बृहस्पति (गुरु) कौन हैं
बृहस्पति, जिन्हें गुरु भी कहते हैं, देवताओं के आचार्य (गुरु) और बृहस्पति ग्रह के स्वामी हैं। वे ज्ञान, बुद्धि, भक्ति, समृद्धि, संतान और सुखी वैवाहिक जीवन के दाता हैं। एक शुभ व सौम्य ग्रह, जीवन में बलवान बृहस्पति सम्मान, सही निर्णय-शक्ति, आध्यात्मिक विकास और समय पर विवाह लाते हैं। उन्हें स्वर्ण रंग का, कमल या रथ पर विराजमान, दंड, कमंडलु और माला धारण किए, शांत प्रभुत्व से दीप्त दर्शाया जाता है।
महत्व और कब उपासना करें
गुरुवार बृहस्पति का दिन है, और उनकी उपासना विशेषकर वे चाहते हैं जो विवाह में विलंब, कमज़ोर धन, अध्ययन में एकाग्रता की कमी, या संतान में कठिनाई का सामना कर रहे हों। कमज़ोर या पीड़ित बृहस्पति गलत निर्णयों, सम्मान की हानि और जीवन-विकास की बाधाओं से जुड़ा है। पीला रंग उन्हें प्रिय है, और उनकी उपासना भगवान विष्णु से गहराई से जुड़ी है, जिन्हें अनेक भक्त गुरुवार को बृहस्पति के साथ पूजते हैं।
बृहस्पति चालीसा - सार और प्रारंभिक दोहा
बृहस्पति चालीसा गुरु देव की देवताओं के आचार्य और बुद्धि व सौभाग्य के दाता रूप में स्तुति करती है। यह दोहे से आरंभ होती है:
प्रणवौं प्रथम गुरु चरण, बुद्धि ज्ञान के दान। बृहस्पति की चालीसा, कहूँ शुभ शुभ मान।
चौपाई (उदाहरण): जय जय बृहस्पति देवता स्वामी, ज्ञान-दाता जग में अभिरामी। पीतांबर शुभ पीत बिराजे, माला-कमंडल कर में साजे।
छंद उनके स्वर्ण रूप और सच्चे भक्तों को विद्या, विवाह व समृद्धि देने की शक्ति का वर्णन करते हैं।
बृहस्पति मंत्र और जप विधि

मुख्य मंत्र है:
ॐ बृहस्पतये नमः
विधि: 1. गुरुवार को स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें; ईशान कोण की ओर मुख करें। 2. बृहस्पति या भगवान विष्णु के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ। 3. पीले पुष्प, चना दाल, हल्दी, गुड़ और पीली मिठाई अर्पित करें। 4. ॐ बृहस्पतये नमः का 108 बार जप करें, विशेषकर पीली या तुलसी माला पर। 5. बृहस्पति चालीसा का पाठ करें, फिर आरती करें। 6. चना दाल, हल्दी, पीला वस्त्र या पुस्तकें मंदिर या जरूरतमंदों को दान करें। अनेक लोग गुरुवार को केले के वृक्ष की भी पूजा करते हैं, क्योंकि वह बृहस्पति को प्रिय है।
गुरुवार व्रत और कथा
गुरुवार व्रत गुरुवार को रखा जाता है, अक्सर निश्चित सप्ताहों (जैसे 16) तक। व्रती केवल एक बार भोजन करता है, पीला, बेसन या चना-आधारित भोजन लेता और नमक तथा केला (केला अर्पित किया जाता है, खाया नहीं) त्यागता है। प्रचलित कथा एक उदार, धर्मनिष्ठ राजा या स्त्री की है जिनका भाग्य बृहस्पति की उपासना उपेक्षित होने पर डगमगाया, और श्रद्धा से गुरुवार व्रत पुनः आरंभ करते ही समृद्धि में लौट आया। कथा सिखाती है कि धन को टिकने हेतु दान, कृतज्ञता और भक्ति से जुड़ा होना चाहिए।
रत्न और दान के उपाय
कमज़ोर बृहस्पति को बल देने हेतु अनुशंसित रत्न पुखराज है, जिसे ज्योतिषीय परामर्श के बाद तर्जनी अंगुली में स्वर्ण में धारण किया जाता है। प्रभावी दान में चना दाल, हल्दी, पीला वस्त्र, स्वर्ण, पुस्तकें और घी शामिल हैं, जो गुरुवार को मंदिर, शिक्षक या जरूरतमंदों को दिए जाते हैं। गायों को चना व गुड़ खिलाना, केले के वृक्ष को लगाना या पूजना, और हल्दी का तिलक लगाना बृहस्पति की कृपा पाने के सरल, व्यापक उपाय हैं।
बृहस्पति उपासना के लाभ

बृहस्पति की उपासना बुद्धि व स्पष्ट निर्णय, शिक्षा व करियर में सफलता, धन व सम्मान में वृद्धि, समय पर व सुखी विवाह, और संतान का आशीर्वाद लाती मानी जाती है। विवाह में विलंब या बार-बार गलत निर्णयों का सामना करने वालों के लिए गुरुवार व्रत और बृहस्पति चालीसा सबसे प्रिय उपायों में हैं। सबसे बढ़कर, उनकी कृपा विनम्रता, श्रद्धा और अपना सौभाग्य दूसरों से बाँटने की भावना गहरी करती है।
पाठकों के प्रश्न
बृहस्पति कौन हैं?+
बृहस्पति, जिन्हें गुरु भी कहते हैं, देवताओं के आचार्य और बृहस्पति ग्रह के स्वामी हैं। वे बुद्धि, समृद्धि, विवाह, संतान और सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं, और एक शुभ, सौम्य ग्रह हैं।
बृहस्पति मंत्र क्या है?+
मुख्य मंत्र 'ॐ बृहस्पतये नमः' है, जिसे गुरुवार को ईशान कोण की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर, पीली या तुलसी माला पर 108 बार जपा जाता है।
गुरुवार व्रत कैसे रखा जाता है?+
गुरुवार को व्रती एक बार पीला, चना-आधारित भोजन करता है, नमक व केला त्यागता है, पीला पहनता है, बृहस्पति या विष्णु की पूजा करता है, चालीसा व कथा पढ़ता है, और पीली वस्तुएँ दान करता है। यह अक्सर निश्चित सप्ताहों तक रखा जाता है।
कौन सा रत्न बृहस्पति को बल देता है?+
पुखराज बृहस्पति का रत्न है, जिसे तर्जनी अंगुली में स्वर्ण में धारण किया जाता है। इसे केवल उचित ज्योतिषीय परामर्श के बाद ही पहनना चाहिए, क्योंकि यह बृहस्पति की ऊर्जा को प्रबलता से बढ़ाता है।
क्या बृहस्पति उपासना विलंबित विवाह में सहायक है?+
हाँ। बलवान बृहस्पति समय पर, सुखी विवाह में सहायक है, इसलिए विवाह में विलंब का सामना करने वाले गुरुवार व्रत, बृहस्पति चालीसा और पीले दान को सच्ची श्रद्धा व धैर्य के साथ व्यापक रूप से रखते हैं।
पीला रंग बृहस्पति से क्यों जुड़ा है?+
पीला बुद्धि, शुभता और बृहस्पति व भगवान विष्णु की स्वर्ण आभा का प्रतीक है। पीला पहनना, हल्दी व पीली मिठाई अर्पित करना, और पीली वस्तुएँ दान करना बृहस्पति को प्रसन्न करता माना जाता है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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