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शान्ताकारं भुजगशयनं: विष्णु ध्यान श्लोक का अर्थ
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शान्ताकारं भुजगशयनं: विष्णु ध्यान श्लोक का अर्थ

7 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 23, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

शान्ताकारं श्लोक क्या है?

शान्ताकारं भुजगशयनं भगवान विष्णु का सर्वाधिक प्रसिद्ध ध्यान श्लोक (ध्यान का श्लोक) है। ध्यान श्लोक उपासना के आरंभ में पढ़ा जाता है ताकि देवता का स्वरूप मन में सजीव हो उठे और प्रार्थना से पहले हृदय स्थिर हो जाए।

मात्र एक श्लोक में यह भगवान विष्णु (नारायण) का सम्पूर्ण चित्र खींचता है - शांत, महाशेष नाग पर शयन करते, जिनकी नाभि से कमल उठता है, देवों के स्वामी, ब्रह्मांड के आधार। यह विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा से पहले पढ़ा जाता है, और असंख्य घरों में दैनिक उपासना का प्रिय अंग है। इसका शांत भाव इसे दिन आरंभ करने के सबसे सुखद श्लोकों में से बनाता है।

लिप्यंतरण और अर्थ सहित श्लोक

श्लोक:

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्, लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।

पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ:

  • शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं - शांत स्वरूप वाले, शेषनाग पर शयन करते, जिनकी नाभि से कमल निकलता है, देवों के स्वामी;
  • विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् - ब्रह्मांड के आधार, आकाश के समान सर्वव्यापी, मेघ सी श्याम वर्ण के, मंगलमय सुंदर अंगों वाले;
  • लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं - लक्ष्मी के प्रिय, कमलनयन, योगियों द्वारा ध्यान से प्राप्य;
  • वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् - मैं भगवान विष्णु को नमन करता हूँ, जो संसार के भय को हरते हैं, समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी हैं।

इस चित्रण का महत्व

श्लोक का प्रत्येक वाक्यांश गहरा अर्थ रखता है:

  • शान्ताकारं (शांत स्वरूप): विष्णु शांति की मूर्ति हैं, स्मरण कराते हैं कि सब वस्तुओं का दिव्य आधार संसार की उथल-पुथल के बीच भी शांत है।
  • भुजगशयनं (शेष पर शयन): वे क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करते हैं, जिससे दूसरे डरते हैं उसी पर भी सहज, समय और सृष्टि पर अपना प्रभुत्व दर्शाते हुए।
  • पद्मनाभं (कमलनाभ): उनकी नाभि से वह कमल उठता है जिस पर ब्रह्मा सृष्टि हेतु विराजते हैं - ब्रह्मांड उनसे प्रकट होता है।
  • मेघवर्णं (मेघ वर्ण): जलधारी मेघ सा उनका श्याम वर्ण अनंतता, गहराई और सबका पोषण करने वाली कृपा का प्रतीक है।
  • भवभयहरं (संसार भय हर्ता): उनका ध्यान करना जन्म, मृत्यु और बंधन के भय से मुक्त होना है।

इसे पढ़ना स्वयं एक ध्यान है, जो मन को उसी शांति में स्थिर करता है जिसका यह वर्णन करता है।

लाभ और जप विधि

लाभ और जप विधि

लाभ:

  • किसी भी पूजा, प्रार्थना या ध्यान से पहले मन को स्थिर और शांत करता है।
  • घर में भगवान विष्णु की शांत, रक्षक उपस्थिति का आह्वान करता है।
  • भय, चिंता और सांसारिक जीवन की व्यथा (भवभय) को दूर करने वाला माना जाता है।
  • सरल, संक्षिप्त श्लोक जिसे बच्चे भी सीख सकते हैं, सम्पूर्ण परिवार को भक्ति में जोड़ता है।

जप विधि: 1. इसे विष्णु पूजा के आरंभ में, सत्यनारायण कथा में, या अपनी दैनिक प्रार्थना की शुरुआत में पढ़ें। 2. शांति से बैठें, श्लोक के वर्णन अनुसार भगवान विष्णु की कल्पना करें - शांत, श्यामवर्ण, सुखपूर्वक शयन करते - और उस छवि से मन भर दें। 3. इसे 1 या 3 बार धीरे पढ़ें; चाहें तो ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या विष्णु सहस्रनाम के साथ जोड़ें। 4. यह विशेषकर गुरुवार, एकादशी और चातुर्मास में उपयुक्त है।

किसी विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं; शांत मन और भक्ति का एक क्षण पर्याप्त है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शान्ताकारं श्लोक क्या है?+

यह भगवान विष्णु का सर्वाधिक प्रसिद्ध ध्यान श्लोक है, जो 'शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्' से आरंभ होता है। यह विष्णु उपासना के आरंभ में उनके शांत स्वरूप को मन में लाने हेतु पढ़ा जाता है।

भुजगशयनं का अर्थ क्या है?+

भुजगशयनं का अर्थ है 'जो सर्प पर शयन करते हैं'। यह क्षीरसागर में महाशेष नाग (आदिशेष) पर सुखपूर्वक शयन करते भगवान विष्णु का वर्णन करता है।

शान्ताकारं श्लोक कब पढ़ना चाहिए?+

इसे विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा या दैनिक प्रार्थना के आरंभ में पढ़ा जाता है। गुरुवार, एकादशी और चातुर्मास विशेष उपयुक्त हैं, पर इसे मन शांत करने हेतु किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है।

शान्ताकारं श्लोक किसमें सहायक है?+

यह उपासना से पहले मन को शांत और स्थिर करता है और सांसारिक जीवन के भय व चिंता (भवभय) को दूर करने वाला माना जाता है। इसे पढ़ना भगवान विष्णु की शांत, रक्षक उपस्थिति का आह्वान करता है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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