आरती क्या है?
आरती हिंदू पूजा का प्रेमपूर्ण चरमबिंदु है, जिसमें जलती बत्तियों (या कपूर) का दीप देवता के समक्ष घुमाया जाता है जबकि भक्त भजन गाते, घंटी बजाते और ताली बजाते हैं। यह मंदिरों और घरों में, सुबह और विशेषकर संध्या (संध्या आरती) में की जाती है।
आरती शब्द संस्कृत आरात्रिक से आया है, जिसका अर्थ है प्रकाश से अंधकार का हरण। मूल रूप में आरती दिव्य को प्रकाश अर्पित करने का कार्य है और उस प्रकाश के माध्यम से अपना सम्पूर्ण स्व - मन, हृदय और इंद्रियाँ - ईश्वर को अर्पित करना है।
आरती के प्रत्येक अंग के पीछे का अर्थ
- दीपक: अग्नि सबसे शुद्ध तत्व है; इसका प्रकाश अज्ञान के अंधकार को मिटाते ज्ञान का प्रतीक है। प्रकाश अर्पित करना आत्मा की चेतना को उसके स्रोत को लौटाना है।
- ज्योति का परिक्रमण: देवता के चारों ओर दीप को वृत्त में घुमाना दिव्य स्वरूप के हर भाग का सम्मान करता है और दर्शाता है कि ईश्वर वह केंद्र है जिसके चारों ओर हमारा सम्पूर्ण जीवन घूमता है।
- घंटी: इसकी ध्वनि पवित्र ॐ धारण करती है, नकारात्मकता दूर करती है, और मन को सजगता तथा देवता की उपस्थिति की ओर बुलाती है।
- आरती गायन: भजन हमारे प्रेम और स्तुति को स्वर देता है; मिलकर गाना सभी हृदयों को एक भक्ति में जोड़ता है।
- ज्योति का आशीर्वाद लेना: अंत में भक्त अपने हाथ ज्योति पर फेरकर आँखों और सिर से लगाते हैं, ऊष्मा, प्रकाश और कृपा ग्रहण करते हुए।
हम आरती क्यों करते हैं
आरती के इतने केंद्रीय स्थान के कारण:
1. पूजा पूर्ण करने के लिए: आरती पूजा का आनंदमय समापन है, जिसमें सभी अर्पण प्रकाश और गीत से संपन्न होते हैं। 2. प्रकाश के माध्यम से स्वयं को अर्पित करना: ज्योति अहंकार और आत्मा का प्रतीक है; ईश्वर के समक्ष इसे घुमाना स्व का समर्पण है और प्रार्थना कि हमारा भीतरी प्रकाश दिव्य में मिल जाए। 3. देवता का पूर्ण दर्शन: मंद प्रकाश वाले गर्भगृह में घूमता दीप नेत्र को देवता के स्वरूप की हर बारीकी देखने देता है, दर्शन को गहरा करता है। 4. शुद्धि और उत्थान: सुगंध, प्रकाश, ध्वनि और गीत मिलकर वातावरण को शुद्ध करते हैं और मन को भक्ति की अवस्था में उठाते हैं।
गूढ़ शिक्षा समर्पण है: जैसे ज्योति स्थिर रूप से ऊपर की ओर जलती है, आरती हमसे कहती है कि अपना हृदय अहंकार के अंधकार से मुक्त, स्थिर रूप से ईश्वर की ओर जलने दें।
आरती कैसे की जाती है

- दीप तैयार करें: घी में जलती विषम संख्या में रुई की बत्तियों वाली आरती थाली, या कपूर का टुकड़ा प्रयोग करें, साथ में पुष्प, अक्षत और धूप।
- देवता के सम्मुख खड़े हों शांत, भक्तिपूर्ण मन से, मुख्य पूजा पूर्ण होने के बाद।
- आरती गाना आरंभ करें बायें हाथ से घंटी बजाते हुए।
- दीप को घड़ी की दिशा में घुमाएँ देवता के समक्ष - परंपरागत रूप से कोमल वृत्ताकार गति में, चरणों से ऊपर तक स्वरूप को आवृत करते हुए, सामान्यतः कुछ पूर्ण चक्र।
- समापन दीप रखकर, पुष्पांजलि अर्पित कर, और नमन करके करें।
- आशीर्वाद बाँटें: ज्योति को सभी उपस्थितों तक पहुँचाएँ; प्रत्येक व्यक्ति अपनी हथेलियाँ उस पर फेरकर आँखों और सिर से लगाता है, फिर प्रसाद ग्रहण करता है।
दीप दाहिने हाथ में रखा जाता है; गीत केवल होंठों से नहीं, हृदय से आना चाहिए।
त्वरित उत्तर
हम आरती क्यों करते हैं?+
आरती देवता को प्रकाश अर्पित करके पूजा को पूर्ण करती है। ज्योति का परिक्रमण अहंकार और स्व के समर्पण का प्रतीक है, यह प्रार्थना कि हमारा भीतरी प्रकाश दिव्य में मिल जाए। यह भक्तों को देवता का पूर्ण दर्शन भी देती है और मन को उठाती है।
आरती का दीप किसका प्रतीक है?+
दीप अग्नि का प्रतीक है, सबसे शुद्ध तत्व, जिसका प्रकाश अज्ञान के अंधकार को मिटाते ज्ञान का प्रतीक है। ज्योति आत्मा और अहंकार का भी प्रतीक है; इसे ईश्वर को अर्पित करना समर्पण और भीतरी प्रकाश के दिव्य में मिलने की कामना व्यक्त करता है।
आरती की ज्योति देवता के समक्ष क्यों घुमाई जाती है?+
ज्योति का परिक्रमण देवता के स्वरूप के हर भाग का सम्मान करता है और दर्शाता है कि ईश्वर वह केंद्र है जिसके चारों ओर हमारा जीवन घूमता है। मंद प्रकाश वाले गर्भगृह में यह सम्पूर्ण स्वरूप को प्रकाशित कर भक्त के दर्शन को गहरा करता है।
आरती के बाद हम ज्योति का आशीर्वाद क्यों लेते हैं?+
आरती के बाद भक्त अपनी हथेलियाँ ज्योति पर फेरकर आँखों और सिर से लगाते हैं ताकि उसकी ऊष्मा, प्रकाश और देवता की कृपा ग्रहण कर सकें। यह पवित्र अग्नि के आशीर्वाद को अपने भीतर धारण करने का तरीका है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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