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कृष्ण आरती के बोल हिंदी और अंग्रेज़ी में - आरती कुंज बिहारी की
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कृष्ण आरती के बोल हिंदी और अंग्रेज़ी में - आरती कुंज बिहारी की

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित मार्च 17, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

कृष्ण आरती में इतनी प्रसन्नता क्यों

सभी हिंदू आरतियों में, कृष्ण की आरतियाँ अनूठी मधुरता वहन करतीं - वे केवल भक्तिपरक नहीं बल्कि आनंदमयी, चंचल, गीतात्मक। कृष्ण स्वयं माधुर्य के देवता।

सर्वाधिक सार्वभौमिक कृष्ण आरती 'आरती कुंज बिहारी की' - शताब्दियों पहले रचित, कृष्ण के वृंदावन-बिहारी रूप का गायन। भारत के हर कृष्ण मंदिर में गाई जाती।

संरचना - 5 मुख्य छंद + आरंभ + समापन। हर छंद भिन्न पहलू का गायन - बंसी बजाना, मोरपंख मुकुट, पीताम्बर, वनमाला, गोपियों के साथ नृत्य। कुल अवधि - सही ढंग से गाने पर 4-5 मिनट।

इस आरती की विशेषता - यह पैन-इंडियन एकीकृत आरती - कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक ही ढंग से गाई जाती।

सबसे गहरी पंक्ति - 'गले में वैजयंती माला, बजे मुरलिया मधुर रसाला।'

कृष्ण आरती - पूर्ण हिंदी बोल

आरती कुंज बिहारी की। श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

गले में बैजंती माला। बजावै मुरली मधुर बाला॥ श्रवण में कुंडल झलकाला। नंद के आनंद नंद लाला॥

गगन सम अंग कांति काली। राधिका चमक रही आली॥ लतन में ठाढ़े बनमाली।

कनकमय मोर मुकुट बिलसै। देवता दर्शन को तरसै॥

जहाँ तें प्रकट भई गंगा। सकल मन हारिणि श्री गंगा॥

चमकती उज्ज्वल तट रेणू। बज रही वृंदावन बेणू॥

कृष्ण आरती - अंग्रेज़ी अनुवाद व अर्थ

कोरस - 'आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।'

कोरस तीन सबसे प्रिय नाम आह्वानित करता -

  • कुंज बिहारी - वृंदावन के कुंजों के चंचल भ्रमणकर्ता
  • गिरिधर - गोवर्धन उठाने वाले ब्रह्मांडीय रक्षक
  • मुरारी - मुर राक्षस के नाशक योद्धा

एक पंक्ति में, कृष्ण की तीन भूमिकाएँ - प्रेमी, रक्षक, योद्धा।

छंद 1 - 'गले में वैजयंती माला, बंसी मधुर बजे, कानों में कुंडल झलकाते, नंद के आनंद नंदलाल।'

छंद 2 - कृष्ण रूप व राधा - शरीर श्यामा, राधा चमक रहीं, लताओं में खड़े वनमाली।

छंद 3 - मुकुट व ब्रह्मांडीय पूजा - सुनहरी मोरपंख मुकुट, देव दर्शन को तरसते।

छंद 4 - गंगा व कृष्ण के चरण - गंगा कृष्ण के पाँव से प्रकट।

छंद 5 - वृंदावन व करुणा - कृष्ण की मुस्कान संसार को घोलती।

कृष्ण आरती कब गाएँ - सर्वोत्तम समय, दिन व विधि

कृष्ण आरती कब गाएँ - सर्वोत्तम समय, दिन व विधि

दिन के सर्वोत्तम समय - मंगला आरती (4:30-5:30 बजे), संध्या आरती (सूर्यास्त 6-7:30), शयन आरती (9-10 बजे रात), मध्याह्न (12 बजे)।

घर हेतु - प्रातः व संध्या।

सप्ताह के सर्वोत्तम दिन -

  • गुरुवार - विष्णु/कृष्ण का दिन
  • एकादशी - विष्णु/कृष्ण हेतु सर्वाधिक शक्तिशाली
  • कृष्ण जन्माष्टमी - पूर्ण विस्तारित आरती मध्यरात्रि
  • गोवर्धन पूजा, राधाष्टमी, तुलसी विवाह

घरेलू विधि - 1. स्नान, स्वच्छ वस्त्र (पीला/श्वेत बेहतर) 2. कृष्ण के सामने पूर्व/उत्तर मुख बैठें 3. फूल - पीला गेंदा, श्वेत चमेली, कमल, तुलसी (अनिवार्य) 4. चंदन तिलक 5. घी का दीया (सरसों नहीं) 6. माखन-मिश्री भोग अर्पित

कृष्ण के विशिष्ट नियम -

  • तुलसी अनिवार्य - हनुमान पूजा के विपरीत
  • घी का दीया - सरसों नहीं
  • पीले वस्त्र बेहतर
  • संगीत स्वागत - बंसी, हारमोनियम

जन्माष्टमी पर विशेष - मध्यरात्रि (12 बजे) आरती। झूला उपयोग। 56 भोग।

कृष्ण आरती के 9 आध्यात्मिक लाभ

1. मानसिक आनंद व अवसाद का निवारण - कृष्ण आनंद के देवता।

2. पारिवारिक संबंधों में मिठास - कृष्ण का परिवार आनंदमय अपनापन का आदर्श।

3. अकेलापन दूर - कुँवारों, विधवाओं, अकेले रहने वालों हेतु।

4. रोमांस व विवाह में सफलता - कृष्ण ब्रह्मांडीय प्रेमी।

5. संगीत व कलात्मक प्रतिभा वृद्धि।

6. बच्चों का कल्याण।

7. वासना से शुद्ध प्रेम तक।

8. नकारात्मक प्रभावों से रक्षा।

9. मोक्ष का सीधा मार्ग।

16-दिन का वचन - लगातार 16 दिन सूर्यास्त पर कृष्ण आरती गाएँ - एक विशिष्ट इच्छा पूरी होगी।

बचने योग्य सामान्य गलतियाँ

1. तुलसी न चढ़ाना - सबसे बड़ी गलती। कृष्ण को बिना तुलसी अपूर्ण।

2. सरसों तेल - हनुमान/शनि हेतु। कृष्ण को घी।

3. बिना धुन गाना - कृष्ण संगीत स्वागत करते।

4. गुरुवार को काला - पीला कृष्ण का रंग।

5. भोग में दुग्ध न होना - माखन/दूध/मिश्री।

6. कोरस पुनरावृत्ति छोड़ना - हर छंद के बीच।

7. जन्माष्टमी को मांसाहार।

8. आरती में जल्दबाज़ी।

9. परिवार के बिना अकेले गाना।

10. घंटी न बजाना।

कृष्ण आरती को अपना आनंदमय दैनिक अभ्यास बनाएँ

कृष्ण आरती को अपना आनंदमय दैनिक अभ्यास बनाएँ

कृष्ण आरती हिंदू आरतियों में अनूठी - शुद्ध आनंद भक्ति से मिलता। आधुनिक जीवन में यह छोटा उपहार नहीं।

तीन प्रतिबद्धता स्तर -

  • स्तर 1 - साप्ताहिक (गुरुवार + एकादशी)
  • स्तर 2 - दैनिक संध्या
  • स्तर 3 - दिन में दो बार समर्पित

अंतिम चिंतन - जब ब्रह्मांडीय वन में कृष्ण की बंसी बजती, हर गोपी अपना काम छोड़ संगीत की ओर दौड़ती। आरती आपका दैनिक 'सब छोड़कर कृष्ण की ओर दौड़ने' का क्षण।

जय श्री कृष्ण। राधे राधे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कृष्ण को रोज़ तुलसी चढ़ा सकता हूँ?+

हाँ - तुलसी कृष्ण पूजा हेतु अनिवार्य। दैनिक ताज़ा तुलसी पत्र अर्पित। तोड़ने के नियम - रविवार, एकादशी, या सूर्यास्त के बाद कभी नहीं।

कृष्ण आरती व विष्णु आरती में क्या अंतर?+

कृष्ण विष्णु के 8वें अवतार। 'आरती कुंज बिहारी की' कृष्ण के वृंदावन-बिहारी रूप विशिष्ट। 'ॐ जय जगदीश हरे' सामान्य विष्णु आरती।

कृष्ण आरती का सर्वोत्तम समय?+

सूर्यास्त (संध्या, 6-7:30) सबसे लोकप्रिय व ऊर्जात्मक रूप संरेखित समय।

क्या बच्चे कृष्ण आरती गा सकते?+

बिल्कुल हाँ - कृष्ण स्वयं दिव्य बालक थे। 4-5 वर्ष की आयु से बच्चों को सिखाएँ।

क्या विशेष कृष्ण मूर्ति या चित्र चाहिए?+

कोई भी कृष्ण रूप काम करता - बाल गोपाल, कुंज बिहारी, गोविंदा, राधा-कृष्ण। मुद्रित चित्र भी पर्याप्त - महत्व आपकी भक्ति का, मूर्ति के मूल्य का नहीं।

क्या गैर-हिंदू कृष्ण आरती गा सकते?+

कृष्ण की कृपा की कोई धार्मिक सीमा नहीं। एकमात्र आवश्यकता - ईमानदार प्रेम, वंशावली नहीं।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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