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अक्षय तृतीया 2026: तिथि, पूजा विधि, मंत्र और क्यों यह वर्ष का सबसे शुभ दिन है
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अक्षय तृतीया 2026: तिथि, पूजा विधि, मंत्र और क्यों यह वर्ष का सबसे शुभ दिन है

10 मिनट पढ़ेंअद्यतन फ़रवरी 18, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

क्यों अक्षय तृतीया को 'वर्ष का सबसे शुभ दिन' कहा जाता है

वर्ष में एक दिन ऐसा आता है जब ग्रह, शास्त्र और संत - सब एक ही बात कहते हैं: इस दिन जो भी करोगे वह बढ़ता ही जाएगा, घटेगा कभी नहीं।

वह दिन है - अक्षय तृतीया

'अक्षय' का अर्थ है 'जिसका कभी क्षय न हो'। धन हो, ज्ञान हो, भक्ति हो या पुण्य - इस दिन जो भी आरंभ, दान या निवेश किया जाए, उसका फल कभी समाप्त नहीं होता।

अक्षय तृतीया 2026 सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को है। तृतीया तिथि 20 अप्रैल को सुबह 5:31 बजे से शुरू होकर 21 अप्रैल को रात 2:12 बजे समाप्त होगी। पूजा और सोना खरीदने का सबसे शुभ मुहूर्त 20 अप्रैल को सुबह 5:51 से दोपहर 12:18 तक है।

यह दिन कई कारणों से विशेष है। आज ही भगवान परशुराम (विष्णु के छठे अवतार) का जन्म हुआ था। त्रेता युग का आरंभ इसी दिन हुआ। माँ गंगा का धरती पर अवतरण भी अक्षय तृतीया को हुआ। सुदामा और कृष्ण की भेंट इसी दिन हुई और सुदामा की गरीबी सदा के लिए मिट गई। महर्षि व्यास ने महाभारत का श्रीगणेश से लेखन इसी तिथि से आरंभ किया।

इस लेख में हम जानेंगे - सही पूजा विधि, सबसे प्रभावी लक्ष्मी मंत्र, सोना खरीदने का सही समय, और 7 ऐसे कार्य जो हर हिंदू घर में आज के दिन अवश्य होने चाहिए।

🙏 मुहूर्त चूकिए नहीं - वंदना ऐप में मुफ्त अक्षय तृतीया रिमाइंडर सेट करें ताकि पूजा का अलार्म ठीक शुभ समय पर बजे।

अक्षय तृतीया 2026 - सटीक तिथि, मुहूर्त और शुभ समय

इन समयों को ध्यान से नोट करें - मुहूर्त ही आशीर्वाद की शक्ति तय करता है।

📅 तिथि: सोमवार, 20 अप्रैल 2026 🕒 तृतीया प्रारंभ: 20 अप्रैल 2026, सुबह 5:31 🕒 तृतीया समाप्त: 21 अप्रैल 2026, रात 2:12

पूजा और सोना खरीदने का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 5:51 से दोपहर 12:18 तक (20 अप्रैल) अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:54 से दोपहर 12:46 तक प्रदोष काल पूजा: शाम 6:48 से रात 8:55 तक

सोमवार होने से और भी शक्तिशाली: इस वर्ष अक्षय तृतीया सोमवार को है - भगवान शिव का दिन। विष्णु-लक्ष्मी पूजा + शिव का दिन = ज्योतिषाचार्य इसे 'महाभाग्य योग' कहते हैं। यह संयोग पिछली बार 2015 में आया था।

राहु काल में क्या न करें (सुबह 7:30 – 9:00): इस दिन भी राहु काल में सोना न खरीदें, न ही कोई नया कार्य आरंभ करें। 9:30 के बाद ही जौहरी के पास जाएं।

घर पर अक्षय तृतीया पूजा विधि - चरण दर चरण

पंडित की आवश्यकता नहीं। यह पूरी विधि घर का कोई भी सदस्य 25–30 मिनट में कर सकता है।

आवश्यक सामग्री:

  • लक्ष्मी-नारायण (या लक्ष्मी-गणेश) की छोटी मूर्ति या चित्र
  • पीला वस्त्र, अक्षत (चावल), कुमकुम, हल्दी, चंदन
  • पीले फूल (गेंदा श्रेष्ठ), तुलसी पत्ते
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • ताँबे/चाँदी का सिक्का या सोने का छोटा टुकड़ा
  • दीया, अगरबत्ती, नैवेद्य (मिठाई, फल, मेवा)
  • शंख, घंटी

चरण 1 - स्नान व संकल्प (सुबह 5:30–6:00): सूर्योदय से पहले उठें। स्नान कर पीले या श्वेत वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर पूर्व मुख होकर बैठें और संकल्प लें - 'आज अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर मैं श्रद्धा से लक्ष्मी-नारायण की पूजा करता/करती हूँ और परिवार के लिए अक्षय आशीर्वाद की प्रार्थना करता/करती हूँ।'

चरण 2 - मूर्ति स्थापना: चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति रखें। मूर्ति के सामने ताँबे की थाली में सोने का सिक्का रखें।

चरण 3 - अभिषेक: मूर्ति को पंचामृत से, फिर शुद्ध जल से स्नान कराएँ। साफ कपड़े से धीरे से पोंछें।

चरण 4 - श्रृंगार: चंदन का तिलक करें। कुमकुम, हल्दी, अक्षत, पीले फूल और तुलसी (केवल विष्णु/नारायण को, सीधे लक्ष्मी को नहीं) अर्पित करें।

चरण 5 - मंत्र जाप: दीया व अगरबत्ती जलाएँ। अगले भाग में दिए गए लक्ष्मी मंत्रों का तुलसी या कमलगट्टे की माला से कम से कम 11, 21 या 108 बार जाप करें।

चरण 6 - आरती: 'ॐ जय लक्ष्मी माता' और 'ॐ जय जगदीश हरे' की आरती करें। आरती के समय घंटी बजाएँ।

चरण 7 - नैवेद्य व प्रसाद: भोग अर्पित करें। मानसिक रूप से मूर्ति के होंठों से स्पर्श कराएँ। परिवार के सदस्यों में प्रसाद बाँटें।

चरण 8 - दान: ब्राह्मण, मंदिर, गरीब या गौ सेवा के लिए कुछ - चाहे थोड़ा ही - दान अवश्य करें। दान के बिना अक्षय तृतीया अधूरी है।

अक्षय तृतीया के 5 सबसे प्रभावी लक्ष्मी मंत्र

अक्षय तृतीया के 5 सबसे प्रभावी लक्ष्मी मंत्र

मुहूर्त के समय इनमें से कोई भी मंत्र 108 बार जपें - सर्वश्रेष्ठ लाभ मिलेगा।

1. महालक्ष्मी बीज मंत्र ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

यह सबसे शक्तिशाली लक्ष्मी मंत्र है। अक्षय तृतीया पर 108 बार जप करने से वर्षों से रुकी हुई आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं।

2. लक्ष्मी गायत्री मंत्र ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

3. श्री सूक्त (प्रथम मंत्र) हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥ धन और समृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावी।

4. कुबेर मंत्र (लक्ष्मी पूजा के बाद) ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये धन-धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥ कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं - लक्ष्मी पूजा के बाद धन की रक्षा हेतु उनका आह्वान करें।

5. विष्णु मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ यह 12 अक्षरों का मंत्र भगवान विष्णु से जोड़ता है। 108 बार जपें।

सुझाव: लक्ष्मी मंत्रों के लिए कमलगट्टे की माला का उपयोग करें - समृद्धि जप के लिए यह रुद्राक्ष से 1000 गुना अधिक प्रभावी मानी जाती है।

अक्षय तृतीया पर ये 7 कार्य अवश्य करें

1. सोना या चांदी अवश्य खरीदें - 1 ग्राम का सिक्का भी पर्याप्त है। अक्षय तृतीया भारत में धनतेरस के बाद सबसे बड़ा सोना खरीदी का दिन है। आज जो सोना घर आता है, उसका मूल्य समय के साथ बढ़ता ही है।

2. दान करें - जल, सत्तू, पंखे, छाते, फल, वस्त्र या धन। आज का दान अक्षय पुण्य देता है। श्रद्धा से दिए ₹11 भी बिना श्रद्धा के ₹11,000 से अधिक प्रभावी हैं।

3. नया व्यापार, निवेश या बचत खाता शुरू करें - आज जो शुरू किया जाए उसमें हानि नहीं होती। SIP, FD या नया व्यवसाय - आरंभ करें।

4. लक्ष्मी-नारायण की एक साथ पूजा करें - लक्ष्मी की कभी अकेले पूजा न करें। वे वहीं रहती हैं जहाँ नारायण की पूजा हो। दंपत्ति साथ बैठकर पूजा करें।

5. विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण करें - आज सभी 1008 नामों का पाठ 1000 बार किए पाठ का पुण्य देता है।

6. माँ गंगा को जल अर्पित करें - गंगा का अवतरण आज हुआ था। यदि नदी न जा सकें, स्नान के जल में गंगाजल मिलाएँ और सूर्य को अर्घ्य दें।

7. किसी को भोजन कराएँ - अक्षय तृतीया पर अन्नदान सर्वोच्च दान है। कम से कम एक भूखे, गाय या ब्राह्मण को भोजन कराएँ।

इस दिन की जाने वाली सामान्य गलतियाँ

अच्छी श्रद्धा वाले भक्त भी इन छोटी गलतियों के कारण लाभ खो देते हैं:

  • राहु काल में सोना खरीदना - सुबह 9:30 के बाद ही खरीदें
  • नारायण के बिना केवल लक्ष्मी की पूजा - अधूरी पूजा, आशीर्वाद नहीं ठहरता
  • लक्ष्मी पर तुलसी चढ़ाना - कभी न करें; तुलसी केवल विष्णु को
  • दान न करना - दान के बिना अक्षय तृतीया का पुण्य नष्ट हो जाता है
  • टूटी माचिस से दीया जलाना - नई माचिस या किसी दूसरे दीये से जलाएँ
  • फटे या मैले कपड़े पहनना - स्वच्छ नए वस्त्र पहनें (पीला, लाल या श्वेत श्रेष्ठ)
  • घर में कलह - आज के दिन क्रोध और अपमान वाले घर लक्ष्मी छोड़ देती हैं
  • मांसाहार या मद्यपान - कठोर सात्विक शाकाहारी भोजन ही करें

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  • लक्ष्मी आरती, विष्णु सहस्रनाम, श्री सूक्त - एक टैप पर पढ़ें या सुनें
  • बिल्ट-इन जप काउंटर से लक्ष्मी बीज मंत्र 108 बार जपें - माला की ज़रूरत नहीं
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लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

अक्षय तृतीया 2026 की सही तारीख और समय क्या है?+

अक्षय तृतीया 2026 सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को है। तृतीया तिथि 20 अप्रैल सुबह 5:31 से 21 अप्रैल रात 2:12 तक है। पूजा और सोना खरीदने का श्रेष्ठ मुहूर्त 20 अप्रैल सुबह 5:51 से दोपहर 12:18 तक।

क्या अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना ज़रूरी है?+

अनिवार्य नहीं, पर अत्यंत शुभ। 1 ग्राम सोना भी लक्ष्मी को घर में स्थायी रूप से बुलाने का प्रतीक है। यदि सोना न खरीद सकें तो चांदी, पीतल के बर्तन या छोटी मूर्ति लें। खरीदने की क्रिया महत्वपूर्ण है, मात्रा नहीं।

क्या मैं बिना पंडित के घर पर अक्षय तृतीया पूजा कर सकता हूँ?+

हाँ, बिल्कुल। अक्षय तृतीया पूजा इतनी सरल है कि घर का कोई भी सदस्य कर सकता है। ऊपर दी गई 8-चरणीय विधि अपनाएँ, श्रद्धा से मंत्र जपें, आरती करें और दान करें। पंडित आवश्यक नहीं।

अक्षय तृतीया पर क्या खाएँ और क्या न खाएँ?+

सात्विक शाकाहारी भोजन करें - खीर, हलवा, सत्तू, फल, दूध, दही, गुड़ और जौ से बनी चीज़ें। प्याज, लहसुन, मांसाहार, अंडे और मद्य पूर्णतः वर्जित। कई भक्त आंशिक उपवास रखते हैं और संध्या पूजा के बाद ही पारण करते हैं।

अगर सुबह का मुहूर्त निकल जाए तो क्या पूजा हो सकती है?+

हाँ। सुबह का मुहूर्त (5:51–12:18) सबसे शक्तिशाली है, पर पूरा दिन शुभ है। प्रदोष काल (शाम 6:48–8:55) दूसरा श्रेष्ठ समय है। श्रद्धा से किसी भी समय की गई पूजा अक्षय पुण्य देती है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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