लक्ष्मी आरती – ॐ जय लक्ष्मी माता परिचय
लक्ष्मी आरती 'ॐ जय लक्ष्मी माता' माँ लक्ष्मी को समर्पित सबसे प्रसिद्ध आरती है। लक्ष्मी जी धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी हैं।
लक्ष्मी आरती हिंदी में – पूरे बोल
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
लक्ष्मी आरती अंग्रेजी में
यह लक्ष्मी आरती का English transliteration है।
लक्ष्मी आरती का सरल अर्थ

लक्ष्मी आरती में कहा गया है कि माँ लक्ष्मी सुख, संपत्ति और समृद्धि देती हैं। जिस घर में वे विराजती हैं, वहां सब सद्गुण आते हैं।
लक्ष्मी आरती के फायदे
लक्ष्मी आरती से धन-समृद्धि बढ़ती है, आर्थिक समस्याएं कम होती हैं, और घर में सुख-शांति रहती है।
लक्ष्मी आरती विधि – शुक्रवार और दिवाली के लिए संपूर्ण विधि
लक्ष्मी आरती विधि:
सामग्री: पीतल या चांदी की थाली, पाँच बाती का घी का दीपक, कमल के फूल या गुलाब, सिक्का, मिठाई (खीर या पेड़ा), पीला कपड़ा, कपूर और अगरबत्ती।
शुक्रवार लक्ष्मी आरती विधि: 1. सूर्यास्त से पहले घर को अच्छी तरह साफ करें - माँ लक्ष्मी अशुद्ध घरों में नहीं आतीं। 2. स्नान करके पीले या गुलाबी वस्त्र पहनें। 3. मूर्ति के सामने 5 घी के दीपक जलाएं। 4. एक सिक्का और अक्षत (चावल) मूर्ति के सामने रखें। 5. दोनों हाथों से कमल या गुलाब अर्पित करें। 6. कपूर जलाकर आरती शुरू करें। पूरे समय घंटी बजाएं। 7. थाली को चरणों पर 7 बार, उदर पर 7 बार, और मुख पर 7 बार गोलाकार घुमाएं। 8. परिवार के सभी सदस्यों को आरती दें। 9. खीर या मिसरी प्रसाद के रूप में चढ़ाएं। 10. आरती के दौरान मुख्य द्वार खुला रखें - माँ लक्ष्मी खुले द्वार से प्रवेश करती हैं।
दिवाली: दिवाली की रात घर के हर कोने में दीपक जलाने के बाद आरती करें। आरती के बाद लक्ष्मी बीज मंत्र 108 बार जपें। रात भर मुख्य द्वार रोशन रखें।
समृद्धि के लिए शक्तिशाली लक्ष्मी मंत्र

लक्ष्मी आरती के साथ इन मंत्रों का जप करने से आशीर्वाद कई गुना बढ़ जाता है:
लक्ष्मी बीज मंत्र: ॐ श्रीं श्रियै नमः। प्रतिदिन 108 बार जपें - लाल या गुलाबी माला पर। 'श्रीं' माँ लक्ष्मी का बीज मंत्र है।
महालक्ष्मी मंत्र: ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्॥ यह गायत्री शैली का मंत्र माँ लक्ष्मी को विष्णु की पत्नी के रूप में आमंत्रित करता है। दीर्घकालिक समृद्धि के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली।
कनकधारा मंत्र: वंदे वंदारु मंदारं, इंदिरानंद कंदलम्। आमंद सुंदर श्यामं, त्रिभुवन मंगलं हरिम्॥ आदि शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र से यह मंत्र स्वर्ण की वर्षा (प्रतीकात्मक: समृद्धि) का आह्वान करता है। हर शुक्रवार 11 बार जपें।
सावधानी: मंत्र तभी फलते हैं जब सही कर्म के साथ जपे जाएं। माँ लक्ष्मी परिश्रमी, ईमानदार और उदार लोगों को आशीर्वाद देती हैं।
निष्कर्ष – माँ लक्ष्मी को अपने जीवन के हर कोने में आमंत्रित करें
लक्ष्मी आरती 'ॐ जय लक्ष्मी माता' भारत की सबसे प्रिय समृद्धि-प्रार्थना है। इसके शब्द केवल कविता नहीं - वे देवी के ब्रह्मांडीय स्वरूप का सटीक वर्णन हैं: उमा, रमा और ब्रह्माणी के रूप में उनकी एकता; ऋद्धि-सिद्धि देने की उनकी शक्ति; और यह वचन कि जिस घर में वे प्रवेश करती हैं, वह पुण्य और आनंद का स्थान बन जाता है।
इस आरती का मुख्य संदेश यह है कि माँ लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं हैं। वे स्वास्थ्य, रिश्ते, ज्ञान, संतोष और वित्तीय समृद्धि - सभी प्रकार की समृद्धि की देवी हैं।
नियमित अभ्यास: हर शुक्रवार शाम घर साफ करें, 5 घी दीपक जलाएं, पूरी आरती गाएं, बीज मंत्र 108 बार जपें, और खीर चढ़ाएं। दिवाली 2026 (20 अक्टूबर) पर पूर्ण लक्ष्मी पूजा विधि के साथ करें।
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भक्तों के सामान्य प्रश्न
लक्ष्मी आरती कब गानी चाहिए?+
लक्ष्मी आरती शुक्रवार को और दिवाली पर ज़रूर गाएं। रोज़ शाम की पूजा में भी गा सकते हैं।
क्या लक्ष्मी आरती रोज़ गा सकते हैं?+
हाँ! रोज़ लक्ष्मी आरती गाने से घर में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
लक्ष्मी आरती में क्या चढ़ाना चाहिए?+
कमल के फूल, गुलाब, मिठाई, फल, और सिक्के चढ़ाएं। घी का दीपक जलाएं।
लक्ष्मी पूजा के लिए कौन सा दिन सबसे अच्छा है?+
शुक्रवार माँ लक्ष्मी का दिन है। दिवाली, धनतेरस, और शरद पूर्णिमा भी बहुत शुभ हैं।
क्या लक्ष्मी आरती गाने से सच में धन आता है?+
लक्ष्मी आरती सकारात्मक ऊर्जा पैदा करती है। मेहनत और भक्ति के साथ यह समृद्धि के द्वार खोलती है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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