देवी येल्लम्मा कौन हैं
बेलगावी जिले के सौंदत्ती में येल्लम्मा गुट्टा पहाड़ी पर कर्नाटक के सर्वाधिक दर्शित शक्ति तीर्थों में से एक स्थित है। यहां येल्लम्मा के रूप में पूजी जाने वाली प्रमुख देवी को भक्त साक्षात रेणुका देवी मानते हैं, जो ऋषि जमदग्नि की भक्त पत्नी और भगवान परशुराम की माता हैं।
कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों से तीर्थयात्री वर्षभर इस पहाड़ी पर चढ़ते हैं, और मंदिर से दिखने वाला विस्तृत मैदानी दृश्य इसकी शांत पवित्रता को और बढ़ा देता है।
इतिहास और रेणुका देवी की कथा
पौराणिक परंपरा के अनुसार रेणुका अपनी असाधारण पवित्रता और अपने पति ऋषि जमदग्नि के प्रति भक्ति के लिए जानी जाती थीं। एक दिन उनकी साधना में हुई एक क्षणिक चूक ऋषि को दिख गई, और क्रोधित होकर उन्होंने अपने पुत्रों को उनका वध करने का आदेश दिया। केवल सबसे छोटे पुत्र परशुराम ने बिना प्रश्न किए आज्ञा का पालन किया।
पुत्र की इस पूर्ण आज्ञाकारिता से प्रसन्न होकर जमदग्नि ने परशुराम को वरदान दिया, और उन्होंने अपनी माता को पुनर्जीवित करने का वरदान मांगा। इस प्रकार पुनर्जीवित रेणुका को येल्लम्मा के रूप में स्मरण और पूजा जाता है, उनकी कथा को भक्त भक्ति, आज्ञाकारिता और दैवीय कृपा की गहरी शिक्षा मानते हैं।
महत्व और भक्त क्या मांगते हैं
- भक्त परिवार में सद्भाव, सुरक्षा और लंबे समय से रखे गए संकल्पों की पूर्ति के लिए येल्लम्मा से प्रार्थना करते हैं
- कई तीर्थयात्री पहाड़ी की चढ़ाई को तपस्या और भक्ति का कार्य मानकर करते हैं
- देवी को मां के असीम धैर्य और क्षमा के साक्षात स्वरूप के रूप में देखा जाता है
- मंदिर की वार्षिक जात्रा कई राज्यों से तीर्थयात्रियों को आकर्षित करती है, जो उनकी व्यापक भक्ति को दर्शाती है
दर्शन गाइड: समय, जात्रा और कैसे पहुंचें

मंदिर में प्रातः और सायं दर्शन का सामान्य दक्षिण भारतीय क्रम है।
- उपयुक्त समय: भव्य पूर्णिमा जात्रा का समय, जब पहाड़ी पर भक्तों की सबसे बड़ी भीड़ जुटती है, साथ ही नवरात्रि के दौरान भी
- कैसे पहुंचें: सौंदत्ती बेलगावी के निकट स्थित है; निकटतम रेलवे स्टेशन बेलगावी और गदग हैं, और निकटतम हवाई अड्डा बेलगावी एयरपोर्ट है, नीचे के नगर से मंदिर तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है
जपने योग्य मंत्र और सीख
भक्त सरल प्रार्थना ॐ रेणुकायै नमः का जाप करते हैं, जिसका अर्थ है 'माता रेणुका को नमन', उनकी सुरक्षा और कृपा की कामना करते हुए।
रेणुका और परशुराम की कथा भक्तों को यह शिक्षा देती है कि सच्ची भक्ति कभी-कभी असहनीय प्रतीत होने वाली परिस्थिति में भी गहरी श्रद्धा मांगती है, और दैवीय कृपा खोए हुए को भी लौटा सकती है। यहां की पूजा श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, कोई लेन-देन नहीं।
त्वरित उत्तर
देवी येल्लम्मा कौन हैं?+
येल्लम्मा को रेणुका देवी के रूप में पूजा जाता है, जो ऋषि जमदग्नि की भक्त पत्नी और भगवान परशुराम की माता हैं, और सौंदत्ती की येल्लम्मा गुट्टा पहाड़ी पर पूजनीय हैं।
रेणुका देवी की कथा क्या है?+
परंपरा के अनुसार रेणुका को एक क्षणिक चूक के बाद उनके पति के आदेश पर वध कर दिया गया था, और बाद में उनके पुत्र परशुराम की आज्ञाकारिता के बदले मिले वरदान से उन्हें पुनर्जीवित किया गया।
सौंदत्ती के येल्लम्मा मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?+
भव्य पूर्णिमा जात्रा के समय सबसे बड़ी भक्त भीड़ जुटती है, और नवरात्रि को भी यहां आने के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
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