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छठ पूजा 2026: तिथि, 4 दिन की पूजा विधि, सूर्य अर्घ्य समय और पवित्र मंत्र
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छठ पूजा 2026: तिथि, 4 दिन की पूजा विधि, सूर्य अर्घ्य समय और पवित्र मंत्र

10 मिनट पढ़ेंअद्यतन फ़रवरी 18, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

क्यों छठ वर्ष की सबसे पवित्र सूर्य पूजा है

Chhath Puja worshippers offering Surya Arghya at a river ghat at sunrise
Devotees stand knee-deep in the river offering arghya to the rising Sun - the central ritual of Chhath.

बिहार, झारखंड, पूर्वी UP और नेपाल में एक पर्व है जिस पर सूर्योदय पर पूरा प्रदेश मौन हो जाता है - छठ पूजा

छठ वेदों की प्राचीनतम सूर्य उपासना है। ऋग्वेद (10.85) सूर्य को प्रत्यक्ष ब्रह्म कहता है - 'वह ईश्वर जिसे हम साक्षात् देख सकते हैं।' छठ अनुष्ठान सबसे पहले द्रौपदी ने पांडवों के वनवास में किया, बाद में कर्ण (स्वयं सूर्यपुत्र) ने आजीवन प्रतिदिन किया।

छठ पूजा 2026 रविवार, 15 नवंबर 2026 (नहाय खाय) से आरंभ होकर बुधवार, 18 नवंबर 2026 (उषा अर्घ्य) को समाप्त होती है।

छठ की शक्ति तीन स्रोतों से आती है:

  • 36 घंटे का निर्जला व्रत - खरना संध्या से उषा अर्घ्य प्रातः तक न अन्न, न जल
  • सूर्य को संध्या व सूर्योदय दोनों पर अर्घ्य - विश्व का एकमात्र पर्व जिसमें यह अनूठा दोहरा अर्घ्य
  • छठी मैया - सूर्य की बहन, जो हर व्रती महिला को संतान, स्वास्थ्य व दीर्घायु का वरदान देती हैं

इस लेख में जानेंगे सटीक 4-दिन का कार्यक्रम, 2026 के सभी अर्घ्य समय, चरण-दर-चरण विधि, सबसे शक्तिशाली सूर्य मंत्र, और हर व्रती की सुननी चाहिए वह छठी मैया कथा।

🙏 अर्घ्य के सटीक समय सेट करें - वंदना ऐप में संध्या अर्घ्य व उषा अर्घ्य दोनों के लिए मुफ्त छठ रिमाइंडर हैं।

छठ 2026 - सटीक अर्घ्य समय सहित पूरा 4-दिवसीय कार्यक्रम

इन तिथियों व समयों को ध्यान से नोट करें - एक अर्घ्य चूकना पूरा व्रत तोड़ देता है।

दिवस 1 - नहाय खाय | रविवार, 15 नवंबर 2026 व्रती (व्रत रखने वाला/वाली) नदी में या गंगाजल मिले जल से स्नान करते हैं, नए सूती वस्त्र पहनते हैं, व एक सात्विक भोजन लेते हैं - लौकी की सब्जी + चने की दाल + सेंधा नमक वाले चावल। पूरे दिन केवल एक भोजन।

दिवस 2 - खरना (लोहांडा) | सोमवार, 16 नवंबर 2026 पूरे दिन का व्रत सूर्यास्त पर एक भोजन से टूटता है - रसियाव खीर (गुड़ व दूध से), रोटी व फल। इस भोजन के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ। 16 नवंबर सूर्यास्त: शाम 5:14

दिवस 3 - संध्या अर्घ्य | मंगलवार, 17 नवंबर 2026 सबसे महत्वपूर्ण दिन। व्रती 4 बजे से जल में खड़े होकर सूर्यास्त की प्रतीक्षा करते हैं। डूबते सूर्य को हाथ उठाकर अर्घ्य - दौरी में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल व मौसमी सामग्री अर्पित। 🌅 संध्या अर्घ्य समय: शाम 5:13 – 5:25 (17 नवंबर) सूर्यास्त के बाद व्रती घर लौटते हैं पर व्रत जारी।

दिवस 4 - उषा अर्घ्य | बुधवार, 18 नवंबर 2026 भोर से पहले व्रती घाट/जल स्रोत पर लौटते हैं और सूर्योदय की प्रतीक्षा में जल में खड़े होते हैं। उगते सूर्य को अर्घ्य। 🌄 उषा अर्घ्य समय: सुबह 6:11 – 6:30 (18 नवंबर) अर्घ्य के बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत प्रसाद से टूटता है - यह क्षण पारण कहलाता है।

2026 में विशेष: संध्या अर्घ्य मंगलवार को - हनुमान का दिन। उषा अर्घ्य बुधवार को - गणेश का दिन। यह संयोग मनोकामना पूर्ति हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।

घर पर छठ पूजा की पूर्ण विधि + 3 शक्तिशाली सूर्य मंत्र

Traditional Chhath Puja thaali with thekua, fruits, sugarcane and earthen diya
The Chhath dauri - bamboo basket carrying thekua, coconut, fruits and sugarcane offered at arghya.

सामग्री:

  • बांस की दौरी/सूप
  • 5 गन्ने
  • ठेकुआ (गुड़ से बनी विशेष मिठाई)
  • पानीयुक्त नारियल, मौसमी फल (केला, सेब, संतरा, सिंघाड़ा)
  • चावल, हल्दी, रोली, चंदन, सिंदूर
  • मिट्टी का दीया, घी, अगरबत्ती
  • कलश (ताँबे का) जल सहित
  • लाल वस्त्र, नई सूती साड़ी (महिला व्रतियों हेतु)
  • अर्घ्य जल हेतु दूध + गंगाजल

चरण 1 - दौरी तैयारी (अर्घ्य दिवस प्रातः): दौरी के बीच नारियल, फिर ठेकुआ (7 टुकड़े), गन्ने, चारों ओर फल। लाल वस्त्र से ढकें।

चरण 2 - घाट तक यात्रा: व्रती (सिर पर दौरी) के पीछे परिवार 'छठी मैया की जय' जपता चलता है। परिवार के पुरुष गन्ने उठाते हैं।

चरण 3 - जल में खड़े होना: व्रती नदी/तालाब/स्वच्छ जल स्रोत में घुटनों तक जाते हैं। सूर्य की दिशा में मुख।

चरण 4 - अर्घ्य अर्पण: दौरी पकड़ें। कलश से दूध + जल सूर्य की ओर, हाथ जोड़कर। जपें: 'ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥'

7 बार प्रणाम। दौरी की सामग्री मौन अर्पित करें।

3 शक्तिशाली सूर्य मंत्र (अर्घ्य के समय 108 बार जपें):

1. आदित्य हृदय मंत्र (सर्वाधिक शक्तिशाली): ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि। तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥

2. सूर्य बीज मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥

3. छठी मैया मंत्र: ॐ हृीं छठी मैयाय नमः॥

तीनों को 12 मिनट के अर्घ्य समय में जपें। संध्या अर्घ्य से पहले छठी मैया कथा अवश्य पढ़ें।

7 कठोर छठ नियम + छठी मैया व्रती को क्या देती हैं

7 कठोर छठ नियम + छठी मैया व्रती को क्या देती हैं

7 अटूट नियम:

1. न चमड़ा, न प्लास्टिक: केवल सूती वस्त्र, बांस की दौरी, मिट्टी के दीये। 4 दिनों में चमड़े का बेल्ट नहीं, प्लास्टिक की बोतल नहीं। छठी मैया केवल प्राकृतिक अर्पण स्वीकार करती हैं।

2. 36 घंटे निर्जल: खरना सूर्यास्त से उषा अर्घ्य प्रातः तक न जल, न अन्न। एक बूंद भी नहीं। इसे तोड़ना व्रत न करने के बराबर।

3. पलंग नहीं, ज़मीन पर सोना: नहाय खाय से पारण तक व्रती केवल चटाई बिछाकर ज़मीन पर सोते हैं। न पलंग, न तकिया, न गद्दा।

4. घाट पर जूते नहीं: घर से नदी तक नंगे पैर चलें। दूरी अधिक हो तब भी। अनेक व्रती 5 किमी नंगे पैर सिर पर दौरी लेकर चलते हैं।

5. भोजन हेतु अलग बर्तन: छठ प्रसाद - ठेकुआ व कसार - नए बर्तनों में, स्वच्छ स्थान पर, स्वयं व्रती द्वारा बनाया जाता है। सामान्य रसोई से कभी न मिलाया जाए।

6. न क्रोध, न विवाद: छठ के दिनों में कठोर वचन ऊर्जा तोड़ते हैं। कम बोलें। जो भी मिले उस पर मुस्कुराएँ।

7. प्रसाद सबको बाँटें: विशेषतः अजनबियों को। छठ प्रसाद किसी को देने से इनकार पाप माना जाता है।

छठी मैया क्या देती हैं (शास्त्रीय वचन):

  • संतान - छठी मैया शिशुजन्म की देवी हैं। निःसंतान दंपत्ति जो 3 वर्ष लगातार छठ करते हैं, उन्हें स्वस्थ संतान का आशीर्वाद।
  • स्वास्थ्य व दीर्घायु - सूर्य प्राण (जीवन ऊर्जा) का दृश्य रूप है, छठ व्रती अद्भुत स्वास्थ्य व आयु प्राप्त करते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति - छठ पर अर्घ्य देते समय ली गई मन्नत शुद्ध भाव से एक वर्ष में पूर्ण होती है।
  • पारिवारिक सौहार्द - साथ छठ करने वाले घर पीढ़ियों तक एक रहते हैं।
  • त्वचा व नेत्र स्वास्थ्य - सूर्योदय/सूर्यास्त के प्रकाश में सूर्य मंत्र जपते खड़े रहना त्वचा रोग मिटाता, दृष्टि सुधारता है। आधुनिक विटामिन-D विज्ञान भी सहमत।

छठ प्रसाद: ठेकुआ, फल व क्यों हर अर्पण घर में बनाया जाना चाहिए

छठ का प्रसाद समस्त हिंदू भक्ति में अद्वितीय है: बिना नमक, बिना प्याज, बिना लहसुन और बिना जमीन छुए बनाया जाता है।

अनिवार्य छठ प्रसाद:

1. ठेकुआ: गेहूँ का आटा, गुड़ और शुद्ध घी। मैदा, चीनी, तेल नहीं। ठेकुआ साँचे से बनाएँ। 2026: खरना दिन, 27 अक्टूबर को तैयार करें। 2. गाँठ गोभी: साबूत अर्पित, समृद्धि प्रतीक। 3. गन्ना (साबूत डंठल): 5+ डंठल, सूप का आधार। 4. मौसमी फल (साबूत): नारियल, केले का गुच्छा, मोसम्बी, चकोतरा, सिंघाड़ा, कच्चा केला, आँवला। 5. बाँस की सूप: प्रसाद पारंपरिक बाँस की सूप में - प्लास्टिक ट्रे में नहीं।

प्रसाद तैयारी के नियम: रसोई गोबर-जल से साफ; जूते नहीं; व्रती ने स्नान किया हो; अर्घ्य से पहले न चखें; सूप में रखने के बाद अर्घ्य तक न निकालें।

घर का बना क्यों अनिवार्य: व्रती का प्रेम, भक्ति और परिश्रम अर्पण का हिस्सा है - दुकान से नहीं खरीदा जा सकता।

छठ सूर्य की पूजा क्यों करता है - वैदिक विज्ञान व संध्या अर्घ्य की शक्ति

हिंदू धर्म में सभी प्रकृति-पूजा परंपराओं में, छठ का सौर पूजन सबसे वैज्ञानिक रूप से संगत है।

वैदिक परंपरा में सूर्य:

  • "सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च" - सूर्य सभी चल-अचल का आत्मा है (ऋग्वेद)
  • 12 आदित्यों में विवस्वत, पूषन, विष्णु - सूर्य बहुआयामी देव
  • सूर्य - शनि, यम और यमुना के पिता

संध्या अर्घ्य का वैज्ञानिक महत्व: सूर्यास्त पर किरणें न्यूनतम UV के साथ चरम अवरक्त विकिरण देती हैं। सूर्योदय पर दिन की सर्वाधिक प्राण शक्ति। कार्तिक जल में स्नान प्रतिरक्षा को सक्रिय करता है। 36 घंटे निर्जला उपवास कोशिकीय स्वच्छता (ऑटोफेजी) उत्प्रेरित करता है।

सूर्य की पूजा से लाभ: बच्चों का स्वास्थ्य, नेत्र-चर्म रोग सुधार, सरकारी करियर, परिवार समृद्धि।

वंदना ऐप में पूर्ण आदित्य हृदयम्, सूर्य स्तुति व दैनिक सूर्य नमस्कार मार्गदर्शिका उपलब्ध।

घर पर छठ घाट कैसे बनाएँ - प्रवासी व शहरी भक्तों के लिए

घर पर छठ घाट कैसे बनाएँ - प्रवासी व शहरी भक्तों के लिए

लाखों छठ भक्त - लंदन, न्यूयॉर्क, दुबई, सिंगापुर में - नदी की सुलभता बिना छठ करते हैं। घर पर पवित्र घाट बनाने का तरीका:

शास्त्रीय आधार: अर्घ्य जल में दिया जाना आवश्यक - प्राकृतिक जलाशय अनिवार्य नहीं। जल ही गंगा - भक्ति से चढ़ाया हर जल गंगा है।

घर पर छठ घाट:

विकल्प 1 - बड़ा पात्र: गंगाजल से साफ बाथटब या 100+ लीटर का ड्रम। स्वच्छ जल + 5 चम्मच गंगाजल। सूर्य दिखने वाली जगह पर छत/बालकनी पर।

विकल्प 2 - जमीन पर छोटा कुंड: छत पर ~2x2x2 फुट गड्ढा, मिट्टी/प्लास्टिक शीट से लाइन, जल + गंगाजल।

घाट स्थापना: 1. पश्चिम मुख (सूर्यास्त अर्घ्य), पूर्व मुख (सूर्योदय अर्घ्य) 2. गंगाजल और गोबर-जल से क्षेत्र शुद्ध 3. गन्ना-बाँस से प्रतीकात्मक घाट आर्च 4. 11 मिट्टी के दीये पात्र के किनारे 5. बाँस की सूप उठे हुए आसन पर

अर्घ्य के बाद: घाट का जल पौधे की मिट्टी में डालें - नाली में नहीं।

वंदना ऐप में होम-घाट चेकलिस्ट व अंतरराष्ट्रीय शहरों सहित अर्घ्य काउंटडाउन टाइमर।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मैं बिना नदी जाए छठ व्रत रख सकता/सकती हूँ?+

हाँ। यदि आप शहर या अपार्टमेंट में रहते हैं जहाँ नदी/तालाब उपलब्ध नहीं, बड़े टब या बाल्टी में 1 कप गंगाजल मिला स्वच्छ जल भरें, छत या बालकनी पर रखें, अर्घ्य के समय उसमें खड़े हों। मुंबई-दिल्ली के कई निवासी ऐसे करते हैं। व्रत श्रद्धा पर आधारित है, भूगोल पर नहीं। फिर भी समीप सोसाइटी तालाब/पूल हो तो उसे उपयोग करें (खाली व स्वच्छ, क्लोरीन रहित)।

क्या पुरुष छठ व्रत रख सकते हैं?+

पूर्णतः। छठ की विशेषता है कि पुरुष, महिला, बच्चे सभी समान रूप से यह व्रत रखते हैं। वास्तव में कर्ण - जो पुरुष थे - छठ प्रतिदिन वर्षों तक करते रहे। कई बिहारी परिवारों में पुरुष व्रती होते हैं, विशेषतः विशिष्ट मनोकामना हेतु जैसे पुत्र विवाह, नौकरी, परिवार स्वास्थ्य। दोनों के लिए नियम समान।

यदि एक अर्घ्य गलती से छूट जाए तो?+

संध्या अर्घ्य या उषा अर्घ्य छूटना बड़ी भूल मानी जाती है। स्वीकृत प्रथा: व्रत का शेष भाग पूर्ण करें, प्रसाद बाँटें, और अगले वर्ष नहाय खाय से पूर्ण व्रत पुनः आरंभ करें। कुछ पंडित 40 दिनों में सूर्य शांति पूजा की सलाह देते हैं। निराश न हों - श्रद्धा अनेक त्रुटियों को ढकती है। छठी मैया करुणामयी हैं; उनका व्रत हर बार अधिक शक्ति से पुनः आरंभ होता है।

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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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