एकादशी क्या है, और वर्ष में 24 या 26 क्यों होती हैं
एकादशी हर चंद्र मास में दो बार आती है - शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को। वर्ष के बारह महीनों में यह चौबीस एकादशियां बनती हैं, हर एक भगवान विष्णु को समर्पित और अपनी अलग कथा व महत्व वाली।
अधिक मास वाले वर्ष में दो अतिरिक्त एकादशियां - पद्मिनी और परमा - जुड़ जाती हैं, जिससे कुल संख्या छब्बीस हो जाती है। यह सूची चैत्र से फाल्गुन तक सभी चौबीस एकादशियों को क्रमवार, छह-छह के समूह में प्रस्तुत करती है ताकि याद रखना सरल हो।
- सामान्य वर्ष में 24, अधिक मास वर्ष में 26 एकादशी
- सभी भगवान विष्णु को समर्पित
- व्रत के नियम एकादशी और परिवार-परंपरा अनुसार भिन्न हो सकते हैं
चैत्र से ज्येष्ठ तक: पहली छह एकादशियां
हिंदू वर्ष चैत्र मास से आरंभ होता है, और पहला समूह वसंत से ग्रीष्म तक की छह एकादशियों का है।
- पापमोचनी एकादशी (चैत्र कृष्ण) - पूर्व पापों से मुक्ति के लिए
- कामदा एकादशी (चैत्र शुक्ल) - इच्छापूर्ति और पाप-मुक्ति के लिए
- वरुथिनी एकादशी (वैशाख कृष्ण) - कष्टों से रक्षा और दान तुल्य पुण्य
- मोहिनी एकादशी (वैशाख शुक्ल) - विष्णु के मोहिनी अवतार का स्मरण
- अपरा एकादशी (ज्येष्ठ कृष्ण) - पाप-मुक्ति, यश और समृद्धि हेतु
- निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल) - सबसे कठोर, पूर्णतः जल-रहित व्रत, माना जाता है कि इसका पुण्य वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर है
निर्जला एकादशी विशेष रूप से उन भक्तों में प्रिय है जो वर्षभर सभी एकादशी नहीं रख पाते, क्योंकि इसे अकेले रखने से भी पूरे वर्ष का पुण्य मिलने की मान्यता है।
आषाढ़ से भाद्रपद तक: वर्षा ऋतु की एकादशियां
यह समूह वर्षा ऋतु और चातुर्मास के आरंभ की एकादशियों का है।
- योगिनी एकादशी (आषाढ़ कृष्ण) - रोग और पूर्वजन्म के दोषों से मुक्ति हेतु
- देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल) - विष्णु जी की योगनिद्रा और चातुर्मास का आरंभ, इसके बाद शुभ कार्य रुक जाते हैं
- कामिका एकादशी (श्रावण कृष्ण) - श्रावण मास में पापों से मुक्ति हेतु
- पुत्रदा एकादशी (श्रावण शुक्ल) - संतान प्राप्ति की कामना से रखी जाती है
- अजा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण) - राजा हरिश्चंद्र की कथा से जुड़ी
- परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल) - विष्णु जी के करवट बदलने का दिन
📿 वंदना ऐप हर एकादशी से पहले उस दिन की कथा और व्रत नियम सहित स्मरण भेजता है, ताकि आपको अलग से कैलेंडर देखने की आवश्यकता न पड़े।
आश्विन से मार्गशीर्ष तक: उत्सव काल की एकादशियां

यह समूह नवरात्रि से दिवाली तक के उत्सव काल की एकादशियों का है।
- इंदिरा एकादशी (आश्विन कृष्ण) - पितरों की मुक्ति हेतु, पितृ पक्ष में पड़ती है
- पापांकुशा एकादशी (आश्विन शुक्ल) - पापों के नाश हेतु, नवरात्रि में
- रमा एकादशी (कार्तिक कृष्ण) - दिवाली से ठीक पहले
- देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल) - विष्णु जी के जागने और चातुर्मास समाप्ति का दिन, तुलसी विवाह से जुड़ा, इसके बाद विवाह मुहूर्त पुनः आरंभ होते हैं
- उत्पन्ना एकादशी (मार्गशीर्ष कृष्ण) - एकादशी देवी की उत्पत्ति की कथा
- मोक्षदा एकादशी (मार्गशीर्ष शुक्ल) - पितृ मुक्ति हेतु, गीता जयंती के साथ
देवउठनी एकादशी के बाद ही विवाह मुहूर्त पुनः आरंभ होते हैं, इसलिए यह तिथि विशेष प्रतीक्षा से मनाई जाती है।
पौष से फाल्गुन तक: अंतिम छह एकादशियां
वर्ष चक्र की अंतिम छह एकादशियां शीत ऋतु से होली तक चलती हैं।
- सफला एकादशी (पौष कृष्ण) - कार्यों में सफलता हेतु
- पुत्रदा एकादशी (पौष शुक्ल) - दक्षिण भारत में वैकुंठ एकादशी कहलाती है
- षटतिला एकादशी (माघ कृष्ण) - तिल के छह प्रयोगों से पूजा
- जया एकादशी (माघ शुक्ल) - भैमी एकादशी भी कहलाती है
- विजया एकादशी (फाल्गुन कृष्ण) - राम जी की लंका यात्रा से जुड़ी
- आमलकी एकादशी (फाल्गुन शुक्ल) - आंवला वृक्ष पूजा हेतु
वैकुंठ एकादशी पर श्रीरंगम और तिरुपति में विशाल भीड़ उमड़ती है, जब भक्त वैकुंठ द्वार से दर्शन करते हैं।
अधिक मास की अतिरिक्त एकादशियां और सामान्य नियम
अधिक मास वाले वर्ष में दो अतिरिक्त एकादशियां जुड़ती हैं - पद्मिनी (शुक्ल पक्ष) और परमा (कृष्ण पक्ष) - जो लगभग हर 32-33 महीने में एक बार ही आती हैं और इसलिए विशेष पुण्यदायी मानी जाती हैं।
सभी एकादशियों पर लागू सामान्य नियम:
- चावल और चावल से बने पदार्थ वर्जित माने जाते हैं
- लहसुन, प्याज और कुछ दालें भी वर्जित हैं
- व्रत सामान्यतः अगले दिन द्वादशी को पारण समय पर खोला जाता है
- तुलसी पत्र पूजा हेतु आवश्यक हैं, परंतु उसी दिन तोड़े नहीं जाते
- कई भक्त वर्षभर की सभी एकादशी न रखकर कुछ विशेष एकादशी ही श्रद्धा से रखते हैं
यह सूची पूरे वर्ष संदर्भ के रूप में उपयोगी है।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
एक वर्ष में कितनी एकादशी होती हैं?+
सामान्य वर्ष में 24 एकादशी होती हैं, हर महीने दो। अधिक मास वाले वर्ष में दो अतिरिक्त एकादशी जुड़ने से कुल संख्या 26 हो जाती है।
वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन-सी मानी जाती है?+
ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे अकेले रखने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य मिलने की मान्यता है।
एकादशी पर चावल क्यों वर्जित है?+
मान्यता है कि ऋषि मेधा दुर्वासा के श्राप के बाद चावल के दानों में समा गए थे, इसलिए एकादशी पर चावल खाना अनुचित माना जाता है।
दोनों पुत्रदा एकादशी में क्या अंतर है?+
वर्ष में दो पुत्रदा एकादशी आती हैं - एक श्रावण में (पवित्रा एकादशी) और एक पौष में (दक्षिण भारत में वैकुंठ एकादशी)। दोनों संतान प्राप्ति हेतु रखी जाती हैं, पर अलग महीनों और परंपराओं में।
यदि मैं हर एकादशी व्रत न रख पाऊं तो क्या करें?+
अधिकांश भक्त सभी 24 व्रत नहीं रख पाते। कुछ विशेष एकादशी श्रद्धा से रखना और शेष पर केवल चावल त्याग व प्रार्थना करना भी पूर्णतः स्वीकार्य है।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
Meet the Vandnaa editorial team →Explore on Vandnaa
संबंधित लेख

एकादशी सूची 2026 - सभी 24 तिथियाँ, नाम, व्रत विधि + महत्व
11 मिनट पढ़ें

निर्जला एकादशी 2026: तिथि, व्रत विधि और क्यों यह सालभर की 24 एकादशियों के बराबर है
9 मिनट पढ़ें

प्रदोष व्रत बनाम मासिक शिवरात्रि: दोनों मासिक शिव व्रतों की तुलना
7 मिनट पढ़ें

दिनचर्या: सूर्योदय से नींद तक हिंदू दैनिक आध्यात्मिक जीवनशैली
7 मिनट पढ़ें