गणेश आरती – जय गणेश देवा परिचय
गणेश आरती 'जय गणेश जय गणेश देवा' हिंदू धर्म की सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है।
गणेश आरती हिंदी में – पूरे बोल
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दन्त दयावन्त, चार भुजा धारी। माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी॥
पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
गणेश आरती अंग्रेजी में
यह गणेश आरती का English transliteration है।
गणेश आरती का सरल अर्थ

गणेश आरती का अर्थ है – गणेश जी की जय हो, जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं। वे दयालु हैं और सभी की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
गणेश आरती के फायदे
गणेश आरती से सभी विघ्न दूर होते हैं, बुद्धि बढ़ती है, और घर में सुख-समृद्धि आती है।
गणेश आरती कैसे करें
गणेश जी की मूर्ति के सामने बैठें, दीपक जलाएं, लड्डू का भोग लगाएं, दूर्वा और लाल फूल चढ़ाएं, और पूरी भक्ति से आरती गाएं।
गणेश चतुर्थी 2026 – कैसे मनाएं और आरती कैसे करें

गणेश चतुर्थी 2026 22 अगस्त 2026 को है (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी)। यह 10 दिन का महोत्सव 1 सितंबर 2026 (अनंत चतुर्दशी) पर विसर्जन के साथ समाप्त होता है।
घर पर गणेश चतुर्थी कैसे मनाएं:
- 21 अगस्त को पूजा स्थान साफ करके गेंदे के फूलों और आम के पत्तों से सजाएं।
- 22 अगस्त को मिट्टी की गणेश मूर्ति लाएं। लाल कपड़े पर स्थापित करें।
- सुबह की आरती (षोडशोपचार पूजा): 16 चरणों में पूजा करें - आवाहन से नमस्कार तक। फिर पूरी गणेश आरती गाएं।
- शाम की आरती: सूर्यास्त पर पूरे परिवार के साथ गणेश आरती गाएं।
- 1.5, 3, 5, 7, या 10 दिन तक अपनी परंपरा के अनुसार पूजा जारी रखें।
- अंतिम दिन प्राकृतिक जलाशय के पास विसर्जन करें, या पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन के लिए घर में बाल्टी का उपयोग करें।
संकट चौथ: हर महीने संकष्टी चतुर्थी पर सूर्यास्त पर गणेश आरती और चंद्रोदय के बाद दर्शन विशेष फलदायक है।
आरती के साथ जपने के लिए आवश्यक गणेश मंत्र
आरती के साथ इन मंत्रों का जप करें:
वक्रतुण्ड महाकाय: वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥ अर्थ: हे वक्रतुण्ड महाकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी - मेरे सभी कार्यों को सदा विघ्न-मुक्त करो। कोई भी नया कार्य, परीक्षा, साक्षात्कार या यात्रा शुरू करने से पहले इसे जपें।
गणेश मूल मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः। प्रतिदिन 108 बार जपें। 'गं' गणेश का बीज मंत्र है जो बाधाओं को जड़ से दूर करता है।
सिद्धि विनायक मंत्र: ॐ नमो सिद्धि विनायक। सर्व कार्य कर्त्रे सर्व विघ्न प्रशमनाय। यह मंत्र व्यापार, रिश्तों और दीर्घकालिक लक्ष्यों में सफलता के लिए जपा जाता है।
एकदन्त मंत्र (सोने से पहले): गणपतिर्विघ्नराजो, लम्बतुण्डो गजाननः। द्वैमातुरश्च हेरम्ब, एकदन्तश्च विघ्नहा॥ सोने से पहले यह मंत्र जपने से गणेश जी की सुरक्षात्मक ऊर्जा रात भर आपके साथ रहती है।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
गणेश आरती कब गानी चाहिए?+
गणेश आरती हर पूजा की शुरुआत में गानी चाहिए। बुधवार को विशेष महत्व है। गणेश चतुर्थी पर भी ज़रूर गाएं।
गणेश आरती के बोल क्या हैं?+
गणेश आरती 'जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा' से शुरू होती है।
क्या बच्चे गणेश आरती गा सकते हैं?+
हाँ! बच्चों को गणेश आरती में ज़रूर शामिल करना चाहिए। इससे उन्हें संस्कृति और भक्ति सिखाई जाती है।
क्या गणेश आरती रोज़ गा सकते हैं?+
बिल्कुल! रोज़ गणेश आरती गाने से आशीर्वाद मिलता है, बाधाएं दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
गणेश आरती में क्या चढ़ाना चाहिए?+
लड्डू/मोदक (गणेश जी का प्रिय), दूर्वा घास, लाल फूल और सिंदूर चढ़ाएं। घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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