कार्तिक मास क्या है
कार्तिक मास हिंदू चंद्र पंचांग का आठवाँ मास है और लगभग अक्टूबर और नवंबर में पड़ता है। यह व्यापक रूप से सभी मासों में सबसे पवित्र माना जाता है, विशेषकर भगवान विष्णु को उनके स्नेहमय दामोदर रूप में और देवी तुलसी को प्रिय। पूरा मास पवित्र स्नान, दीप अर्पण व भक्ति से भरा रहता है, और इसमें हिंदू वर्ष के कुछ सबसे प्रिय पर्व आते हैं।
कार्तिक सबसे पवित्र मास क्यों है
कार्तिक पवित्र है क्योंकि भगवान विष्णु इसी मास में देव उठनी एकादशी को अपनी योगनिद्रा से जागते कहे जाते हैं, जो शुभ कार्यों के पुनः आरंभ का संकेत है। यह कृष्ण की दामोदर लीला और तुलसी के भगवान विष्णु (शालिग्राम) से दिव्य विवाह से भी जुड़ा है। कार्तिक में भक्ति के छोटे कार्य भी - एक दीप, एक पवित्र स्नान, एक छंद का जप - अपार पुण्य देते माने जाते हैं, इसीलिए शास्त्र इसकी इतनी महिमा गाते हैं।
कार्तिक के प्रमुख पर्व
कार्तिक में अनेक सबसे प्रिय पर्व आते हैं: 1. करवा चौथ - विवाहित स्त्रियों द्वारा पति की दीर्घायु हेतु रखा जाने वाला व्रत। 2. धनतेरस, दिवाली और गोवर्धन पूजा - प्रकाश व लक्ष्मी पूजा का महान पर्व। 3. भाई दूज - भाई-बहन के स्नेह का उत्सव। 4. देव उठनी एकादशी और तुलसी विवाह - विष्णु का जागरण व तुलसी का पवित्र विवाह। 5. कार्तिक पूर्णिमा और देव दिवाली - मास का दीप्तिमय समापन। सटीक तिथियाँ वर्तमान पंचांग से अवश्य मिला लें, क्योंकि ये हर वर्ष बदलती हैं।
कार्तिक स्नान और दीपदान

दो अभ्यास कार्तिक को परिभाषित करते हैं। कार्तिक स्नान सूर्योदय से पूर्व प्रातःकालीन पवित्र स्नान है, जो नदी, तालाब या घर में ही कुछ बूँद पवित्र जल से, विष्णु के नाम जपते हुए किया जाता है। दीपदान दीपों का अर्पण है - भक्त घी या तेल के दीप जलाकर संध्या को मंदिरों, नदियों और तुलसी पौधे के पास रखते या प्रवाहित करते हैं। दोनों सरल हैं पर पूरे वर्ष के सबसे पुण्यदायी कार्यों में माने जाते हैं।
कार्तिक में तुलसी पूजा
कार्तिक तुलसी माँ का मास है, जो भगवान विष्णु की प्रिय हैं। भक्त प्रतिदिन तुलसी पौधे को जल देते, हर संध्या उसके पास दीप जलाते, और प्रार्थना व परिक्रमा करते हैं। मास का समापन तुलसी विवाह में होता है, तुलसी का शालिग्राम (विष्णु) से विधिवत विवाह, जो हिंदू विवाह ऋतु का आरंभ करता है। कार्तिक में तुलसी की देखभाल व पूजा घर में स्वास्थ्य, सामंजस्य और विष्णु की कृपा लाती मानी जाती है।
कार्तिक नियम - पालनीय नियम
करें: कार्तिक स्नान हेतु सूर्योदय से पूर्व उठें, विष्णु व तुलसी के लिए प्रतिदिन दीप जलाएँ, विष्णु सहस्रनाम या भगवद् गीता पढ़ें, सात्विक भोजन करें और दान दें। अनेक भक्त मास भर भूमि पर शयन करते और संयम रखते हैं।
बचें: मांसाहार, प्याज, लहसुन, मद्य और अनेक परंपराओं में बैंगन व कुछ दालों से। क्रोध व कटु वचन से बचें, और प्रातः स्नान न छोड़ें। सरलता व भक्ति कार्तिक नियम का भाव हैं।
कार्तिक उपासना के लाभ

कार्तिक भर उपासना तन-मन को शुद्ध करती, पूर्व पापों को दूर करती और स्वास्थ्य, समृद्धि व विष्णु की रक्षा लाती मानी जाती है। कार्तिक स्नान, दीपदान व तुलसी सेवा अपनी सरलता से कहीं अधिक पुण्य देते कहे जाते हैं, और मास का कोमल अनुशासन भक्तों को अधिक शांत, कृतज्ञ और ईश्वर के निकट छोड़ता है जब प्रकाश की उत्सव ऋतु खिलती है।
पाठकों के प्रश्न
कार्तिक मास किन महीनों में पड़ता है?+
कार्तिक आठवाँ हिंदू चंद्र मास है और लगभग अक्टूबर और नवंबर में पड़ता है। सटीक तिथियाँ हर वर्ष बदलती हैं, इसलिए इन्हें वर्तमान पंचांग से पुष्टि करें।
कार्तिक को सबसे पवित्र मास क्यों कहते हैं?+
भगवान विष्णु कार्तिक में देव उठनी एकादशी को योगनिद्रा से जागते कहे जाते हैं, और यह मास तुलसी विवाह व कृष्ण की दामोदर लीला से जुड़ा है। भक्ति के छोटे कार्य भी अपार पुण्य देते माने जाते हैं।
कार्तिक स्नान क्या है?+
कार्तिक स्नान सूर्योदय से पूर्व नदी, तालाब या घर में पवित्र जल से, विष्णु के नाम जपते हुए लिया जाने वाला प्रातःकालीन पवित्र स्नान है। यह वर्ष के सबसे पुण्यदायी अभ्यासों में माना जाता है।
कार्तिक में दीपदान क्या है?+
दीपदान कार्तिक में दीपों का अर्पण है। भक्त संध्या को घी या तेल के दीप जलाकर मंदिरों, नदियों और तुलसी पौधे के पास रखते या प्रवाहित करते हैं, यह कार्य महान पुण्य लाता और अंधकार दूर करता माना जाता है।
कार्तिक में तुलसी की पूजा क्यों होती है?+
तुलसी भगवान विष्णु की प्रिय हैं, और कार्तिक का समापन तुलसी विवाह में होता है, शालिग्राम से उनका पवित्र विवाह। कार्तिक में तुलसी को जल देना, दीप जलाना व पूजा करना स्वास्थ्य, सामंजस्य व विष्णु की कृपा लाता है।
कार्तिक मास में कौन से पर्व आते हैं?+
कार्तिक में करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, देव उठनी एकादशी, तुलसी विवाह, कार्तिक पूर्णिमा और देव दिवाली आते हैं। यह हिंदू उत्सव वर्ष के सबसे समृद्ध मासों में एक है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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