बगलामुखी माता कौन हैं
बगलामुखी माता दस महाविद्या में आठवीं और स्तंभन की देवी हैं - हानिकारक शक्तियों को रोकने, स्तंभित और पंगु करने की शक्ति। पूरी तरह पीले वस्त्र धारण करने के कारण उन्हें पीतांबरा देवी भी कहा जाता है। उनका नाम उसका सूचक है जो शत्रु की वाणी और मन को पकड़कर मौन कर देती हैं, शत्रुता को नीरवता में बदल देती हैं। वे उस दिव्य शक्ति की प्रतीक हैं जो गलत कर्म को वहीं रोक सकती है।
उनका स्वरूप
बगलामुखी को स्वर्ण-पीले वर्ण में, स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान, पीले वस्त्र और पीले आभूषण धारण किए दर्शाया जाता है। एक हाथ में वे एक असुर पर गदा उठाए हैं, जबकि दूसरे हाथ से उसकी जिह्वा पकड़ती हैं - वाणी और दुर्भाव को स्तंभित करने का प्रतीक। उनका पीला रंग बृहस्पति ग्रह, बुद्धि और भाग्य के शुभ मोड़ से जोड़ता है। उनकी उपासना का हर तत्व - वस्त्र, पुष्प, भोग - परंपरा अनुसार पीला होता है।
महत्व और उनके वरदान
भक्त बगलामुखी माता की उपासना शत्रुओं पर विजय, मुकदमों व विवादों में सफलता, हानि चाहने वालों से रक्षा, और भय, भ्रम व आत्म-संदेह को शांत करने हेतु करते हैं। स्तंभन की गहरी सीख है अपने ही चंचल मन पर अधिकार। वे बाहरी विजय हेतु प्रसिद्ध हैं, पर ज्ञानी उनका वास्तविक वरदान आंतरिक स्थिरता मानते हैं - तब भी शांत व अविचल रहने की क्षमता जब अन्य उकसाने या भटकाने का प्रयास करें।
बगलामुखी बीज मंत्र

सबसे अधिक जपा जाने वाला बगलामुखी मंत्र है:
ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा
सरल बीज रूप है:
ॐ ह्लीं बगलामुखी नमः
ह्लीं उनका बीज स्वर है। यह एक शक्तिशाली तांत्रिक मंत्र है, और पूर्ण रूप परंपरा अनुसार किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में लिया जाता है, कभी किसी निर्दोष को हानि पहुँचाने हेतु नहीं।
उपासना विधि
1. स्नान कर पीले स्वच्छ वस्त्र पहनें; पूर्व या उत्तर की ओर मुख करें। 2. बगलामुखी माता का चित्र रखें और घी या हल्दी में डूबा दीपक जलाएँ। 3. पीले पुष्प, हल्दी, पीली मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू) और पीला वस्त्र अर्पित करें। 4. हल्दी की माला पर ॐ ह्लीं बगलामुखी नमः का 108 बार जप करें। 5. गुरुवार विशेष शुभ है, क्योंकि यह बृहस्पति से जुड़ा है। 6. शांत हृदय से रक्षा, न्याय और आंतरिक स्थिरता की प्रार्थना करें, कभी बदले हेतु नहीं। उग्र मंत्र को केवल शुद्ध भाव और आदर्श रूप से गुरु के मार्गदर्शन में ही ग्रहण करें।
बगलामुखी उपासना के लाभ
बगलामुखी माता की सच्ची उपासना न्यायसंगत विवादों व कानूनी मामलों में विजय, शत्रुओं व नकारात्मक वाणी से रक्षा, दबाव में साहस, और शांत, एकाग्र मन देती मानी जाती है। सबसे बढ़कर वे भक्त को भय और उकसावे के विरुद्ध स्थिर करती हैं, जिससे वह चुनौतियों का सामना क्रोध की बजाय शांत शक्ति से करता है।
त्वरित उत्तर
बगलामुखी माता कौन हैं?+
बगलामुखी माता आठवीं दस महाविद्या हैं, स्तंभन की स्वर्णिम देवी जो हानिकारक शक्तियों को स्तंभित करती हैं। पीले वस्त्र धारण करने के कारण उन्हें पीतांबरा देवी भी कहते हैं।
बगलामुखी बीज मंत्र क्या है?+
सरल बीज मंत्र 'ॐ ह्लीं बगलामुखी नमः' है। 'ह्लीं' उनका बीज स्वर है। लंबा तांत्रिक रूप किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में लेना चाहिए।
बगलामुखी उपासना में पीला रंग क्यों महत्वपूर्ण है?+
बगलामुखी पीले वस्त्र धारण करती हैं और बृहस्पति से जुड़ी हैं, इसलिए भक्त पीले पुष्प, हल्दी व पीली मिठाई अर्पित करते और उपासना में पीला पहनते हैं।
स्तंभन का क्या अर्थ है?+
स्तंभन का अर्थ है स्तंभित करना या रोकना। बगलामुखी का स्तंभन बाहर शत्रुओं व विवादों को शांत कर सकता है, पर इसका गहरा अर्थ अपने ही चंचल मन पर अधिकार है।
बगलामुखी माता की उपासना के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?+
गुरुवार विशेष शुभ है क्योंकि यह बृहस्पति से जुड़ा है। पीला धारण कर और पीली वस्तुएँ अर्पित कर हल्दी की माला पर 'ॐ ह्लीं बगलामुखी नमः' का जप करें।
क्या बगलामुखी मंत्र दूसरों को हानि पहुँचाने हेतु प्रयोग हो सकता है?+
नहीं। मंत्र का प्रयोग किसी निर्दोष को हानि पहुँचाने हेतु कभी नहीं करना चाहिए। यह रक्षा, न्याय और आंतरिक स्थिरता हेतु है, शुद्ध भाव और गुरु के मार्गदर्शन से।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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