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चंदन: पूजा और तिलक में महत्व
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चंदन: पूजा और तिलक में महत्व

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 24, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

चंदन क्या है और यह पवित्र क्यों है

चंदन सुगंधित, शीतल लेप है जो चंदन की लकड़ी को सिल पर थोड़े जल के साथ घिसकर बनाया जाता है। हिंदू पूजा में कम ही वस्तुएँ इतनी प्रिय हैं: यह देवों को अर्पित होता, मूर्ति पर लगाया जाता, माथे पर तिलक रूप में लगाया जाता, और धूप तथा हवन में प्रयुक्त होता है।

चंदन दो कारणों से एक साथ प्रिय है - इसकी दिव्य सुगंध और इसकी प्राकृतिक शीतलता। परंपरा इसे ऐसा पदार्थ मानती है जो शरीर को सुकून देता, मन शांत करता और देवों को प्रसन्न करता है, इसीलिए यह सरल घरेलू आरती से लेकर भव्य मंदिर पूजा तक लगभग हर पूजा में मिलता है।

आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व

  • देव और भक्त के लिए शीतलता: चंदन शीतल देवों को अर्पित और शरीर की ऊर्जा को सुकून देने हेतु लगाया जाता है। चंदन तिलक मन को शांत और स्थिर रखता माना जाता है।
  • तीसरा नेत्र (आज्ञा): भौंहों के बीच लगाया चंदन आज्ञा चक्र को शीतल करता, ध्यान और जप में एकाग्रता बढ़ाता, और मन की चंचलता घटाता कहा जाता है।
  • अर्पण रूप में सुगंध: इसकी मधुर, टिकाऊ सुगंध देव को प्रसन्न करने और सात्विक, शांत वातावरण रचने हेतु अर्पित होती है।
  • भक्ति और पवित्रता का चिह्न: चंदन तिलक धारण करने वाले को ईश्वर की ओर मुड़ा हुआ अंकित करता है; वैष्णवों के लिए ऊर्ध्वपुंड्र और शैवों के लिए त्रिपुंड्र (विभूति सहित) गहरा संप्रदाय अर्थ रखते हैं।
  • व्यावहारिक: चंदन स्वाभाविक रूप से शीतल है और परंपरागत रूप से गर्म जलवायु में त्वचा को सुकून देने हेतु मूल्यवान था, जिसने इसके पवित्र उपयोग को गहरा किया।

श्वेत चंदन बनाम लाल चंदन

पूजा में चंदन के दो मुख्य प्रकार प्रयुक्त होते हैं, प्रत्येक का अपना संबंध:

  • श्वेत / पीला चंदन: शीतल, सुगंधित चंदन लेप। यह विष्णु और उनके अवतारों (राम, कृष्ण) से, शांति और सत्व से जुड़ा है, और तिलक तथा अर्पण के लिए सर्वाधिक प्रयुक्त चंदन है।
  • लाल चंदन (रक्तचंदन): गहरा लाल चंदन, कम सुगंधित, देवी (शक्ति) और सूर्य से जुड़ा। यह देवी को अर्पित और उनके तिलक तथा पूजा में प्रयुक्त होता है।

सामान्य उपयोग:

  • विष्णु, कृष्ण, राम: श्वेत/पीला चंदन, अक्सर ऊर्ध्वपुंड्र (खड़े) तिलक में।
  • देवी, दुर्गा, लक्ष्मी: लाल चंदन या कुमकुम।
  • शिव: विभूति (पवित्र भस्म) त्रिपुंड्र; चंदन भी अर्पित होता है।

सदा अपने कुल देव और संप्रदाय की परंपरा का पालन करें।

चंदन कैसे बनाएँ और लगाएँ

चंदन कैसे बनाएँ और लगाएँ
  • लेप बनाना: चंदन का टुकड़ा स्वच्छ सिल पर कुछ बूँद जल, या स्वच्छ गंगाजल के साथ घिसें, जब तक चिकना लेप न बने। तैयार चंदन पाउडर को जल या गुलाब जल में मिलाना भी चलता है।
  • देव को अर्पण: अनामिका (अनामिका उँगली) से देव के नाम का उच्चारण करते हुए देव के चरण या माथे पर थोड़ा चंदन लगाएँ।
  • तिलक लगाना: अनामिका उँगली से भौंहों के बीच लगाएँ; चंदन तिलक के लिए परंपरागत रूप से अनामिका प्रयुक्त होती है। ऊर्ध्व तिलक के लिए अंगूठा ऊपर की ओर चलाएँ।
  • स्वयं के लिए: पूजा, ध्यान या बाहर निकलने से पूर्व चंदन तिलक शुभ और शीतल माना जाता है।
  • देखभाल: चंदन, सिल और उँगली स्वच्छ रखें। जहाँ संभव हो पूजा के लिए ताजा लेप बनाएँ, शेष ढककर रखें।

पाठकों के प्रश्न

चंदन भौंहों के बीच क्यों लगाया जाता है?+

भौंहों के बीच का बिंदु आज्ञा चक्र या तीसरा नेत्र है। चंदन, शीतल होने से, इस बिंदु को शांत करता, मन स्थिर करता और ध्यान तथा जप में एकाग्रता में सहायक माना जाता है। यह भक्ति और पवित्रता का दृश्य चिह्न भी है।

श्वेत और लाल चंदन में क्या अंतर है?+

श्वेत या पीला चंदन शीतल, सुगंधित चंदन लेप है जो विष्णु, राम और कृष्ण से जुड़ा है, तिलक के लिए सर्वाधिक प्रयुक्त। लाल चंदन (रक्तचंदन) गहरा, कम सुगंधित चंदन है जो देवी और सूर्य से जुड़ा है, देवी पूजा में अर्पित।

चंदन तिलक लगाने के लिए कौन सी उँगली प्रयोग होती है?+

चंदन तिलक लगाने के लिए परंपरागत रूप से अनामिका उँगली प्रयुक्त होती है, क्योंकि यह कोमल और शुभ मानी जाती है। ऊर्ध्व तिलक खींचने के लिए अंगूठा प्रयोग किया जा सकता है। लगाने से पूर्व उँगली स्वच्छ रखें।

पूजा के लिए चंदन का लेप कैसे बनाया जाता है?+

चंदन का टुकड़ा स्वच्छ सिल पर कुछ बूँद जल या गंगाजल के साथ घिसें जब तक चिकना लेप न बने। तैयार चंदन पाउडर को जल या गुलाब जल में मिलाकर भी प्रयोग किया जा सकता है। पूजा के लिए ताजा लेप श्रेष्ठ है।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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