारे में नहीं। बहुत से मंदिरों में नवग्रह मंदिर होता है जहाँ नौ साथ स्थापित होते हैं, और भक्त दीप अर्पित कर उनकी परिक्रमा करते हैं। घर पर सरल नवग्रह पूजा श्रद्धा और विश्वास से की जा सकती है, ईश्वर से अपने मार्ग को स्थिरता और कृपा से आशीषित करने की प्रार्थना करते हुए।

नौ ग्रह और उनके मंत्र

प्रत्येक ग्रह को एक देव के रूप में सरल बीज या नमस्कार मंत्र सहित सम्मानित किया जाता है:

  • सूर्य: ॐ सूर्याय नमः; सूर्योदय पर जल (अर्घ्य) और लाल पुष्प अर्पित करें।
  • चंद्र: ॐ चंद्राय नमः; श्वेत पुष्प और दूध अर्पित करें।
  • मंगल: ॐ भौमाय नमः (या ॐ मंगलाय नमः); लाल पुष्प अर्पित करें, हनुमान भक्ति से जुड़ा।
  • बुध: ॐ बुधाय नमः; हरी वस्तुएँ और तुलसी अर्पित करें।
  • बृहस्पति / गुरु: ॐ बृहस्पतये नमः (या ॐ गुरवे नमः); पीले पुष्प और चना दाल अर्पित करें।
  • शुक्र: ॐ शुक्राय नमः; श्वेत मिष्ठान्न और पुष्प अर्पित करें।
  • शनि: ॐ शनैश्चराय नमः; सरसों का तेल, काले तिल और दीप अर्पित करें।
  • राहु: ॐ राहवे नमः; भक्ति और दान सहित अर्पित करें।
  • केतु: ॐ केतवे नमः; पूजा में राहु के साथ अर्पित किया जाता है।

सरल नवग्रह शांति पूजा विधि

1. स्नान और संकल्प: जल्दी स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें, पूर्व की ओर मुख कर बैठें और सबके शांति तथा कल्याण हेतु श्रद्धा से पूजा का संकल्प लें। 2. गणेश का आह्वान: ॐ गं गणपतये नमः से आरंभ करें ताकि पूजा सुगमता से चले। 3. ग्रहों की स्थापना: स्वच्छ वस्त्र या थाली पर नवग्रह चित्र या यंत्र, अथवा नौ ग्रहों हेतु चावल की नौ छोटी ढेरियाँ रखें। 4. दीप और धूप जलाएँ: सभी नौ को घी का दीप और धूप अर्पित करें। 5. प्रत्येक ग्रह को अर्पण: एक-एक ग्रह को जल, पुष्प, अक्षत और चंदन अर्पित करें, और प्रत्येक ग्रह का मंत्र जपें (श्रेष्ठ है माला पर कुछ माला)। 6. नवग्रह स्तोत्र: समय अनुसार नवग्रह स्तोत्र या आदित्य हृदय / सूर्य स्तुति पढ़ें। 7. दान: दान से समापन करें - जरूरतमंद को अनाज, वस्त्र, तेल या भोजन दान करें, जो ग्रह शांति का केंद्रीय अंग है। 8. आरती और प्रार्थना: आरती अर्पित करें और शांति, उत्तम स्वास्थ्य तथा मन की स्थिरता की प्रार्थना करें, फिर प्रसाद वितरित करें।

ग्रह शांति का भक्तिमय भाव

ग्रह शांति का भक्तिमय भाव

नवग्रह उपासना का हृदय भक्ति, कृतज्ञता और सदाचार है, भय या भविष्यवाणी नहीं। ग्रहों को दिव्य सत्ताओं के रूप में सम्मानित किया जाता है, और पूजा ब्रह्मांडीय व्यवस्था को नमन कर कृपा माँगने का मार्ग है।

पारंपरिक उपाय - दीप जलाना, मंत्र जपना, दान देना, जरूरतमंद की सेवा और ईमानदारी से जीना - सभी हृदय को शुद्ध करने वाले कार्य हैं। एक सरल और प्रिय साधना है नवग्रह स्तोत्र पढ़ना या शांति तथा कल्याण हेतु महामृत्युंजय मंत्र जपना। सच्चा 'उपाय' धर्म का जीवन है: दयालु, ईमानदार और भक्तिमय जीवन आशीर्वाद खींचता है, ऋतु जो भी हो। ग्रहों की प्रेम से उपासना करें, भलाई करें, और शेष ईश्वर पर छोड़ दें।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

नवग्रह पूजा में नौ ग्रह कौन से हैं?+

नौ ग्रह हैं सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। पूजा में उन्हें मंत्र और अर्पण सहित दिव्य सत्ताओं के रूप में सम्मानित किया जाता है।

क्या नवग्रह पूजा भविष्य बताने के बारे में है?+

नहीं। नवग्रह शांति पूजा पूर्णतः भक्तिमय है - यह ग्रहों को दिव्य सत्ताओं के रूप में अर्पित उपासना, प्रार्थना, मंत्र और दान है, जो शांति तथा कल्याण की कामना करती है। यह कुंडली भविष्यवाणी के बारे में नहीं है।

घर पर नवग्रह उपासना का सबसे सरल तरीका क्या है?+

घी का दीप जलाएँ, नवग्रह चित्र या चावल की नौ छोटी ढेरियाँ रखें, जल और पुष्प अर्पित करें, प्रत्येक ग्रह का मंत्र जपें, नवग्रह स्तोत्र पढ़ें, और जरूरतमंद को दान दें। श्रद्धा और भक्ति का सर्वाधिक महत्व है।

समग्र ग्रह शांति के लिए कौन सा मंत्र अच्छा है?+

नवग्रह स्तोत्र का पाठ सभी नौ का साथ में सम्मान करता है। शांति और कल्याण हेतु महामृत्युंजय मंत्र एक प्रिय और शक्तिशाली विकल्प है। विश्वास से जपें और दान से समापन करें।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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