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अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) - महत्व और विधि
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अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) - महत्व और विधि

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

अधिक मास क्या है

अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास या मल मास भी कहते हैं, चंद्र व सौर वर्ष को संतुलित रखने हेतु हिंदू पंचांग में लगभग हर तीन वर्ष में एक बार जोड़ा जाने वाला अतिरिक्त चंद्र मास है। चूँकि चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है, इसलिए समय-समय पर एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है। यह पूरा मास भगवान विष्णु को समर्पित है, जिन्हें पुरुषोत्तम भी कहते हैं, जिन्होंने इसे स्वयं अपनाकर सर्वाधिक पवित्र बनाया कहा जाता है।

इसे पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं

चूँकि अतिरिक्त मास का कोई अधिष्ठाता देव नहीं था, इसे पहले अशुद्ध माना गया और मल मास कहा गया। परंपरा के अनुसार यह मास स्वयं को उपेक्षित अनुभव कर भगवान विष्णु से प्रार्थना करने गया, जिन्होंने इसे प्रेमपूर्वक अपना मानकर अपने नाम पर पुरुषोत्तम मास नाम दिया। उन्होंने इसे ऐसा आशीर्वाद दिया कि इस मास में किए गए पूजा, जप व दान का कई गुना पुण्य मिले। इसी कारण कभी अशुभ माना गया मास अब आध्यात्मिक साधना हेतु सबसे पवित्र मासों में गिना जाता है।

अधिक मास का महत्व

अधिक मास को सांसारिक उत्सव की बजाय आंतरिक शुद्धि का आदर्श समय माना जाता है। भक्ति के कार्य - भगवद् गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ, विष्णु के नामों का जप, व्रत व दान - सामान्य मासों की तुलना में कहीं अधिक फल देते माने जाते हैं। यह भौतिक प्रयासों से रुककर मन को ईश्वर की ओर मोड़ने का समय है, इसीलिए विवाह व गृह प्रवेश जैसे शुभ सांसारिक संस्कार सामान्यतः इस काल में टाले जाते हैं।

अधिक मास में पूजा विधि

अधिक मास में पूजा विधि

इस मास के लिए सरल, भक्तिपूर्ण दिनचर्या सर्वोत्तम है: 1. प्रातः जल्दी स्नान करें, आदर्श रूप से पवित्र जल में या उससे, और स्वच्छ वस्त्र पहनें। 2. भगवान विष्णु (या कृष्ण) की तुलसी पत्र, पीले पुष्प और घी के दीपक से पूजा करें। 3. तुलसी माला पर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या विष्णु नामों का 108 बार जप करें। 4. प्रतिदिन भगवद् गीता, विष्णु सहस्रनाम या विष्णु कथा का एक अंश पढ़ें। 5. एकादशी को और जितने दिन संभव हो उतने दिन व्रत रखें। 6. प्रत्येक दिन का समापन दान से करें, चाहे वह छोटा हो। अधिक मास का सटीक आरंभ व अंत वर्तमान पंचांग से पुष्टि करें, क्योंकि यह हर वर्ष नहीं आता।

जप, दान और परोपकार

दान अधिक मास का हृदय है। भक्त सामान्यतः अन्न, घी, वस्त्र, पुस्तकें और धन दान करते हैं, और दीपक तथा तैंतीस की संख्या में खीर या मालपुआ का दान अनेक परिवारों में प्रिय परंपरा है। विष्णु के नामों का निरंतर जप, जरूरतमंदों को भोजन कराना और गौ सेवा सभी आशीर्वाद को कई गुना करते माने जाते हैं। भाव यही है कि निःस्वार्थ दें और सच्चे मन से जपें, भक्ति के सिवा कुछ न चाहते हुए।

नियम - करें और न करें

करें: जप, पाठ व दान की दैनिक दिनचर्या रखें, सात्विक भोजन करें, सत्यनिष्ठ व विनम्र रहें, और दूसरों की सेवा करें। अनेक लोग पूरे मास का संकल्प लेते हैं।

न करें: विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्य जैसे बड़े सांसारिक संस्कार आरंभ न करें, और क्रोध, कटु वचन, तामसिक भोजन व आलस्य से बचें। इस मास का केंद्र भक्ति व शुद्धि है, भौतिक लाभ नहीं।

अधिक मास साधना के लाभ

अधिक मास साधना के लाभ

अधिक मास में सच्ची साधना पूर्व पापों को धोती, मन को शांत करती, आत्म-अनुशासन को दृढ़ करती और भगवान विष्णु की कृपा लाती मानी जाती है। चूँकि हर सत्कर्म का पुण्य कई गुना होता है, भक्त इसे एक दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर मानते हैं जिसमें एक ही मास में वर्षों की आंतरिक प्रगति की जा सकती है, श्रद्धा गहरी होती और सांसारिक लालसाओं से वैराग्य बढ़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अधिक मास क्या है?+

अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास या मल मास भी कहते हैं, चंद्र व सौर वर्ष को संतुलित करने हेतु लगभग हर तीन वर्ष में हिंदू पंचांग में जोड़ा जाने वाला अतिरिक्त चंद्र मास है। यह भगवान विष्णु को समर्पित है।

अधिक मास कितनी बार आता है?+

यह लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है, क्योंकि चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है, इसलिए इन्हें संतुलित रखने हेतु एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है। इसका समय वर्तमान पंचांग से पुष्टि करें।

इसे पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?+

परंपरा कहती है कि अतिरिक्त मास का कोई देव न था और इसे मल मास कहा जाता था, जब तक भगवान विष्णु ने इसे प्रेमपूर्वक अपना मानकर अपने नाम पर पुरुषोत्तम नाम न दिया और इसमें की गई हर पूजा को कई गुना पुण्य का आशीर्वाद न दिया।

अधिक मास में क्या करना चाहिए?+

विष्णु के नामों का जप करें, भगवद् गीता व विष्णु सहस्रनाम पढ़ें, एकादशी का व्रत रखें, और अन्न, घी, वस्त्र व धन जैसा दान दें। यह मास भक्ति, जप व निःस्वार्थ दान के लिए है।

अधिक मास में विवाह क्यों टाले जाते हैं?+

अधिक मास सांसारिक उत्सव की बजाय आंतरिक शुद्धि व भक्ति के लिए है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश व नए कार्य जैसे शुभ संस्कार सामान्यतः किसी सामान्य मास तक टाल दिए जाते हैं।

अधिक मास में उपासना के क्या लाभ हैं?+

चूँकि हर सत्कर्म का पुण्य कई गुना माना जाता है, इस मास में सच्ची उपासना, जप व दान पूर्व पापों को दूर करते, मन को शांत करते, अनुशासन दृढ़ करते और भगवान विष्णु की कृपा लाते कहे जाते हैं।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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