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शिव तांडव स्तोत्र: अर्थ, लाभ व रावण ने क्यों रचा
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शिव तांडव स्तोत्र: अर्थ, लाभ व रावण ने क्यों रचा

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित मार्च 22, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

शिव तांडव स्तोत्र की पीछे की कथा

शिव तांडव स्तोत्र रावण द्वारा रचित - वही रावण जो बाद में रामायण के खलनायक बने। पर यह उनके पूर्व जीवन से, जब वे सर्वोच्च शिव भक्त थे।

कथा - रावण कैलाश पर्वत भगवान शिव का दर्शन हेतु जा रहे थे। नंदी ने रोका। रावण ने अपने अहंकार में पूरा कैलाश पर्वत उठाने का निर्णय किया। शिव ने अपने पैर के अंगूठे से दबाया, रावण के हाथ नीचे फँसे।

रावण ने तत्क्षण शिव तांडव स्तोत्र रचा - उनकी उग्र, लयबद्ध संस्कृत कविता क्षमा माँगते हुए निकल पड़ी।

शिव इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने क्षमा की, हाथ मुक्त किए, अनेक वरदान दिए।

रावण क्यों - महत्वपूर्ण - हिंदू ब्रह्मांडीय में खलनायक भी सर्वोच्च भक्त हो सकते। रावण वेदों के विद्वान, शिव के सबसे सिद्ध भक्त - सीता-अपहरण से अहंकार के कारण पतन से पहले।

संरचना - 17 छंद, संस्कृत पंचचामर छंद - लयबद्ध, लगभग संगीतमय। पाठ समय 5-7 मिनट।

सर्वाधिक प्रसिद्ध छंद व अर्थ

छंद 1 - आरंभ (सर्वाधिक उद्धृत) - 'जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्... चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्।'

'जिनके जटाओं में गंगा बहती; गले में सर्प माला; डमरू 'दमद दमद' बजती; उग्र तांडव नृत्य करते - भगवान शिव हमें मंगल प्रदान करें।'

आरंभ ब्रह्मांडीय मंच स्थापित - शिव तांडव नृत्य कर रहे।

छंद 2-6 - शिव का पूर्ण रूप - जटाएँ, तीसरा नेत्र, अर्धचंद्र, सर्प माला, भस्म-लिपटा शरीर।

छंद 7 - भक्त प्रार्थना।

छंद 8-12 - ब्रह्मांडीय नृत्य - स्तोत्र का हृदय। शिव विनाश व सृष्टि एक साथ नृत्य।

छंद 13 - वचन।

छंद 14-16 - भक्ति समर्पण।

छंद 17 - फलश्रुति - 'जो भी शिव पूजा के अंत में, प्रदोष काल में पाठ करे - शिव लक्ष्मी प्रदान करते।'

शिव तांडव स्तोत्र के शक्तिशाली लाभ

1. आंतरिक बल व साहस।

2. नकारात्मक प्रभाव निवारण।

3. वाणी व वाक्य स्पष्टता। रावण को दशग्रीव (दश-कंठ) नाम मिला।

4. लय व संगीत दक्षता।

5. धन (छंद 17 का वचन)।

6. अहंकार निवारण। विडंबना - स्तोत्र रावण द्वारा रचित जिसका अहंकार ने नष्ट किया।

7. सीधा शिव संबंध।

8. मानसिक स्वास्थ्य।

9. शारीरिक बल।

11-पाठ नियम - एक प्रदोष संध्या में 11 बार। 17×11 = 187 मंत्र पाठ ~90 मिनट।

प्रदोष विशेष - प्रदोष काल पर पाठ छंद 17 के विशेष लक्ष्मी आशीर्वाद देता।

शिव तांडव स्तोत्र सही जाप कैसे

शिव तांडव स्तोत्र सही जाप कैसे

सर्वोत्तम समय - प्रदोष काल। महाशिवरात्रि रात्रि सर्वोच्च।

सर्वोत्तम दिन - सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि, सावन सोमवार।

महत्वपूर्ण - पहले लय में महारत हासिल करें। अन्य स्तोत्रों के विपरीत, शिव तांडव लयबद्ध जाप माँगता। 'दमद दमद दमद' बीट हस्ताक्षर।

चरण - 1. पहले सुनें। 10-20 बार परंपरागत रिकॉर्डिंग। 2. अनुलेखन के साथ ऑडियो। 3. धीरे एकल अभ्यास। 4. गति जोड़ें।

सेटअप - शिवलिंग, सरसों तेल/घी दीया, बिल्व, भस्म, चंदन, कपूर, घंटी, आसन, माला।

विधि - 1. स्नान, श्वेत/केसरिया वस्त्र 2. भस्म तिलक 3. पूर्व/उत्तर मुख आसन 4. संकल्प 5. दीया 6. चंदन + भस्म शिवलिंग को 7. बिल्व + फूल 8. शिव तांडव पाठ पूर्ण लय में 5-7 मिनट 9. 'दमद दमद' पंक्तियों पर लयबद्ध घंटी 10. आरती

कुल समय - 15-25 मिनट।

विशिष्ट स्थितियों हेतु शिव तांडव

सार्वजनिक भाषण हेतु - महत्वपूर्ण प्रस्तुति से पहले एक बार।

आवाज़ समस्या हेतु - 41 दिन दैनिक।

भय निवारण।

शत्रु / न्यायालय। बड़ी सुनवाई से पहले 11 बार।

काला जादू। बजरंग बाण के साथ।

धन (छंद 17 वचन) - प्रदोष काल पर अनिवार्य।

अहंकार निवारण।

संगीत व नृत्य दक्षता।

महाशिवरात्रि रात्रि - मध्यरात्रि निशीथ काल पर 11 बार।

दैनिक बल।

सामान्य गलतियाँ

1. लय बिना पाठ।

2. 'दमद दमद दमद' गलत उच्चारण।

3. घंटी छोड़ना।

4. याद नहीं करना।

5. गलत दिनों पर पाठ।

6. छंद 17 छोड़ना।

7. अति-तेज़ पाठ।

8. भ्रमित भावनात्मक स्थिति।

9. लाल पहनना। शिव हेतु श्वेत, केसरिया, पीला।

10. तैयारी बिना।

ब्रह्मांडीय नृत्य को अपनाएँ

ब्रह्मांडीय नृत्य को अपनाएँ

शिव तांडव स्तोत्र हिंदू स्तोत्रों में अनूठा - खलनायक (रावण) द्वारा रचित, छंद 17 में धन का अंतर्निहित वचन, लयबद्ध संरचना शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य से।

जब आप अच्छी तरह पाठ करते - लय सहित, घंटी सहित, भक्ति सहित - आप केवल प्रार्थना नहीं कर रहे। आप शिव के तांडव में शामिल हो रहे।

तीन प्रतिबद्धता स्तर -

  • स्तर 1 - प्रदोष अभ्यासी
  • स्तर 2 - सोमवार भक्त
  • स्तर 3 - दैनिक ऊर्जा-वर्धक

अंतिम चिंतन - रावण जटिल पात्र। उनके अहंकार ने पतन किया। पर इससे पहले, कैलाश के नीचे फँसे क्षण में, उन्होंने यह रचा - संस्कृत साहित्य का शायद सबसे सुंदर स्तोत्र।

यह हिंदू ज्ञान - दुष्ट भी समर्पण में सौंदर्य उत्पन्न कर सकते।

हर हर महादेव। शिवा शिवः। दमद दमद दमद।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

क्या रावण द्वारा रचित स्तोत्र पाठ अशुभ?+

नहीं - बिल्कुल विपरीत। रावण, अपने पतन से पहले, शिव के सबसे समर्पित भक्त। स्तोत्र उनकी शुद्ध भक्ति के क्षण से।

शिव तांडव पाठ में कितना समय?+

उचित लयबद्ध गति में 5-7 मिनट। धीमी सीखने की गति 10-12 मिनट।

क्या प्रतिदिन शिव तांडव पाठ कर सकता?+

हाँ, दैनिक प्रातः पाठ उत्कृष्ट। पर पूर्ण प्रदोष-समय पाठ वास्तविक प्रदोष दिनों के लिए सुरक्षित।

क्या स्त्रियाँ शिव तांडव स्तोत्र पाठ कर सकती?+

हाँ - कोई लिंग प्रतिबंध नहीं।

यदि मैं लय सही नहीं कर सकता तो?+

20-50 बार परंपरागत रिकॉर्डिंग सुनें। ऑडियो के साथ अनुलेखन पढ़ें। हफ्तों एकांत में अभ्यास।

क्या शिव तांडव हनुमान चालीसा से बेहतर?+

भिन्न देवता, भिन्न उद्देश्य। हनुमान चालीसा सामान्य दैनिक रक्षा हेतु। शिव तांडव विशेष रूप से शिव संबंध हेतु।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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