नवग्रह कौन हैं
नवग्रह हिंदू परंपरा में पूजित नौ 'ग्रह' या ब्रह्मांडीय प्रभावक हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु या बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु (दो चंद्र नोड)। इन्हें मात्र ग्रह नहीं बल्कि जीवंत शक्तियाँ माना जाता है जो हमारे कर्मों का फल स्वास्थ्य, मन, विवाह, धन, बुद्धि और भाग्य में बाँटती हैं। इनकी सामूहिक उपासना सामंजस्य लाती है, जबकि किसी कमज़ोर ग्रह को बल देना या कष्टकारी ग्रह को शांत करना ग्रह शांति का मूल है।
नौ बीज मंत्र और उनके दिन
प्रत्येक ग्रह का अपना वैदिक मंत्र और उपासना का वार है:
1. सूर्य (रविवार): ॐ सूर्याय नमः 2. चंद्र (सोमवार): ॐ चंद्राय नमः 3. मंगल (मंगलवार): ॐ अंगारकाय नमः 4. बुध (बुधवार): ॐ बुधाय नमः 5. गुरु/बृहस्पति (गुरुवार): ॐ बृहस्पतये नमः 6. शुक्र (शुक्रवार): ॐ शुक्राय नमः 7. शनि (शनिवार): ॐ शनैश्चराय नमः 8. राहु (शनिवार): ॐ राहवे नमः 9. केतु (शनिवार): ॐ केतवे नमः
संबंधित मंत्र का उसके वार पर 108 बार जप उस ग्रह के शुभ आशीर्वाद को सशक्त करता है।
नवग्रह चालीसा - सार और प्रारंभिक दोहा
नवग्रह चालीसा सभी नौ ग्रह स्वामियों की एक-एक कर स्तुति करती है और उनकी समवेत कृपा व शांति माँगती है। यह दोहे से आरंभ होती है:
श्री गणपति गुरु गौरी पद, प्रेम सहित धरि माथ। नवग्रह चालीसा कहत, शरण रखो रघुनाथ।
चौपाई (उदाहरण): जय जय रवि सोम भौम बुध, गुरु शुक्र शनि नाम। राहु केतु सहित नव ग्रह, करत सभी का काम।
छंद प्रत्येक ग्रह के रूप, रंग और वरदान का वर्णन करते हैं, और सभी ग्रह-पीड़ाओं से रक्षा की प्रार्थना से समाप्त होते हैं।
नवग्रह शांति पूजा विधि

1. जल्दी स्नान कर पूजा स्थल स्वच्छ करें; नवग्रह यंत्र या नौ देव-चित्र उनके पारंपरिक क्रम में रखें। 2. घी या तिल के तेल का दीपक जलाएँ और प्रत्येक ग्रह से जुड़े नौ रंगों के पुष्प अर्पित करें। 3. गणेश वंदना से आरंभ करें, फिर नवग्रह चालीसा का पाठ करें। 4. प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र, या संयुक्त नवग्रह मंत्र का माला पर 108 बार जप करें। 5. प्रत्येक ग्रह से जुड़े अनाज, वस्त्र व वस्तुएँ अर्पित करें, फिर आरती करें। 6. किसी कमज़ोर या कष्टकारी ग्रह की वस्तुएँ जरूरतमंदों को दान कर समापन करें। विवाह, गृह-प्रवेश और बड़े कार्यों के आरंभ से पहले पुरोहित द्वारा नवग्रह पूजा या हवन विशेष अनुशंसित है।
रत्न और दान के उपाय
प्रत्येक ग्रह एक रत्न और दान से संतुलित होता है:
- सूर्य: माणिक; गेहूँ, गुड़, ताँबा दान करें।
- चंद्र: मोती; चावल, दूध, श्वेत वस्त्र दान करें।
- मंगल: मूँगा; मसूर दाल, लाल वस्त्र दान करें।
- बुध: पन्ना; हरी मूँग, हरा वस्त्र दान करें।
- गुरु: पुखराज; चना दाल, हल्दी, स्वर्ण दान करें।
- शुक्र: हीरा; शक्कर, सफेद मिठाई, इत्र दान करें।
- शनि: नीलम; काला तिल, उड़द, लोहा दान करें।
- राहु: गोमेद; कंबल, सरसों का तेल दान करें।
- केतु: लहसुनिया; तिल, बहुरंगी वस्त्र दान करें।
रत्न केवल ज्योतिषीय परामर्श के बाद ही धारण करें, पर दान और मंत्र जप सबके लिए सुरक्षित हैं।
नवग्रह उपासना के लाभ
नवग्रह की उपासना जीवन में ग्रहों की ऊर्जाओं को संतुलित करती, किसी अशुभ ग्रह की कठोरता घटाती और शुभ ग्रहों के आशीर्वाद को सशक्त करती मानी जाती है। भक्त इसे लंबी अस्वस्थता, बार-बार की बाधाओं, विवाह या करियर में विलंब और अकारण हानियों से राहत हेतु अपनाते हैं। सबसे बढ़कर, नियमित नवग्रह शांति धैर्य, कृतज्ञता और यह विश्वास विकसित करती है कि हमारा कर्म एक न्यायपूर्ण, दिव्य संतुलन में रखा गया है।
सरल दैनिक अभ्यास

आपको प्रतिदिन विस्तृत अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं। दीपक जलाएँ, नवग्रह को प्रणाम करें, और उस वार के स्वामी ग्रह का मंत्र जपें। जब संभव हो उस ग्रह से जुड़ा दान जोड़ें, और ईमानदारी व दया से जीएँ, क्योंकि सदाचरण सबसे प्रबल ग्रह उपाय है। किसी कष्टकारी ग्रह-काल में उचित मार्गदर्शन में उस विशेष ग्रह का अभ्यास बढ़ाएँ।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
नौ नवग्रह कौन हैं?+
नवग्रह हैं सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु या बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु - नौ ब्रह्मांडीय शक्तियाँ जो हमारे कर्म और जीवन को प्रभावित करती हैं।
संयुक्त नवग्रह मंत्र क्या है?+
भक्त प्रत्येक ग्रह का अलग बीज मंत्र, जैसे 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ शनैश्चराय नमः', 108 बार जपते हैं। एक संयुक्त नवग्रह स्तोत्रम् या नवग्रह चालीसा सभी नौ का एक साथ सम्मान करती है।
मुझे प्रत्येक ग्रह की उपासना किस दिन करनी चाहिए?+
सूर्य रविवार, चंद्र सोमवार, मंगल मंगलवार, बुध बुधवार, गुरु गुरुवार, शुक्र शुक्रवार, और शनि, राहु व केतु शनिवार को। उस ग्रह का मंत्र उसके अपने दिन जपें।
क्या ग्रह दोष हेतु रत्न पहनना सुरक्षित है?+
रत्न किसी ग्रह की ऊर्जा को बढ़ाते हैं और उचित ज्योतिषीय परामर्श के बाद ही पहनने चाहिए, क्योंकि गलत रत्न उल्टा प्रभाव दे सकता है। मंत्र जप, चालीसा और दान सुरक्षित उपाय हैं जो कोई भी कर सकता है।
नवग्रह पूजा या हवन कब अनुशंसित है?+
नवग्रह शांति पूजा या हवन विशेषकर विवाह, गृह-प्रवेश, नामकरण और बड़े कार्यों के आरंभ से पहले, तथा कठिन ग्रह-कालों में संतुलन व रक्षा हेतु अनुशंसित है।
क्या नवग्रह चालीसा कोई भी पढ़ सकता है?+
हाँ। श्रद्धा और स्वच्छ, विनम्र हृदय वाला कोई भी नवग्रह चालीसा का प्रतिदिन पाठ कर सकता है। विस्तृत अनुष्ठान से कहीं अधिक सच्ची भक्ति, ईमानदार आचरण और दान मायने रखते हैं।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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