छतरपुर की मां कात्यायनी कौन हैं
दक्षिण दिल्ली के बाहरी छोर पर छतरपुर मंदिर स्थित है, जो मां कात्यायनी को समर्पित है, जो देवी के नवदुर्गा स्वरूपों में से एक हैं और नवरात्रि के छठे दिन विशेष रूप से पूजी जाती हैं। कई एकड़ में फैला यह मंदिर देश के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में गिना जाता है।
इस परिसर में मुख्य कात्यायनी धाम के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं के अनेक छोटे संगमरमरी मंदिर भी हैं, जिससे यह एक अकेला मंदिर नहीं बल्कि भक्ति का विशाल केंद्र बन जाता है।
मंदिर परिसर का इतिहास
छतरपुर मंदिर परिसर की स्थापना बीसवीं सदी के मध्य में एक भक्त संत ने की थी, जो चाहते थे कि भक्तों को भव्य और स्वागत करने वाले परिवेश में मातृशक्ति की उपस्थिति का अनुभव हो। दशकों में यह लगातार विस्तृत होता गया, जिसे अनगिनत भक्तों की श्रद्धा से निर्मित और सहेजा गया।
आज यह एक आधुनिक किंतु गहरे भक्तिभाव से परिपूर्ण परिसर है, जो पारंपरिक मंदिर स्थापत्य को विशाल संगमरमरी प्रांगणों के साथ जोड़ता है।
महत्व और भक्तों की श्रद्धा
नवदुर्गा स्वरूपों में से एक होने के कारण, परंपरा के अनुसार मां कात्यायनी भक्तों को शक्ति, विवाह और महत्वपूर्ण जीवन निर्णयों की बाधाओं से मुक्ति, तथा कठिनाइयों से रक्षा प्रदान करती हैं। भक्त परिसर के अन्य मंदिरों के भी दर्शन करते हैं, जिससे एक ही यात्रा एक व्यापक तीर्थयात्रा बन जाती है।
नवरात्रि के दौरान, विशेषकर षष्ठी के दिन जो नवदुर्गा क्रम में कात्यायनी को समर्पित है, मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
दर्शन मार्गदर्शिका और समय

यह परिसर सामान्यतः सुबह जल्दी से देर शाम तक खुला रहता है, और मुख्य धाम में निश्चित समय पर आरती होती है। इसके आकार को देखते हुए भक्त प्रायः परिसर के विभिन्न मंदिरों को देखने में कुछ घंटे व्यतीत करते हैं।
चूंकि समय, विशेषकर नवरात्रि के दौरान, बदल सकता है, यात्रा से पहले वर्तमान समय-सारणी की पुष्टि कर लेना उचित है।
छतरपुर मंदिर कैसे पहुंचें
यह मंदिर येलो लाइन के छतरपुर मेट्रो स्टेशन के निकट स्थित है, जहां से ऑटो और स्थानीय परिवहन परिसर तक जाते हैं। यह दिल्ली एनसीआर के किसी भी हिस्से से सड़क मार्ग द्वारा भी सुगमता से पहुंचा जा सकता है।
दिल्ली का हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शहर को शेष भारत से जोड़ते हैं।
जप हेतु मंत्र और सार
भक्त यहां देवी की प्रार्थना करते समय ॐ कात्यायन्यै नमः का जप करते हैं, साथ ही सामान्य नवदुर्गा मंत्रों का भी उच्चारण करते हैं।
छतरपुर मंदिर का विस्तार और खुलापन भक्तों को स्मरण कराता है कि भव्य भक्ति और सरल श्रद्धा साथ-साथ रह सकते हैं, और पूजा, चाहे परिवेश कितना भी विशाल हो, प्रेम और विश्वास का कार्य है, व्यापार नहीं।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
छतरपुर मंदिर में देवी के किस स्वरूप की पूजा होती है?+
मुख्य देवी मां कात्यायनी हैं, जो देवी के नौ नवदुर्गा स्वरूपों में से एक हैं।
क्या छतरपुर मंदिर एक ही मंदिर है या अनेक?+
यह कई एकड़ में फैला एक विशाल परिसर है, जिसमें मुख्य कात्यायनी धाम के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं के कई छोटे मंदिर भी हैं।
छतरपुर मंदिर कैसे पहुंचा जा सकता है?+
यह येलो लाइन के छतरपुर मेट्रो स्टेशन के निकट स्थित है, और दिल्ली एनसीआर भर से सड़क मार्ग द्वारा भी पहुंचा जा सकता है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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