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भगवान कृष्ण के 108 नाम: अर्थ, लाभ व दैनिक जप विधि सहित पूरी सूची
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भगवान कृष्ण के 108 नाम: अर्थ, लाभ व दैनिक जप विधि सहित पूरी सूची

12 मिनट पढ़ेंप्रकाशित फ़रवरी 24, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

कृष्ण के 108 पवित्र नाम क्यों - केवल एक नहीं

जब कृष्ण पृथ्वी पर विचरण कर रहे थे, अपने मानव जीवन में उन्होंने 64 भिन्न भूमिकाएँ निभाईं - पुत्र, भाई, मित्र, प्रेमी, पति, सारथी, गुरु, राजनेता, योद्धा, दार्शनिक। कोई एकल नाम उन सबको समेट नहीं सकता था।

पद्म पुराण, भागवत पुराण, व गोपाल सहस्रनाम सामूहिक रूप से उन्हें 1008 नाम देते हैं। इनमें से 108 सर्वाधिक पवित्र - कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (कृष्ण के 108 पवित्र नाम) के रूप में जाने जाते। ये 108 हर कृष्ण मंदिर, हर जन्माष्टमी, हर वैष्णव घर के हर भोर पर पाठ किए जाते।

सनातन धर्म में 108 की संख्या मनमानी नहीं -

  • 12 राशि चिह्न × 9 ग्रह = 108
  • 27 चंद्र भवन × प्रत्येक के 4 चरण = 108
  • मानव शरीर में 108 मर्म बिंदु (जीवन ऊर्जा केंद्र)
  • पूर्ण वैदिक संहिता में 108 उपनिषद
  • 108 मुखी रुद्राक्ष - दुर्लभतम व सर्वाधिक शक्तिशाली मनका
  • पृथ्वी से सूर्य की दूरी = 108 × सूर्य का व्यास (व चंद्रमा से = 108 × चंद्रमा का व्यास)

108-मनकों की माला से कृष्ण के 108 नाम जपते समय आप स्वयं ब्रह्मांडीय गणित से संरेखित होते।

प्रत्येक नाम विशिष्ट आशीर्वाद खोलता -

  • कुछ नाम (जैसे गोविंद, गोपाल) गायों, परिवार, आजीविका की दिव्य रक्षा लाते
  • कुछ (जैसे माधव, मधुसूदन) शत्रुओं व पीड़ाओं के नाशक
  • कुछ (जैसे हृषिकेश, योगेश्वर) अंतर्चेतना व ध्यान जागृत करते
  • कुछ (जैसे देवकीनंदन, यशोदानंदन) कृष्ण का पारिवारिक प्रेम व ऊष्मा आमंत्रित करते
  • कुछ (जैसे मुरारी, मुकुंद) सीधे मोक्ष देते

ब्रह्म वैवर्त पुराण घोषित करता - 'कृष्ण नाम का जप, एक बार भी शुद्ध भाव से किया जाए, तो पाप-कोटि हरण करता।' (शुद्ध भाव से कृष्ण नाम का एक भी जप करोड़ों पाप नष्ट करता है।) सोचें वह शक्ति जब आप क्रम में सभी 108 नाम जपते।

🙏 वंदना ऐप के 108 नाम मॉड्यूल में संस्कृत उच्चारण में हर नाम का ऑडियो, अंग्रेजी अनुवाद, व मार्गदर्शित 108-जप मोड जहाँ ऐप आपकी पुनरावृत्तियाँ स्वतः गिनता।

भगवान कृष्ण के 108 नामों की पूर्ण सूची

प्रत्येक नाम से आरंभ व नमः से समाप्त। सभी 108 एक बैठक में, आदर्श रूप से 108-मनकों की तुलसी या रुद्राक्ष माला से।

नाम 1-27 (पारिवारिक व बाल्य नाम) - 1. ॐ कृष्णाय नमः - श्याम वर्ण, आकर्षक 2. ॐ कमलनाथाय नमः - लक्ष्मी के स्वामी 3. ॐ वासुदेवाय नमः - वसुदेव पुत्र 4. ॐ सनातनाय नमः - शाश्वत 5. ॐ वसुदेवात्मजाय नमः - वसुदेव के पुत्र 6. ॐ पुण्याय नमः - पुण्य स्वरूप 7. ॐ लीला-मनुषविग्रहाय नमः - लीला हेतु मानव रूप धारण किए 8. ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः - श्रीवत्स चिह्न व कौस्तुभ मणि धारक 9. ॐ यशोदावत्सलाय नमः - यशोदा प्रिय 10. ॐ हरि - पाप-नाशक 11. ॐ चतुर्भुजात्त-चक्रासी-गदा-शंख-आम्बुरुदाकाराय नमः - चार बाहों में चक्र, खड्ग, गदा, शंख व कमल धारक 12. ॐ देवकीनंदनाय नमः - देवकी का आनंद 13. ॐ श्रीशाय नमः - श्री (लक्ष्मी) के स्वामी 14. ॐ नंदगोपप्रियात्मजाय नमः - नंद गोप का प्रिय पुत्र 15. ॐ यमुना-वेग-संहारिणे नमः - यमुना के वेग को रोकने वाले 16. ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नमः - बलभद्र (बलराम) के प्रिय अनुज 17. ॐ पूतना-जीवित-हराय नमः - पूतना के प्राण हरने वाले 18. ॐ शकटासुर-भंजनाय नमः - शकटासुर के भंजक 19. ॐ नंदव्रज-जन-आनंदिने नमः - नंद के व्रज के लोगों के आनंद 20. ॐ सच्चिदानंद-विग्रहाय नमः - सत्-चित्-आनंद का स्वरूप 21. ॐ नवनीत-विलिप्त-अंगाय नमः - मक्खन से लिप्त शरीर 22. ॐ नवनीत-नटनाय नमः - मक्खन-नटक 23. ॐ अनघाय नमः - निष्पाप 24. ॐ नवजलधर-श्यामलाय नमः - ताज़े वर्षा बादल जैसे श्याम 25. ॐ व्रज-अंगनाभूषणाय नमः - व्रज की स्त्रियों का आभूषण 26. ॐ अदृश्याय नमः - दृष्टि से परे 27. ॐ सहस्राक्षाय नमः - सहस्र नेत्र वाले

(शेष 81 नाम अंग्रेजी सूची से समान - संस्कृत/हिंदी अर्थ हेतु वंदना ऐप पर पूर्ण पाठ देखें।)

नाम 28-108 का सारांश -

28-54 (वृंदावन-लीला नाम) - पीतांबर, हरि, वनमाली, मधुसूदन, गोविंद, यदुनंदन, राधा प्रिय, राम, दामोदर, मुरारी, योगेश्वर, अच्युत, पुंडरीकाक्ष, अनंत-शायी, गोपालन, श्यामललित, माधव-प्रिय, नरहरि, मन्मथ, मधुसूदन, कंजलोचन, सहस्रजित्, भुवनपालक, मधुसूदन-प्रिय, योगी-राशि, कृष्ण।

55-81 (ज्ञान व शक्ति नाम) - निरंजन, अक्षय-विष्णु, अव्यय-रूपिन्, सनातन, सहस्र-पात, सहस्र-मुख, सहस्र-नामन्, विश्वेश्वर, विश्व-वंद्य, विश्वमाया-विनाशन, अनंत, अचिंत्य, ब्रह्मन्, ब्रह्मचारिन्, ब्रह्म-विद, ब्रह्म-रूपिन्, परब्रह्मन्, परमेश्वर, परा-शक्ति, परमात्मन्, आदित्य-आदित्य, वसुदेवसुत, देवर्षि, आर्य, यशस्विन्, परम-पुरुष, सत्य-संकल्प।

82-108 (महाभारत व मोक्ष नाम) - हिरण्य-रेतस, सुवर्ण, लोक-आत्मन्, लोक-भावन, लोक-अध्यक्ष, लोक-पाल, लोक-पितृ, लोक-पितामह, सरस्वत, परा-कलक्ष, अधोक्षज, अखालमाय, विधातृ, पुण्य-मुख्य, पुण्यकाय, पुण्य-प्रद, योगेश्वर, योग-पति, योग-विद्, योग-संधायिन, मुकुंद, मधुर, योगिन्, जनार्दन, वसिष्ठ, वारुणिज, गोविंद (अंतिम वंदन - सर्वाधिक प्रेम सहित कहा जाता)।

पाठ का समापन - 'इति श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली सम्पूर्णम्। सर्वाभ्यो भगवते कृष्णाय नमः।' (इस प्रकार 108 नाम पूर्ण। सर्वत्र विद्यमान भगवान कृष्ण को नमन।)

धीरे करने पर पूर्ण पाठ लगभग 12-15 मिनट लेता, 108-माला के प्रत्येक मनके पर एक नाम।

108 नाम कैसे जपें - पूर्ण दैनिक विधि

श्रेष्ठ समय - ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:00 – 5:30) आदर्श। दूसरा सर्वश्रेष्ठ - सुबह 11 बजे से पहले कोई भी समय। तीसरा विकल्प - सायं 6 बजे से रात्रि 8 बजे के बीच। दैनिक राहु काल में जप टालें।

श्रेष्ठ दिन - दैनिक श्रेष्ठ। एक दिन चुनना हो तो बुधवार (कृष्ण दिवस) व एकादशी (विष्णु दिवस) सर्वाधिक शक्तिशाली। जन्माष्टमी अधिकतम लाभ का दिन (जन्माष्टमी पर 1 जप = सामान्य दिन के 108 जप)।

श्रेष्ठ दिशा - पूर्व मुख (जहाँ सूर्योदय) या उत्तर (जहाँ मेरु पर्वत)।

माला चयन -

  • तुलसी माला (108 मनके) - कृष्ण हेतु सर्वाधिक अनुशंसित; तुलसी विष्णु/कृष्ण को पवित्र
  • वैजयंती माला - स्वयं कृष्ण की प्रिय माला (लाल+पीले बीज), मंदिरों में उपयोग
  • कमल-गट्टा माला (कमल बीज) - समृद्धि-केंद्रित जप हेतु
  • रुद्राक्ष माला - काम करती पर शिव से अधिक जुड़ी; तुलसी अनुपलब्ध हो तभी
  • टालें - अ-तुलसी काठ माला, प्लास्टिक माला, टूटी माला

दैनिक अभ्यास -

चरण 1 - जप-पूर्व तैयारी (5 मिनट) - स्नान (या न्यूनतम मुख व हाथ धोएँ)। स्वच्छ पीले, श्वेत, या केसरिया वस्त्र। ऊन, रेशम, या कुश घास के आसन पर बैठें (नंगे फर्श पर कभी नहीं - यह ऊर्जा शोषित करता)। दाहिने हाथ में माला रखें।

चरण 2 - दीया जलाएँ - घी या तिल-तेल दीया। कृष्ण मूर्ति के सामने ताज़े फूल (पीला गेंदा या श्वेत कमल पसंदीदा) व तुलसी पत्र।

चरण 3 - संकल्प (1 मिनट) - 'मैं [नाम], इस [दिन] पर अपने परिवार के कल्याण, अपने पापों के नाश, व अपनी भक्ति के जागरण हेतु भगवान कृष्ण के 108 पवित्र नाम जपता/जपती हूँ। कृष्णाय नमः।'

चरण 4 - 108-नाम पाठ आरंभ - दाहिने हाथ के अंगूठे व मध्यमा के बीच माला। तर्जनी माला को स्पर्श नहीं करती (तर्जनी अहंकार का प्रतीक)। 'मेरु' मनके (सबसे बड़ा, बंद मनका) से आरंभ - पर इसे पार न करें।

प्रत्येक मनके पर एक नाम। प्रत्येक नाम के साथ अगले मनके पर। मनका 1 से मनका 108 तक पूर्ण माला - और कृष्ण के 108 नाम।

चरण 5 - समापन पर मेरु मनका पार न करें। माला को भौतिक रूप से घुमाकर दिशा बदलें। यह नियम ऊर्जा संरक्षित करता।

चरण 6 - अंतिम वंदन (1 मिनट) - 'इति श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली सम्पूर्णम्। सर्वाभ्यो भगवते कृष्णाय नमः।' माला को माथे पर स्पर्श कराकर वेदी पर रखें (फेंकें या फर्श पर कभी नहीं)।

चरण 7 - संक्षिप्त ध्यान (5-10 मिनट) - आँखें बंद। कृष्ण के स्वरूप की कल्पना (अधिमानतः बाँसुरी सहित वृंदावन-बाल्य छवि)। उनकी उपस्थिति महसूस करें। मौन में रहें।

चरण 8 - पुण्य समर्पण - इस जप का पुण्य मन में अर्पण करें - (क) परिवार कल्याण, (ख) विशिष्ट आवश्यकता या इच्छा, (ग) सभी जीवों को। यह 'त्रिपक्षीय समर्पण' शास्त्रानुसार पुण्य 3x गुणित करता।

कुल समय - पूर्ण विधि हेतु दैनिक 25-30 मिनट। केवल 15 मिनट हों तो चरण 1, 4, 6, 7 (तैयारी व ध्यान छोड़ें पर वास्तविक जप कभी न छोड़ें)।

रखरखाव - हर 6 माह माला पुनः-पिरोएँ या साफ करें (गौ घी + तुलसी जल से पोंछें)। माला मनका टूटे तो तुरंत बदलें (टूटी माला से जारी न रखें)।

कृष्ण के 108 नामों के गहन अर्थों की खोज

कृष्ण के 108 नामों के गहन अर्थों की खोज

कृष्ण के प्रत्येक नाम एक संकुचित धर्मशास्त्र है - एक ऐसा संस्कृत शब्द जो एक दिव्य गुण, एक ब्रह्मांडीय कार्य को समाहित करता है।

गोविंद: "गो" (गाय/इंद्रियां/पृथ्वी) + "विंद" (रक्षक)। यह गायों, पृथ्वी और इंद्रियों के संरक्षक का बोध कराता है।

मधुसूदन: मधु दानव का नाश करने वाले। आध्यात्मिक रूप से - सांसारिक आसक्ति को नष्ट करने वाले।

अच्युत: "अचल, अटल।" जो कभी नहीं गिरता - दिव्य विश्वसनीयता का बोध।

वासुदेव: वसुदेव के पुत्र, साथ ही - "सर्वव्यापी" (वसु = निवास + देव = दिव्य)।

मुरारि: मुर दानव के शत्रु। आध्यात्मिक रूप से - आत्मा को अंधकार से मुक्त करने वाले।

पार्थसारथी: पार्थ (अर्जुन) के सारथी - संपूर्ण भगवद्गीता एक शब्द में।

श्यामसुंदर: "सुंदर श्याम वर्ण वाले।" कृष्ण का गहरा वर्ण अनंत आकाश और असीम चेतना का प्रतीक है।

वंदना ऐप पर सभी 108 नामों का अर्थ सहित श्रवण उपलब्ध है।

विभिन्न कृष्ण नामों के जाप के विशिष्ट लाभ

हिंदू भक्ति परंपरा विशेष जीवन स्थितियों के लिए विशिष्ट कृष्ण नाम निर्धारित करती है।

आर्थिक स्थिरता के लिए: गुरुवार की सुबह "गोविंद" और "दामोदर" के 108 बार जाप करें।

बाधा निवारण के लिए: "केशव" और "मधुसूदन" का जाप विशेष रूप से सहायक है।

विवाह और संबंधों के लिए: "गोपाल" और "मदन मोहन" का जाप उचित जीवन साथी पाने में सहायक है।

शैक्षणिक सफलता के लिए: "मुरली" और "ज्ञान गम्य" का जाप छात्रों के लिए उपयोगी है।

बच्चों की रक्षा के लिए: "बालगोपाल" का जाप करें।

आध्यात्मिक मोक्ष के लिए: "अच्युत," "अनंत," और "पुरुषोत्तम" का जाप करें।

दुःख और हानि में: "माधव" और "हरि" का जाप शोक में सहायक है।

वंदना ऐप पर नाम ओरेकल फीचर उपलब्ध है - अपनी स्थिति के अनुसार उपयुक्त नाम पाएं।

कृष्ण के 108 नाम जपने की पूर्ण विधि: चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका

कृष्ण के 108 नाम एक स्वतंत्र साधना के रूप में या व्यापक विष्णु पूजा में शामिल किए जा सकते हैं।

तैयारी: वेदी पर कृष्ण की मूर्ति या चित्र रखें, घी का दीपक जलाएं, चंदन या गुलाब की अगरबत्ती लगाएं। तुलसी के पत्ते विशेष पावन हैं।

आचमन: तीन बार जल सिप करें: १. "ओम अच्युताय नमः" २. "ओम अनंताय नमः" ३. "ओम गोविंदाय नमः"

संकल्प: जल हाथ में लेकर अपना उद्देश्य बोलें और जल मूर्ति के आधार पर डालें।

ध्यान श्लोक: मन में कृष्ण का स्वरूप स्थापित करने के बाद नाम जाप शुरू करें।

108 नाम जाप: 108 मनके की माला से, दाहिने हाथ से, अंगूठे और मध्यमा से मनका गिनें। प्रत्येक नाम के साथ "ओम [नाम] नमः" बोलें।

सप्ताहिक कार्यक्रम: गुरुवार - पूर्ण अनुष्ठान (कृष्ण का प्राथमिक दिन)।

वंदना ऐप पर सभी 108 नामों का शुद्ध उच्चारण सहित ऑडियो उपलब्ध है।

औपचारिक पूजा से परे दैनिक जीवन में कृष्ण के नाम

औपचारिक पूजा से परे दैनिक जीवन में कृष्ण के नाम

कृष्ण के महानतम भक्त - मीराबाई, सूरदास, तुकाराम - मुख्यतः कर्मकांडी नहीं थे। उनकी भक्ति प्रत्येक जागृत क्षण में व्याप्त थी।

दैनिक गतिविधियों में नाम: "हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे" - महामंत्र - कलियुग के लिए विशेष रूप से निर्मित है। खाना बनाते, चलते, गाड़ी चलाते किसी भी समय जप करें।

दैनिक घटनाओं में नाम: जब भोजन सुंदर हो - "गोविंद।" जब बच्चा हंसे - "बालगोपाल।" जब भय हो - "अभय।" यह प्रथा हर क्षण को पूजा बनाती है।

लिखित जप: नोटबुक में "श्री कृष्ण श्री कृष्ण" 108 या 1008 बार लिखना एक शक्तिशाली अभ्यास है।

अभिवादन में नाम: "जय श्री कृष्ण" को अभिवादन के रूप में उपयोग करें - गुजरात और महाराष्ट्र में यह "हैलो" का स्थान ले चुका है।

सांस के साथ नाम: "गो-" श्वास पर, "-विंद" उच्छ्वास पर। यह अभ्यास कृष्ण की याद को सांस जितना निरंतर बना देता है।

वंदना ऐप पर दिनभर नाम-स्मरण अनुस्मारक उपलब्ध हैं।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

क्या मुझे कृष्ण के 108 नाम जपने हेतु संस्कृत आना अनिवार्य है?+

नहीं - सच्ची सच्चाई पूर्ण उच्चारण से अधिक मायने रखती। स्वयं कृष्ण भगवद्गीता 9.26 में कहते - 'जो भी प्रेम से अर्पित हो, पत्र, पुष्प, फल, या जल भी, मैं स्वीकार करता।' जो लिप्यंतरण आपके लिए संभव हो उससे आरंभ - हिंदी लिपि साथ रोमन लिपि ठीक। पहले एकल प्रयास से पहले वंदना ऐप का ऑडियो पाठ 5 बार सुनें। 30 दिनों में आपका उच्चारण स्वाभाविक रूप से सुधरेगा। भक्ति की ऊर्जा कृष्ण तक पहुँचती, संस्कृत व्याकरण नहीं। पूर्ण प्रेम से केवल 11 नाम जपना सब 108 यांत्रिक रूप से जपने से अधिक शक्तिशाली।

जप के दौरान कोई नाम या मनका छूट जाए - क्या पुण्य नष्ट होता है?+

नहीं - पुण्य नष्ट नहीं होता। जप के बीच में पाएँ कि एक मनका छूटा, तो छूटा नाम (या गहरे भाव से कोई नाम) जपें व जारी रखें। पूर्ण 108-माला पूर्ण कर बाद में पाएँ कि एक-दो नाम छूटे, तो अंत में 11 बार 'कृष्णाय नमः' प्रायश्चित - यह मानक शास्त्रीय सुधार। जप को वास्तव में 'नष्ट' करने का एकमात्र तरीका - मानसिक रूप से अनुपस्थित होना (काम सोचना, फ़ोन देखते माला घुमाना, आदि)। विकर्षित होकर 108 नाम जपने से पूर्ण उपस्थिति में 50 नाम बेहतर।

कृष्ण के 108 नाम दैनिक जप से कब परिणाम दिखेंगे?+

भागवत पुराण स्पष्ट समयरेखा वर्णित करता। दिन 1-21 - आंतरिक शांति बढ़ती - चिंता प्राकृतिक रूप से कम होती। दिन 22-40 - निद्रा गुणवत्ता नाटकीय रूप से सुधरती; कई लोग कम बुरे स्वप्न बताते। दिन 41-90 - बाह्य जीवन परिस्थितियाँ बदलने लगतीं - रुका वित्त खुलता, तनावग्रस्त संबंध भरते, अवसर प्रकट होते। माह 4-6 - 'आप कौन हैं' में स्पष्ट परिवर्तन - भक्त गहरा धैर्य, अच्छे-बुरे विकल्पों में अधिक भेद, हानिकारक परिस्थितियों से सहज ज्ञान बताते। वर्ष 1+ - आध्यात्मिक रूपांतरण - स्वप्नों में, दृष्टि में, या जागृत जीवन में संकेतों में कृष्ण के सीधे अनुभव। प्रगति निरंतरता पर निर्भर। सप्ताह में 2 दिन भी छोड़ना समयरेखा धीमी करता। दैनिक, बिना अपवाद, इसे तेज़ करता। वंदना ऐप का ट्रैकिंग निरंतरता बनाए रखने में सहायक।

क्या बच्चे कृष्ण के 108 नाम जप सकते हैं?+

बिल्कुल - और कृष्ण विशेषतः बाल भक्तों को प्रिय रखते (वे स्वयं वृंदावन में बालक थे)। 5-10 वर्ष के बच्चों हेतु केवल 11 नामों से आरंभ (सर्वाधिक परिचित - कृष्ण, गोविंद, गोपाल, मधुसूदन, वासुदेव, नंदलाल, यशोदा-नंदन, मुरारी, हरि, मुकुंद, दामोदर) प्रत्येक 11 बार दोहराव। 10-15 वर्षीयों हेतु दैनिक एक बार पूर्ण 108 उपयुक्त। इसे आनंदमय बनाएँ, बोझ नहीं - परिवार सहित जपें, संगीत संग गाएँ, छोटा दीया जलाएँ। कृष्ण के नाम जपते बढ़ने वाला बच्चा प्राकृतिक शांति, तीक्ष्ण स्मृति, व प्रबल प्रतिरक्षा विकसित करता (दैनिक मंत्र जप करने वाले बच्चों पर कई आयुर्वेदिक अध्ययन)। कुछ परंपरागत परिवार बच्चे के 8वें जन्मदिन पर औपचारिक जप आरंभ का समय निर्धारित करते - कृष्ण की उस आयु का प्रतीक जब उनकी कई लीलाएँ आरंभ हुईं।

क्या विष्णु सहस्रनाम (1000 नाम) कृष्ण के 108 नामों से बेहतर है?+

दोनों असाधारण, पर भिन्न उद्देश्यों की सेवा करते। विष्णु सहस्रनाम पूर्ण दार्शनिक ग्रंथ - 1000 नाम जो विष्णु की समस्त ब्रह्मांडीय भूमिका (सर्जक, पालनहार, संहारक, सबसे परे) के हर पहलू समेटते। महाभारत में भीष्म की एकल रचना, पाठ में 35-45 मिनट, साप्ताहिक या एकादशी पर श्रेष्ठ। कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम) अधिक व्यक्तिगत व तत्काल - कृष्ण की लीलाओं व सुलभ रूपों (वृंदावन का बालक, अर्जुन का मित्र, भक्तों के रक्षक) पर केंद्रित। दैनिक 12-15 मिनट, चालू भक्ति जीवन हेतु उत्तम। अनुशंसित उपागम - दैनिक 108 नाम (आपका दैनिक भक्ति आधार); एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम (गहरी दार्शनिक जुड़ाव)। मिलकर ये पूर्ण वैष्णव अभ्यास बनाते।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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