दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली माँ दुर्गा के 108 नामों की पारंपरिक सूची है। अष्टोत्तर शत का अर्थ है 'एक सौ आठ', और नामावली का अर्थ है 'नामों की माला'। प्रत्येक नाम सामान्यतः ॐ उपसर्ग और नमः अंत सहित जपा जाता है, जैसे ॐ दुर्गायै नमः।
हर नाम देवी के एक रूप को प्रकट करता है - उनका सौंदर्य, उनकी शक्ति, उनकी करुणा, असुरों पर उनकी विजय। सभी 108 का जप उनकी पूर्ण स्तुति है, कोमल माता से लेकर असुर-संहारिणी तक। शतनामावली विशेषकर नवरात्रि में, अष्टमी और नवमी को, तथा देवी को समर्पित किसी भी मंगलवार या शुक्रवार को पढ़ी जाती है।
108 नामों में से एक चयन (अर्थ सहित)
नीचे पूरी 108 में से लगभग 25 प्रतिनिधि नाम दिए गए हैं, अनुवादांतरण और एक-पंक्ति अर्थ सहित। यह एक चयन है, पूरी सूची नहीं - पारंपरिक शतनामावली में सभी 108 नाम क्रम में होते हैं।
1. दुर्गा (Durga) - जो कष्टों को दूर करती हैं 2. शिवा (Shiva) - मंगलकारिणी, शिव की प्रिया 3. महालक्ष्मी (Mahalakshmi) - वैभव की महादेवी 4. महागौरी (Mahagauri) - तेजस्वी, गौर वर्ण वाली 5. चण्डी (Chandi) - उग्र रूप जो बुराई का नाश करती हैं 6. सर्वमंगला (Sarvamangala) - समस्त मंगल का स्रोत 7. भवानी (Bhavani) - जीवन देने वाली, भव (शिव) की शक्ति 8. अम्बिका (Ambika) - दिव्य माता 9. जगन्माता (Jaganmata) - जगत की माता 10. कात्यायनी (Katyayani) - ऋषि कात्यायन की पुत्री 11. कौमारी (Kaumari) - सदा युवा 12. पार्वती (Parvati) - पर्वतराज हिमवान की पुत्री 13. दुर्गमा (Durgama) - दुर्लभ, अजेय 14. सत्ता (Satta) - शुद्ध अस्तित्व, सत्ता स्वरूप 15. सत्यानन्दस्वरूपिणी (Satyanandasvarupini) - सत्य और आनंद स्वरूप 16. अनेकवर्णा (Anekavarna) - अनेक रूप और रंगों वाली 17. विद्या (Vidya) - ज्ञान की मूर्ति 18. विष्णुमाया (Vishnumaya) - विष्णु की दिव्य शक्ति 19. त्रिनेत्रा (Trinetra) - तीन नेत्रों वाली 20. शूलधारिणी (Shuladharini) - त्रिशूल धारण करने वाली 21. पिनाकधारिणी (Pinakadharini) - पिनाक धनुष धारिणी 22. चन्द्रघण्टा (Chandraghanta) - घंटे रूपी चंद्र वाली 23. महातपा (Mahatapa) - महान तप वाली 24. कालरात्रि (Kalaratri) - काली रात्रि जो समस्त बुराई का नाश करती हैं 25. भयविनाशिनी (Bhayavinashini) - समस्त भय की नाशिनी
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108 नामों का जप कैसे करें (जप विधि)
1. समय: स्नान के बाद प्रातः, या संध्या की पूजा बेला में। मंगलवार, शुक्रवार और नवरात्रि के दिन विशेष प्रभावशाली हैं। 2. आसन: माँ दुर्गा के चित्र के समक्ष स्वच्छ आसन पर पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठें। घी या तेल का दीप और धूप जलाएँ। 3. संकल्प: लाल पुष्प, कुमकुम, अक्षत और जल अर्पित करें, और भक्ति का संक्षिप्त संकल्प लें। 4. पाठ: प्रत्येक नाम को ॐ उपसर्ग और नमः अंत सहित जपें, चाहें तो हर नाम पर एक पुष्प या अक्षत अर्पित करें। सभी 108 को क्रम से करें। 5. माला: बहुत लोग 108 मनकों की माला का उपयोग करते हैं ताकि एक पूरी माला 108 नामों के बराबर हो। 6. समापन: दुर्गा आरती, रक्षा और शांति की प्रार्थना से समाप्त करें, और प्रसाद वितरित करें।
दुर्गा के 108 नामों के जप के लाभ

- रक्षा: देवी परम रक्षक हैं; उनके नाम भक्त को भय, नकारात्मकता और हानि से बचाते हैं, ऐसा माना जाता है।
- साहस और शक्ति: उग्र रूपों (चण्डी, कालरात्रि) का आह्वान कठिन समय में आंतरिक साहस देता है, ऐसा कहा जाता है।
- विघ्न निवारण: दुर्गा का अर्थ है कष्टों को हरने वाली; उनके नाम संकट में सहायता का आह्वान करते हैं।
- शांति और भक्ति: कोमल नाम (शिवा, महागौरी, सर्वमंगला) शांति, पवित्रता और स्थिर, प्रेमपूर्ण हृदय लाते हैं।
- आध्यात्मिक पुण्य: नवरात्रि में श्रद्धा से सभी 108 का पाठ पूरे परिवार के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
फल से अधिक, साधना स्वयं ही आशीर्वाद है - माँ के अनेक नामों को जिह्वा पर धारण करना हृदय को उनकी कृपा की ओर मोड़े रखता है।
त्वरित उत्तर
दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?+
यह माँ दुर्गा के 108 पवित्र नामों की पारंपरिक सूची है, प्रत्येक उनके एक रूप या शक्ति का वर्णन करता है। नाम सामान्यतः ॐ उपसर्ग और नमः अंत सहित जपे जाते हैं, जैसे ॐ दुर्गायै नमः।
108 नामों के जप का सबसे अच्छा समय कब है?+
स्नान के बाद प्रातः या संध्या पूजा में आदर्श है। मंगलवार, शुक्रवार और नवरात्रि के नौ दिन - विशेषकर अष्टमी और नवमी - सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं।
क्या नामों के जप के लिए माला चाहिए?+
माला सहायक है पर अनिवार्य नहीं। 108 मनकों की माला से एक पूरी माला 108 नामों के बराबर होती है। यदि माला न हो, तो आप श्रद्धा से सभी 108 नाम क्रम से पढ़ सकते हैं।
क्या यह दुर्गा सप्तशती के समान है?+
नहीं। अष्टोत्तर शतनामावली देवी के 108 नामों की माला है। दुर्गा सप्तशती (चण्डी पाठ) 700 श्लोकों का बड़ा ग्रंथ है जो असुरों पर उनकी विजय की कथा कहता है। दोनों उनकी पूजा में पढ़े जाते हैं।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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