माँ पार्वती कौन हैं
माँ पार्वती प्रेम, भक्ति, विवाह और शक्ति की कोमल किंतु प्रबल देवी हैं। पर्वतराज हिमवान की पुत्री, उन्होंने गहन तपस्या और अटूट भक्ति से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। अपने गौर, शांत रूप में वे गौरी के रूप में पूजी जाती हैं और दुर्गा व काली जैसे उग्र रूपों की स्रोत भी हैं। भक्ति की आदर्श और प्रेममयी अर्धांगिनी के रूप में, वे भक्तों को सामंजस्य, शक्ति और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती हैं।
महत्व और कब उपासना करें
माँ पार्वती, गौरी रूप में, सबसे बढ़कर विवाह और सुखी वैवाहिक जीवन हेतु पूजी जाती हैं। अविवाहित कन्याएँ अच्छे पति के लिए और विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु व कल्याण और घर में सामंजस्य हेतु उनसे प्रार्थना करती हैं। सोमवार उनका व शिव का दिन है, जबकि हरतालिका तीज, गणगौर और श्रावण मास उनके सबसे शक्तिशाली समय हैं। इन दिनों में पार्वती चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
प्रारंभिक दोहा और मुख्य छंद
दोहा: जय गिरिजा गौरी मैया, तुम हो जग की मात। शरण पड़ी जो आपकी, सुधारो बिगड़ी बात।
चौपाई (उदाहरण): जय जय पार्वती शिव प्यारी, तुम हो शक्ति जग से न्यारी। हिमगिरि सुता भवानी माता, चरणन शीश नवावें त्राता।
ये छंद पार्वती की जगज्जननी और शिव की प्रिया रूप में स्तुति करते हैं, और प्रेम, विवाह व शांत घर हेतु उनकी कृपा का आह्वान करते हैं।
पार्वती मंत्र और जप विधि

मुख्य मंत्र:
ॐ ह्रीं उमायै नमः
विधि: 1. सोमवार को या गौरी व्रत में स्नान कर स्वच्छ लाल, हरे या पीले वस्त्र पहनें। 2. पार्वती की शिव सहित उपासना करें; घी का दीपक जलाएँ और लाल या श्वेत पुष्प तथा सिंदूर अर्पित करें। 3. खीर, फल या श्वेत मिठाई का भोग लगाएँ। 4. ॐ ह्रीं उमायै नमः का रुद्राक्ष या चंदन की माला पर 108 बार जप करें। 5. पार्वती चालीसा पढ़ें, फिर गौरी आरती करें। 6. अच्छे जीवनसाथी, वैवाहिक सामंजस्य और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें। अविवाहित कन्याएँ अच्छे पति हेतु अक्सर तीज में यह अभ्यास रखती हैं।
पार्वती चालीसा के लाभ
पार्वती चालीसा का पाठ विवाह में विलंब व बाधाएँ दूर करता, भक्तों को प्रेममय व अनुकूल जीवनसाथी का आशीर्वाद देता, पति-पत्नी के बीच समझ व सामंजस्य गहरा करता और परिवार को कलह से रक्षा करता माना जाता है। गौरी भक्ति व आंतरिक शक्ति का रूप होने के कारण, उनकी कृपा कठिन समय में धैर्य, आत्मविश्वास और भावनात्मक स्थिरता भी लाती है।
गौरी उपासना के सुझाव
पार्वती की शिव के साथ उपासना करें, क्योंकि दिव्य युगल एक रूप में वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देते हैं। सिंदूर, चूड़ियाँ और लाल चुनरी भक्ति से अर्पित करें, जो सौभाग्य से जुड़ी वस्तुएँ हैं। सोमवार और श्रावण में अभ्यास नियमित रखें, और सबसे महत्वपूर्ण, उनके धैर्य, भक्ति व सम्मान के गुणों को दैनिक वैवाहिक जीवन में अपनाएँ, जो उन्हें सर्वाधिक प्रिय है।
पाठकों के प्रश्न
माँ पार्वती या गौरी कौन हैं?+
माँ पार्वती, जिन्हें गौरी भी कहते हैं, प्रेम, भक्ति, विवाह और शक्ति की देवी और भगवान शिव की पत्नी हैं। वे पर्वतराज हिमवान की पुत्री और दुर्गा जैसे रूपों की स्रोत हैं।
पार्वती मंत्र क्या है?+
मुख्य मंत्र 'ॐ ह्रीं उमायै नमः' है, जिसे रुद्राक्ष या चंदन की माला पर 108 बार, आदर्श रूप से सोमवार या गौरी व्रत में जपा जाता है।
क्या पार्वती चालीसा विवाह में सहायक है?+
हाँ। अविवाहित कन्याएँ अच्छे पति हेतु इसका पाठ करती हैं, जबकि विवाहित स्त्रियाँ सामंजस्य व पति के कल्याण की प्रार्थना करती हैं। यह विवाह में विलंब व बाधाएँ दूर करता माना जाता है।
पार्वती की उपासना के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?+
सोमवार पार्वती और शिव का दिन है। हरतालिका तीज, गणगौर और श्रावण मास उपासना व चालीसा पाठ के उनके सबसे शक्तिशाली समय हैं।
क्या पार्वती की उपासना शिव के साथ करनी चाहिए?+
हाँ, आदर्श रूप से। पार्वती और शिव दिव्य युगल हैं, और उनकी एक साथ उपासना सुखी व सामंजस्यपूर्ण वैवाहिक जीवन हेतु विशेष शुभ मानी जाती है।
कौन सी वस्तुएँ माँ गौरी को प्रसन्न करती हैं?+
लाल या श्वेत पुष्प, सिंदूर, चूड़ियाँ, लाल चुनरी, और खीर व श्वेत मिठाई जैसा भोग गौरी को प्रिय है। सौभाग्य से जुड़ी वस्तुएँ वैवाहिक सुख हेतु भक्ति से अर्पित की जाती हैं।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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