सबसे शक्तिशाली मंत्र - हर लक्ष्य के लिए

    आठ लक्ष्यों के लिए तीन-तीन प्रमुख मंत्र - परंपरा में जिस क्रम से उनका प्रयोग होता है, उसी क्रम में। हर मंत्र के साथ संस्कृत, लिप्यंतरण, अर्थ, जप संख्या और सही समय।

    यह क्रम शास्त्रों और प्रचलित पूजा परंपरा पर आधारित है, किसी माप या रैंकिंग पर नहीं। मंत्र साधना चिकित्सा, विधिक या आर्थिक परामर्श का विकल्प नहीं है।

    धन और समृद्धि

    लक्ष्मी साधना शुक्रवार, पूर्णिमा और दीपावली पर की जाती है - पूर्व दिशा, घी का दीपक और लाल या कमलगट्टे की माला के साथ।

    1. 1

      ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

      Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseed Praseed Om Shreem Hreem Shreem Mahalakshmyai Namah

      महालक्ष्मी मंत्र - कमल पर विराजमान देवी से प्रसन्न होकर वैभव देने की प्रार्थना।

      जप विधि: प्रतिदिन 108 बार, शुक्रवार को प्रातः या प्रदोष काल में सर्वोत्तम।

    2. 2

      ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः

      Om Shreem Hreem Kleem Mahalakshmyai Namah

      संक्षिप्त बीज रूप - श्रीं धन के लिए, ह्रीं शक्ति के लिए, क्लीं आकर्षण के लिए।

      जप विधि: संध्या दीपक के बाद एक माला (108); नए साधकों के लिए उपयुक्त।

    3. 3

      ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा

      Om Yakshaya Kuberaya Vaishravanaya Dhanadhanyadhipataye Dhanadhanya Samriddhim Me Dehi Dapaya Swaha

      कुबेर मंत्र - बचत, व्यापार पूँजी और स्थिर आय के लिए।

      जप विधि: धनतेरस पर 108 बार, या प्रतिदिन उत्तर दिशा में तिजोरी के पास।

    विघ्न निवारण और नई शुरुआत

    हर पूजा, परीक्षा, यात्रा, खरीद या नए कार्य से पहले गणेश का आवाहन होता है। बुधवार और चतुर्थी उनके दिन हैं।

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      ॐ गं गणपतये नमः

      Om Gam Ganapataye Namah

      मूल गणेश बीज मंत्र - विघ्नहर्ता को नमस्कार।

      जप विधि: किसी भी नए कार्य से पहले 108 बार; संकल्प हेतु 21 दिन।

    2. 2

      वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

      Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha, Nirvighnam Kuru Me Deva Sarvakaryeshu Sarvada

      वक्रतुण्ड, करोड़ सूर्यों के समान तेजस्वी देव से सभी कार्य निर्विघ्न करने की प्रार्थना।

      जप विधि: पूजा के आरंभ और यात्रा से पहले 11 या 21 बार।

    3. 3

      ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा

      Om Shreem Hreem Kleem Glaum Gam Ganapataye Vara Varada Sarvajanam Me Vashamanaya Swaha

      गणपति साधना मंत्र - व्यवहार और सार्वजनिक कार्यों में सफलता हेतु।

      जप विधि: 41 दिन तक प्रतिदिन एक माला, चतुर्थी से आरंभ करना श्रेष्ठ।

    स्वास्थ्य, आरोग्य और दीर्घायु

    महामृत्युंजय शास्त्रीय आरोग्य साधना है - सोमवार, शिवरात्रि और रोग के समय जप, और अभिमंत्रित जल रोगी या तुलसी को दिया जाता है।

    1. 1

      ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

      Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam, Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat

      ऋग्वेद का महामृत्युंजय मंत्र - रोग और अकाल मृत्यु से मुक्ति की प्रार्थना।

      जप विधि: प्रतिदिन 108 बार; गंभीर रोग में सवा लाख जप का पारंपरिक संकल्प।

    2. 2

      ॐ नमः शिवाय

      Om Namah Shivaya

      पंचाक्षरी मंत्र - शरीर के साथ मन और श्वास को भी स्थिर करता है।

      जप विधि: कभी भी, कितनी भी बार; सोमवार को रुद्राक्ष माला से 108।

    3. 3

      ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः

      Om Namo Bhagavate Vasudevaya Dhanvantaraye Amritakalasha Hastaya Sarvamaya Vinashaya Trailokyanathaya Shri Mahavishnave Namah

      धन्वंतरि मंत्र - स्वास्थ्य लाभ, शल्य चिकित्सा और रोगी के कल्याण हेतु।

      जप विधि: धनतेरस पर या उपचार के दिनों में प्रतिदिन 108 बार।

    रक्षा, साहस और भय-निवारण

    हनुमान साधना मंगलवार और शनिवार को होती है। भय, बुरे स्वप्न, मुकदमे और शनि पीड़ा का पारंपरिक उपाय।

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      ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्

      Om Han Hanumate Rudratmakaya Hum Phat

      रक्षक हनुमान बीज मंत्र - रुद्र स्वरूप का आवाहन।

      जप विधि: मंगलवार को दक्षिण-पूर्व मुख कर चमेली तेल के दीपक के साथ 108 बार।

    2. 2

      ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

      Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche

      दुर्गा सप्तशती का नवार्ण मंत्र - नवरात्रि का प्रमुख रक्षा मंत्र।

      जप विधि: नवरात्रि में प्रतिदिन 108 बार, या सप्तशती पाठ से पहले।

    3. 3

      ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

      Om Praam Preem Praum Sah Shanaishcharaya Namah

      शनि मंत्र - साढ़े साती, ढैया और शनि जनित विलंब के लिए।

      जप विधि: शास्त्रीय संख्या 23,000 जप; नियमित अभ्यास हेतु हर शनिवार 108।

    विद्या, परीक्षा और स्पष्टता

    सरस्वती साधना वसंत पंचमी या किसी बुधवार से आरंभ करें, ब्रह्म मुहूर्त में, पुस्तकें देवी के सम्मुख रखकर।

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      ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

      Om Aim Saraswatyai Namah

      ऐं बीज वाणी, स्मरण शक्ति और विद्या का आवाहन करता है।

      जप विधि: अध्ययन से पहले 108 बार; परीक्षा से 21 दिन पहले आरंभ।

    2. 2

      ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

      Om Bhur Bhuvah Swaha, Tat Savitur Varenyam, Bhargo Devasya Dhimahi, Dhiyo Yo Nah Prachodayat

      गायत्री मंत्र - दिव्य प्रकाश हमारी बुद्धि को जाग्रत करे, यह प्रार्थना।

      जप विधि: सूर्योदय, मध्याह्न या सूर्यास्त - तीनों संध्या में 108 बार।

    3. 3

      ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा

      Om Shreem Hreem Saraswatyai Swaha

      विद्यार्थियों और वक्ताओं द्वारा आत्मविश्वासपूर्ण वाणी हेतु प्रयुक्त।

      जप विधि: 40 दिन तक प्रतिदिन एक माला, ब्रह्म मुहूर्त में श्रेष्ठ।

    विवाह और संबंध

    विवाह में विलंब और दांपत्य सामंजस्य के लिए सोमवार व्रत और कात्यायनी साधना पारंपरिक उपाय हैं।

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      कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥

      Katyayani Mahamaye Mahayoginya Dhishwari, Nandagopasutam Devi Patim Me Kuru Te Namah

      भागवत का कात्यायनी मंत्र - योग्य वर की कामना से कन्याओं द्वारा जप।

      जप विधि: मार्गशीर्ष मास या किसी भी नवरात्रि में प्रतिदिन 108 बार।

    2. 2

      ॐ गौरी शंकराय नमः

      Om Gauri Shankaraya Namah

      शिव-पार्वती के मिलन का आवाहन - दांपत्य सामंजस्य हेतु जप।

      जप विधि: सोमवार और हरतालिका तीज पर 108 बार।

    3. 3

      ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा

      Om Kleem Krishnaya Govindaya Gopijanavallabhaya Swaha

      क्लीं कृष्ण मंत्र - प्रेम, स्नेह और संबंधों में सुलह हेतु।

      जप विधि: बुधवार या अष्टमी को संध्या में तुलसी माला से एक माला।

    मानसिक शांति और चिंता

    इन्हें 10-15 मिनट धीरे-धीरे, स्वर में या मन में जपें - अवधि से अधिक महत्व श्वास की स्थिर लय का है।

    1. 1

      ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

      Om Shantih Shantih Shantih

      तीन बार शांति - शरीर, वातावरण और दैविक स्तर पर।

      जप विधि: किसी भी साधना के अंत में 3, 11 या 21 बार।

    2. 2

      हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

      Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare, Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare

      महामंत्र - 16 नामों का कीर्तन, कलियुग की सबसे सरल साधना।

      जप विधि: प्रतिदिन एक से सोलह माला; समय या शुद्धि का बंधन नहीं।

    3. 3

      ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

      Om Namo Bhagavate Vasudevaya

      द्वादशाक्षर विष्णु मंत्र - समर्पण, स्थिरता और अच्छी नींद हेतु।

      जप विधि: सोने से पहले या एकादशी पर 108 बार।

    करियर, मान-सम्मान और सफलता

    सूर्य साधना सूर्योदय पर ताम्र पात्र से अर्घ्य देकर होती है - पद, राजकीय कार्य और प्रतिष्ठा से जुड़ी।

    1. 1

      ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

      Om Hraam Hreem Hraum Sah Suryaya Namah

      सूर्य बीज मंत्र - आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा हेतु।

      जप विधि: सूर्योदय पर जल अर्घ्य देते हुए 108 बार।

    2. 2

      ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै कमलधारिण्यै सिंहवाहिन्यै स्वाहा

      Om Aim Hreem Kleem Mahalakshmyai Kamaladharinyai Simhavahinyai Swaha

      सरस्वती, दुर्गा और लक्ष्मी बीजों का संयोग - ज्ञान, साहस और फल एक साथ।

      जप विधि: 41 दिन एक माला; शुक्रवार या पूर्णिमा से आरंभ।

    3. 3

      ॐ श्री हनुमते नमः

      Om Shri Hanumate Namah

      कार्य में शक्ति, अनुशासन और निरंतर प्रयास हेतु जप।

      जप विधि: मंगलवार को 108 बार, फिर हनुमान चालीसा।

    सामान्य प्रश्न

    हिंदू धर्म का सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?

    परंपरा में तीन मंत्र सर्व-सिद्धि माने जाते हैं: बुद्धि के लिए गायत्री, आरोग्य और दीर्घायु के लिए महामृत्युंजय, और नित्य साधना के लिए ॐ नमः शिवाय। सभी संप्रदायों में एक ही क्रम मान्य नहीं है - आपके लक्ष्य के अनुकूल और गुरु द्वारा दिया गया मंत्र ही आपके लिए फलदायी है।

    मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

    नित्य जप की मानक संख्या 108 (एक माला) है। संकल्प प्रायः 11, 21 या 41 दिन का होता है; शास्त्रीय पुरश्चरण में सवा लाख या अधिक जप होता है। गिनती अनुमान से नहीं, माला या वंदना के जप काउंटर से रखें।

    मंत्र जप का सर्वोत्तम समय क्या है?

    ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 96 से 48 मिनट पूर्व) सबसे प्रबल माना जाता है, फिर तीनों संध्या - सूर्योदय, मध्याह्न और सूर्यास्त। किसी देवता के बीज मंत्र प्रायः उनके वार से जुड़े होते हैं।

    क्या गुरु दीक्षा के बिना मंत्र जप कर सकते हैं?

    नाम मंत्र और सामान्य स्तोत्र - ॐ नमः शिवाय, महामंत्र, हनुमान चालीसा, गायत्री - बिना दीक्षा के जपे जाते हैं। निश्चित पुरश्चरण वाली तांत्रिक बीज साधनाएँ परंपरा में गुरु से ली जाती हैं।

    क्या संस्कृत न समझने पर भी मंत्र फल देते हैं?

    हाँ - अनुवाद से अधिक शुद्ध उच्चारण और नियमित पुनरावृत्ति महत्वपूर्ण है, इसीलिए यहाँ हर मंत्र का लिप्यंतरण दिया गया है। अर्थ एक बार पढ़ लेने से मन भटकने के बजाय मंत्र में टिकता है।

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    108 की माला, कंपन संकेत और दैनिक रिकॉर्ड - वंदना के जप काउंटर में।