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बगलामुखी पूजा: इस महाविद्या की पूजा विधि और लाभ
Devi Worship

बगलामुखी पूजा: इस महाविद्या की पूजा विधि और लाभ

7 मिनट पढ़ेंप्रकाशित सितंबर 4, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

माँ बगलामुखी कौन हैं?

बगलामुखी को आदि शक्ति की दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना जाता है। उन्हें स्तंभन शक्ति की देवी कहा जाता है, अर्थात नकारात्मक शक्तियों को रोकने या स्थिर करने की शक्ति, चाहे वह शत्रु की बुरी मंशा हो, झूठा विवाद हो, हानिकारक बातें हों या स्वयं के बिखरे विचार हों। उन्हें पीले वस्त्रों में विराजमान, विरोधी की जिह्वा पकड़े दिखाया जाता है, जो वाणी और विचार पर नियंत्रण का प्रतीक है, न कि किसी को हानि पहुंचाने का।

चूंकि बगलामुखी साधना एक गहन तांत्रिक परंपरा से जुड़ी है, गंभीर साधक इसे केवल किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में करते हैं। आगे जो बताया गया है वह सामान्य भक्तों द्वारा उनकी रक्षा हेतु की जाने वाली सरल, श्रद्धापूर्ण घरेलू पूजा है, दीक्षित साधकों के लिए आरक्षित विस्तृत साधना नहीं।

सरल घरेलू पूजा हेतु सामग्री

घर पर सरल, श्रद्धापूर्ण पूजा हेतु ये एकत्र करें:

  • माँ बगलामुखी का चित्र या छोटी मूर्ति
  • बैठने हेतु पीला वस्त्र या आसन
  • पीले पुष्प, विशेषकर गेंदा
  • हल्दी और पीला चंदन
  • सरसों या तिल के तेल का दीया
  • अक्षत, धूप और घंटी
  • प्रसाद हेतु बेसन का लड्डू या कोई पीली मिठाई

सब कुछ सामान्य हो सकता है। इस पूजा के लिए विस्तृत या महंगी वस्तुओं की आवश्यकता नहीं, केवल स्वच्छ स्थान और सच्चा हृदय चाहिए।

चरण-दर-चरण पूजा विधि

1. स्नान व आसन: स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें, और पीले आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर बैठें। 2. गणेश वंदना: निर्विघ्न पूजा हेतु भगवान गणेश की संक्षिप्त प्रार्थना से आरंभ करें। 3. ध्यान: दीया और धूप जलाएं, और शांत, स्थिर मन से माँ बगलामुखी का ध्यान करते हुए कुछ क्षण बिताएं। 4. अर्पण: जुड़े हाथों से अक्षत, हल्दी, पीले पुष्प और मीठा प्रसाद अर्पित करें। 5. मंत्र जप: उनका नाम या सरल मंत्र जैसे ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै नमः शांत भाव से, सुविधाजनक संख्या में जैसे 11 या 21 बार जपें। 6. आरती व प्रसाद: संक्षिप्त आरती करें, कृतज्ञता व्यक्त करें, और परिवार के साथ प्रसाद बांटें।

पूजा संक्षिप्त और शांत रखी जाती है, कभी जल्दबाजी या उत्तेजना में नहीं की जाती।

उपयुक्त समय और ध्यान रखने योग्य नियम

उपयुक्त समय और ध्यान रखने योग्य नियम

बगलामुखी पूजा हेतु मंगलवार का दिन सामान्यतः उपयुक्त माना जाता है, हालांकि सच्चा भक्त संघर्ष या निंदा से वास्तविक कष्ट में होने पर कभी भी उनसे प्रार्थना कर सकता है। कुछ परिवार नवरात्रि के समय अन्य महाविद्याओं के साथ यह पूजा करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण नियम है मंशा। यह पूजा रक्षा और मानसिक शांति के लिए है, किसी को हानि पहुंचाने की कामना के लिए नहीं। भक्तों को सलाह दी जाती है कि मन शांत रखें, क्रोध से बचें, और उन्हें ऐसी माँ के रूप में देखें जो कठिन परिस्थिति को स्थिर करती हैं, न कि दुरुपयोग की जाने वाली शक्ति के रूप में।

बचने योग्य सामान्य गलतियां

  • गुरु मार्गदर्शन के बिना पुस्तक या वीडियो देखकर विस्तृत तांत्रिक साधना करने का प्रयास करना
  • वास्तविक कष्ट के बजाय क्रोध या बदले की भावना से यह पूजा करना
  • आरंभ में गणेश वंदना छोड़ देना
  • घरेलू पूजा के लिए जब सरल, सच्ची प्रार्थना पर्याप्त हो तब अनुष्ठान को जटिल बना देना

यदि किसी को बगलामुखी की गहन साधना की ओर रुझान महसूस हो, तो परंपरा दृढ़ता से सलाह देती है कि अकेले प्रयोग करने के बजाय योग्य गुरु की शरण लें।

सार

माँ बगलामुखी की पूजा, अपने मूल में, संसार के अस्तव्यस्त या अन्यायपूर्ण प्रतीत होने पर स्थिरता की प्रार्थना है। शांत मन और सच्ची मंशा से की गई सरल घरेलू पूजा अधिकांश भक्तों के लिए पर्याप्त है। वे जिस गहन तांत्रिक मार्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं, उसके लिए परंपरा धैर्य और सच्चे गुरु की मांग करती है, कोई शॉर्टकट नहीं।

त्वरित उत्तर

क्या बगलामुखी पूजा बिना पुरोहित के घर पर की जा सकती है?+

हां, चित्र, पीले पुष्प, हल्दी और संक्षिप्त मंत्र के साथ सरल पूजा श्रद्धा से घर पर की जा सकती है। परंतु गहन तांत्रिक साधना परंपरागत रूप से केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही की जाती है।

बगलामुखी पूजा में पीला रंग क्यों महत्वपूर्ण है?+

पीला रंग माँ बगलामुखी के स्वरूप से घनिष्ठता से जुड़ा है और परंपरागत रूप से उनके पुष्प, वस्त्र और अर्पण में प्रयुक्त होता है, जिसे उनकी तेजस्वी, स्थिरकारी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

क्या बगलामुखी पूजा केवल विवाद झेल रहे लोगों के लिए है?+

नहीं। यद्यपि उन्हें अक्सर विवाद या झूठे आरोपों से रक्षा हेतु स्मरण किया जाता है, भक्त उनसे मानसिक स्थिरता, हानिकारक वाणी पर नियंत्रण और सामान्य रूप से बुरी मंशा से रक्षा के लिए भी प्रार्थना करते हैं।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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