दुर्गा आरती – अम्बे तू है जगदम्बे काली
दुर्गा आरती 'अम्बे तू है जगदम्बे काली' माँ दुर्गा को समर्पित सबसे शक्तिशाली आरती है।
दुर्गा आरती हिंदी में – पूरे बोल
आरती जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी॥
दुर्गा आरती का सरल अर्थ
दुर्गा आरती में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों का वर्णन है। वे सर्वशक्तिमान हैं और भक्तों के दुख हरती हैं।
दुर्गा आरती के फायदे

दुर्गा आरती से बुरी शक्तियों से रक्षा होती है, साहस बढ़ता है, और जीवन की समस्याओं से लड़ने की शक्ति मिलती है।
दुर्गा आरती विधि – सही तरीके से कैसे करें
दुर्गा आरती विधि:
तैयारी: स्नान करके लाल या नारंगी वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करें। माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र लाल कपड़े पर स्थापित करें। घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं। लाल गुड़हल के फूल, धूपबत्ती, कपूर और घंटी रखें।
आरती विधि: 1. दीपक जलाकर आरती थाली दोनों हाथों से पकड़ें। 2. घंटी बजाते हुए आरती गाएं - यह स्थान को पवित्र करती है। 3. आरती थाली को माँ के चरणों से शुरू करके, पेट, छाती और चेहरे तक गोलाकार (दक्षिणावर्त) घुमाएं। हर भाग पर 7 बार। 4. अंत में थाली देवी के सामने रखकर मौन प्रार्थना करें। 5. परिवार के सभी सदस्यों को आरती दें। 6. भोग (प्रसाद) - फल, मिठाई, या खीर - अर्पित करें।
समय: सुबह ब्रह्म मुहूर्त (4–6 बजे) या शाम संध्या (6–7 बजे) सबसे उत्तम है। नवरात्रि में सुबह-शाम दोनों समय आरती करें।
विशेष अवसरों पर दुर्गा आरती – नवरात्रि 2026
दुर्गा आरती के विशेष अवसर:
नवरात्रि 2026: शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक है। नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। हर दिन आरती का विशेष महत्व है:
- प्रथमा: माँ शैलपुत्री - सूर्योदय पर आरती
- अष्टमी: माँ महागौरी - हवन और सांध्य आरती
- नवमी: माँ सिद्धिदात्री - नवरात्रि की पूर्णाहुति
मंगलवार: हर मंगलवार माँ दुर्गा के लिए विशेष है। लाल दीया जलाकर आरती करें।
शुक्रवार: शक्ति को समर्पित। हर शुक्रवार दुर्गा आरती करें।
अमावस्या और पूर्णिमा: ये तिथियाँ शक्ति पूजा के लिए अत्यंत शुभ हैं।
मंदिर दर्शन: वैष्णो देवी, विंध्यवासिनी देवी जैसे मंदिरों में सुबह 6 बजे, दोपहर 12 बजे और शाम 7 बजे आरती होती है। समूह आरती में शामिल होने से अत्यधिक पुण्य मिलता है।
दुर्गा आरती में होने वाली गलतियाँ और सुधार

दुर्गा आरती में होने वाली सामान्य गलतियाँ:
1. बहुत तेज या बुदबुदाते हुए गाना: आरती एक प्रार्थना है - धीमे, भक्तिभाव से गाएं। शब्दों का अर्थ समझते हुए गाएं।
2. कुछ पंक्तियाँ छोड़ना: दुर्गा आरती की हर पंक्ति माँ दुर्गा के एक रूप का वर्णन करती है। कोई भी पंक्ति न छोड़ें।
3. घंटी न बजाना: घंटी की ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है। छोटी, मधुर घंटी का प्रयोग करें।
4. एक हाथ से थाली पकड़ना: आरती थाली हमेशा दोनों हाथों से पकड़ें।
5. देवी की ओर पीठ करना: हमेशा देवी की मूर्ति या चित्र के सामने खड़े रहें।
6. बीच में रुकावट: एक बार आरती शुरू होने के बाद, बिना कारण न रोकें।
7. गंदी या टूटी थाली: ताँबे या चाँदी की साफ थाली का प्रयोग करें।
8. प्रसाद न चढ़ाना: आरती के बाद भोग अर्पित करना आवश्यक है - कम से कम एक फल या मिठाई।
निष्कर्ष – दुर्गा आरती को अपनी दैनिक सुरक्षा बनाएं
दुर्गा आरती 'जय अम्बे गौरी' केवल एक गीत नहीं है - यह दिव्य शक्ति का आह्वान है। सही विधि और भक्तिभाव से गाने पर यह नकारात्मकता से सुरक्षा और आशीर्वाद प्राप्ति का शक्तिशाली माध्यम बन जाती है।
इस आरती की आठ पंक्तियाँ माँ दुर्गा के सम्पूर्ण दिव्य स्वरूप का वर्णन करती हैं - उनका वाहन (सिंह), उनके अस्त्र (तलवार और खप्पर), उनकी भूमिका (महिषासुर का वध), त्रिमूर्ति से संबंध, और जगत माता का सर्वोच्च स्थान।
दुर्गा आरती को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं - विशेषकर मंगलवार और शुक्रवार को। शारदीय नवरात्रि 2026 (29 सितंबर – 7 अक्टूबर) में नौ दिन सुबह-शाम आरती करने का संकल्प लें।
ऑडियो आरती, नवरात्रि पूजा रिमाइंडर और दुर्गा चालीसा के लिए Vandnaa App डाउनलोड करें।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
दुर्गा आरती कब गानी चाहिए?+
दुर्गा आरती नवरात्रि में हर दिन गाएं। मंगलवार और शुक्रवार को भी गा सकते हैं।
क्या पुरुष दुर्गा आरती गा सकते हैं?+
हाँ! दुर्गा आरती सभी गा सकते हैं – पुरुष, महिलाएं और बच्चे।
दुर्गा आरती में क्या चढ़ाना चाहिए?+
लाल फूल, चुनरी, नारियल, हलवा-पूरी, और सिंदूर चढ़ाएं।
क्या दुर्गा आरती और अम्बे आरती एक ही है?+
हाँ, 'आरती जय अम्बे गौरी' सबसे लोकप्रिय दुर्गा आरती है। अम्बे माँ दुर्गा का ही नाम है।
क्या दुर्गा आरती सुनने से भी लाभ मिलता है?+
हाँ! भक्ति से दुर्गा आरती सुनने से भी आशीर्वाद मिलता है। Vandnaa App पर कभी भी सुनें।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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