प्रदोष व्रत क्या है
प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि (चंद्र चक्र का 13वाँ दिन) पर शिव-व्रत - मास में दो बार (शुक्ल पक्ष व कृष्ण पक्ष)।
ब्रह्मांडीय कथा - समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष से ब्रह्मांड को बचाने हेतु शिव ने एक विशिष्ट समय - प्रदोष काल (सूर्यास्त से ठीक पहले) - पिया।
यह 3-घंटा खिड़की प्रदोष काल। शिव-पार्वती कैलाश पर्वत पर इस समय नृत्य करते।
द्विमासिक क्यों - चंद्र मास में दो पक्ष। प्रत्येक की त्रयोदशी = वर्ष में 24 प्रदोष।
प्रदोष काल - सूर्यास्त से 1.5 घंटे पहले - 1.5 घंटे बाद।
दिन-वार प्रदोष लाभ
रविवार (रवि प्रदोष) - स्वास्थ्य, दीर्घायु, त्वचा रोग निवारण।
सोमवार (सोम प्रदोष) - सर्वाधिक शक्तिशाली - सभी मनोकामना पूर्ति। महामृत्युंजय 108 बार।
मंगलवार (भौम प्रदोष) - ऋण, मुकदमे, मांगलिक दोष निवारण।
बुधवार (सौम्य प्रदोष) - ज्ञान, बुद्धि, व्यवसाय।
गुरुवार (गुरु प्रदोष) - ज्ञान, धर्म, विवाह विलंब।
शुक्रवार (भृगु प्रदोष) - धन, सौंदर्य, रोमांस।
शनिवार (शनि प्रदोष) - समस्याओं हेतु सर्वाधिक शक्तिशाली - शनि दोष, साढ़े साती, क्रोनिक समस्याएँ।
11-प्रदोष व्रत - बड़े संकल्प हेतु लगातार 11 प्रदोष।
प्रदोष व्रत विधि
व्रत संरचना -
- आरंभ: सूर्योदय
- मुख्य पूजा: प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास 3 घंटे)
- व्रत तोड़ें: प्रदोष काल पूजा के बाद
हल्का व्रत - दिन में जल/फल। प्रदोष काल के बाद भोजन। सख्त व्रत - केवल फल/दूध।
आवश्यक - शिवलिंग, श्वेत कपड़ा, बिल्व पत्र (11), सरसों/घी का दीया, भस्म, चंदन, श्वेत फूल, कपूर, बेल लड्डू।
चरण -
- प्रातः: स्नान, संकल्प, भस्म तिलक
- दिन: हल्का व्रत, मानसिक मंत्र
- प्रदोष काल पूजा (60-90 मिनट):
1. स्नान, श्वेत वस्त्र 2. पूर्व/उत्तर मुख 3. दीया 4. भस्म + चंदन 5. 11 बिल्व 6. मिनी-रुद्राभिषेक 7. प्रदोष स्तोत्र / रुद्राष्टकम् 8. महामृत्युंजय 108 बार 9. आरती 10. भोग 11. प्रसाद + व्रत तोड़ें
महामंत्र प्रोटोकॉल - प्रदोष काल में महामृत्युंजय सर्वाधिक शक्तिशाली।
लाभ व निष्कर्ष

लाभ - 1. सभी शिव-संबंधी आशीर्वाद 2. विवाह व परिवार सामंजस्य 3. प्रमुख दोष निवारण 4. धन (शुक्र प्रदोष) 5. बच्चों का कल्याण 6. दुर्घटनाओं से रक्षा 7. क्रोनिक बीमारी निवारण 8. न्यायालय विजय 9. आध्यात्मिक प्रगति 10. अंतिम मुक्ति
तीन स्तर -
- स्तर 1 - मासिक सोम प्रदोष (12/वर्ष)
- स्तर 2 - द्विमासिक सभी (24/वर्ष)
- स्तर 3 - 11/41-प्रदोष व्रत
अंतिम चिंतन - प्रदोष व्रत सबसे कम उपयोग की जाने वाली शिव साधना। वार्षिक 24 अवसर।
हर हर महादेव।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
प्रदोष कितनी बार?+
मास में दो बार - शुक्ल व कृष्ण पक्ष में।
क्या बिना सख्त व्रत?+
हाँ - हल्का व्रत स्वीकार्य।
प्रदोष काल क्या?+
सूर्यास्त के आसपास 3 घंटे की खिड़की।
क्या गर्भवती स्त्रियाँ?+
हल्का व्रत हाँ। शुभ माना जाता।
सर्वोत्तम प्रदोष दिन?+
सोमवार सर्वोत्तम सामान्य। शनिवार समस्याओं हेतु।
यदि व्रत जल्दी तोड़ूँ?+
व्रत अधूरा। प्रदोष काल पूजा के बाद तोड़ें।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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