शिव अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
शिव अष्टोत्तर शतनामावली भगवान शिव के 108 नामों (अष्ट + उत्तर + शत = 108) की माला है। प्रत्येक नाम (नामावली) ॐ उपसर्ग और नमः प्रत्यय के साथ जपा जाता है, जैसे ॐ शिवाय नमः।
शिव असीम हैं - बुराई के संहारक, कैलास के महान तपस्वी, प्रेममय भोलेनाथ, और ब्रह्मांडीय नर्तक नटराज। कोई एक नाम उन्हें नहीं समेट सकता, इसलिए परंपरा 108 देती है, हर नाम उनके किसी गुण की खिड़की। पूरी नामावली का पाठ पूर्ण पूजा है जो प्रभु के हर पक्ष को स्पर्श करती है।
अर्थ सहित प्रमुख नामों का चयन
नीचे पूर्ण 108 में से प्रतिनिधि चयन है; प्रत्येक परंपरागत रूप से ॐ ... नमः के रूप में जपा जाता है।
- शिव (Shiva) - मंगलमय
- महादेव (Mahadeva) - देवों के महान देव
- शंभु (Shambhu) - आनंद और कल्याण का स्रोत
- शंकर (Shankara) - सुख और शांति के दाता
- रुद्र (Rudra) - दुख के प्रचंड हर्ता
- नीलकण्ठ (Neelkanth) - विष पीने वाले नीलकंठ
- त्र्यम्बक (Tryambaka) - त्रिनेत्रधारी प्रभु
- गंगाधर (Gangadhara) - जटा में गंगा धारण करने वाले
- चन्द्रशेखर (Chandrashekhara) - मस्तक पर चंद्रमा धारण किए
- पशुपति (Pashupati) - समस्त प्राणियों के स्वामी
- विश्वनाथ (Vishwanatha) - ब्रह्मांड के स्वामी
- नटराज (Nataraja) - ब्रह्मांडीय नृत्य के राजा
- भोलेनाथ (Bholenath) - भोले, सहज प्रसन्न होने वाले प्रभु
- दिगम्बर (Digambara) - दिशाओं को वस्त्र मानने वाले, सर्वमुक्त
- गिरीश (Girisha) - पर्वतों के स्वामी
- उमापति (Umapati) - उमा (पार्वती) के पति
- त्रिपुरारी (Tripurari) - तीन असुर नगरों के संहारक
- औघड़ (Aughar) - निराला, निश्चिंत तपस्वी
- कपाली (Kapali) - कपाल धारी, मृत्यु से परे
- महेश्वर (Maheshwara) - परम स्वामी
- सोमनाथ (Somanatha) - चंद्रमा और अमृत के स्वामी
- हर (Hara) - पाप और शोक हरने वाले
यह परंपरागत 108 में से चयन है; पूर्ण अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ सभी नामों को समाहित करता है।
108 नामों का महत्व
संख्या 108 पवित्र है समस्त सनातन परंपरा में - यह माला के 108 मनकों में आती है, और अनेक रूपों में ब्रह्मांड से जुड़ी है। शिव के 108 नामों का जप उनके अनेक रूपों की पूर्ण यात्रा है।
हर नाम एक शिक्षा भी है। नीलकंठ स्मरण कराते हैं कि महान आत्माएँ संसार की रक्षा हेतु विष कंठ में धारण करती हैं। भोलेनाथ दर्शाते हैं कि परम सत्ता सबसे प्रेममयी और क्षमाशील भी है। नटराज सृष्टि और प्रलय को एक ही नृत्य रूप में प्रकट करते हैं। नामावली का पाठ शिव के सम्पूर्ण सत्य पर ध्यान है, उनके बुराई के प्रचंड संहार से लेकर भक्तों पर असीम करुणा तक।
लाभ और जप विधि

लाभ:
- मन की शांति और भय से मुक्ति
- बाधाओं, पापों और नकारात्मकता का नाश
- कठिनाई में शक्ति, साहस और स्थिरता
- भक्ति की गहराई और शांत, एकाग्र हृदय
- सहज प्रसन्न भोलेनाथ की कृपा
जप विधि: 1. श्रेष्ठ दिन: सोमवार, प्रदोष, शिवरात्रि और पूरा सावन (श्रावण) माह सर्वाधिक शुभ हैं। 2. तैयारी: शिवलिंग या शिव चित्र के समक्ष बैठें, घी का दीप जलाएँ और बिल्व (बेल) पत्र, जल और श्वेत पुष्प अर्पित करें। 3. पाठ करें पूर्ण अष्टोत्तर शतनामावली का, हर नाम ॐ ... नमः के रूप में, श्रेष्ठ है रुद्राक्ष माला से। 4. समय कम हो तो 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जप करें और नामों का चयन पढ़ें। 5. अभिषेक: पाठ करते हुए शिवलिंग पर जल या पंचामृत अर्पित करें, फिर शिव आरती से समापन करें।
शांत, श्रद्धामय पाठ भोलेनाथ को विस्तृत पर विचलित पाठ से कहीं अधिक प्रसन्न करता है।
त्वरित उत्तर
शिव अष्टोत्तर शतनामावली में कितने नाम हैं?+
इसमें 108 नाम हैं। 'अष्टोत्तर शतनामावली' का अर्थ है एक सौ आठ (अष्ट + उत्तर + शत = 108) नामों की माला, हर नाम 'ॐ ... नमः' के रूप में, जैसे ॐ शिवाय नमः।
नीलकंठ और नटराज जैसे नामों का क्या अर्थ है?+
नीलकंठ का अर्थ है 'नीले कंठ वाले', क्योंकि शिव ने संसार की रक्षा हेतु ब्रह्मांडीय विष पिया। नटराज का अर्थ है 'नृत्य के राजा', वह रूप जिसमें शिव सृष्टि और प्रलय का ब्रह्मांडीय नृत्य करते हैं।
शिव के 108 नाम जपने का श्रेष्ठ समय कब है?+
सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि और पूरा सावन माह सर्वाधिक शुभ हैं। शिवलिंग के समक्ष घी के दीप और बिल्व पत्र के साथ, श्रेष्ठ है रुद्राक्ष माला से पाठ करना परंपरागत विधि है।
क्या मैं सभी 108 के बजाय केवल कुछ नाम जप सकता हूँ?+
हाँ। यद्यपि पूर्ण नामावली का पाठ श्रेष्ठ है, 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जप और महादेव, शंकर व भोलेनाथ जैसे कुछ नामों पर मनन भी सच्ची और मान्य पूजा है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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