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निर्जला एकादशी 2026: तिथि, व्रत विधि और क्यों यह सालभर की 24 एकादशियों के बराबर है
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निर्जला एकादशी 2026: तिथि, व्रत विधि और क्यों यह सालभर की 24 एकादशियों के बराबर है

9 मिनट पढ़ेंअद्यतन फ़रवरी 13, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

निर्जला एकादशी क्यों सभी व्रतों का राजा है

एक बार महर्षि व्यास ने पांडवों को वर्ष की सभी 24 एकादशियाँ समझाईं। युधिष्ठिर, अर्जुन व अन्य ने स्वीकार कर लिया - वे ये व्रत रख सकते थे।

भीम घबरा गए। 'गुरुदेव, मैं तीन घंटे भी भूखा नहीं रह सकता। 24 व्रत कैसे रखूँगा?'

व्यास मुस्कुराए। 'तो केवल एक रखो - निर्जला एकादशी। 24 घंटे न अन्न, न जल की एक बूँद। इसका पुण्य 24 एकादशियों के बराबर है।'

उसी दिन से निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहते हैं। यह एकमात्र व्रत है जिसमें मुख धोने के लिए भी जल वर्जित है।

निर्जला एकादशी 2026 शनिवार, 6 जून 2026 को है। एकादशी 6 जून सुबह 2:15 से 7 जून सुबह 4:47 तक रहेगी। पारण समय रविवार, 7 जून सुबह 5:23 – 7:08 है।

प्रचंड गर्मी में पड़ने के कारण यह व्रत शरीर की हर सीमा की परीक्षा लेता है। फिर भी करोड़ों इसे रखते हैं क्योंकि स्वयं विष्णु जी ने वचन दिया है: 'जो निर्जला एकादशी रखता है, उसे जीवन के अंत में मोक्ष मिलता है - चाहे अन्य सभी पाप शेष हों।'

🙏 निर्जला एकादशी की सूर्योदय बेला पर वंदना ऐप खोलें - विष्णु सहस्रनाम सिंक्ड लिरिक्स के साथ सुनें, उपवास से शिथिल शरीर के लिए सही आध्यात्मिक साथी।

निर्जला एकादशी 2026 - तिथि, व्रत व पारण समय

📅 व्रत तिथि: शनिवार, 6 जून 2026 🕒 एकादशी प्रारंभ: 6 जून 2026, सुबह 2:15 🕒 एकादशी समाप्त: 7 जून 2026, सुबह 4:47

व्रत अवधि (अन्न-जल त्याग): 6 जून सूर्योदय (5:22) → 7 जून सूर्योदय (5:23) = पूरे 24 घंटे।

📅 पारण तिथि: रविवार, 7 जून 2026 🕒 श्रेष्ठ पारण समय: सुबह 5:23 – 7:08 (द्वादशी सूर्योदय के बाद) 🕒 हरि वासर समाप्ति (इसके बाद ही पारण): 7 जून सुबह 9:11

महत्वपूर्ण नियम: द्वादशी सूर्योदय से पहले या द्वादशी तिथि समाप्त होने के बाद पारण से व्रत का फल शून्य हो जाता है। अपने शहर का सूर्योदय समय अवश्य देखें।

निर्जला एकादशी व्रत की पूरी विधि (4 चरण)

चरण 1 - दशमी संध्या (5 जून): सूर्यास्त से पहले केवल एक सात्विक भोजन। शाम 6 के बाद अन्न नहीं। दाँत मांजकर अंतिम जल 10 बजे तक पीएं। जल्दी सोएं। व्रत तकनीकी रूप से इसी अंतिम घूँट से शुरू।

चरण 2 - एकादशी सूर्योदय (6 जून, 5:22): उठें। ठंडे जल से स्नान। स्वच्छ पीले/सफेद वस्त्र। विष्णु जी के सम्मुख पूजा में बैठकर संकल्प लें: 'मैं, [नाम], अपने व परिवार के मोक्ष हेतु निर्जला एकादशी व्रत धारण करता/करती हूँ।'

चरण 3 - दिनभर साधना: न अन्न, न जल, न थूकना, न दिन में सोना। दिन बिताएं: विष्णु सहस्रनाम पाठ (1 चक्र = 1 घंटा), भगवद्गीता अध्याय 12, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 108×11 जाप, विष्णु भजन। टीवी, निंदा, क्रोध से बचें।

चरण 4 - संध्या आरती व जागरण: सूर्यास्त पर विष्णु के सम्मुख घी का दीप जलाएं। आरती करें। कई भक्त मध्यरात्रि तक जागरण करते हैं। मध्यरात्रि बाद सो सकते हैं पर जल अब भी वर्जित।

पारण (7 जून प्रातः): पारण से पहले उठें। स्नान करें। गरीबों को जल-पात्र, पंखे, गन्ने का रस, फल दान करें (अत्यंत महत्वपूर्ण - आज के दिन जल दान विशेष रूप से मोक्ष देता है)। फिर पहले तुलसी-जल पिएं, फिर सात्विक भोजन से व्रत खोलें।

किन्हें निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए

किन्हें निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए

सनातन धर्म कभी शरीर को हानि पहुँचाने को नहीं कहता। शास्त्र स्वयं इन्हें छूट देते हैं:

  • गर्भवती व स्तनपान कराती माताएं - फलाहार (फल + जल) एकादशी रखें।
  • मधुमेह, BP, किडनी रोगी - जल आपके लिए औषधि है; डॉक्टर अनुष्ठान से ऊपर।
  • 18 से कम बच्चे - शरीर विकसित हो रहा है; एक सात्विक भोजन लें।
  • 70 से ऊपर वृद्धजन - जल + दूध के साथ अंशिक व्रत।
  • दवा पर रहने वाले - न्यूनतम जल से दवा लें; व्रत भंग नहीं होता।
  • गर्मी में शारीरिक श्रम करने वाले - हीटस्ट्रोक का वास्तविक खतरा।

इनमें से किसी भी श्रेणी में हैं तो 'सफल एकादशी' शैली व्रत करें - एक फल भोजन + असीमित जल + पूर्ण विष्णु साधना। शुद्ध भाव से फल समान है। विष्णु जी आपकी भक्ति देखते हैं, निर्जलीकरण नहीं।

एकादशी उपवास सर्वोच्च वैष्णव व्रत क्यों है

वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं। प्रत्येक के अपने नाम और विशिष्ट लाभ हैं। पर सभी एकादशियाँ एक साझा विषय रखती हैं - भगवान विष्णु का सम्मान।

एकादशी उपवास का विज्ञान: प्रत्येक चंद्र पक्ष के 11वें दिन का संबंध चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से है। प्राचीन ऋषियों ने देखा कि इस दिन पाचन तंत्र स्वाभाविक रूप से धीमा होता है, मन हल्का और आध्यात्मिक ग्रहणशीलता बढ़ती है।

आधुनिक शोध: रुक-रुककर उपवास (intermittent fasting) शोध पुष्टि करता है कि 24 घंटे का उपवास autophagy बढ़ाता है और संज्ञानात्मक स्पष्टता सुधारता है। ऋषियों ने यही 5000 वर्ष पहले बताया था।

निर्जला एकादशी सर्वोच्च क्यों: ब्रह्म वैवर्त पुराण में भीम (पांडव) ने ऋषि व्यास से कहा कि वे एकादशी के भोजन प्रतिबंध का पालन नहीं कर सकते - उनका शरीर बहुत बड़ा था। व्यास ने कहा: 'वर्ष में केवल एक एकादशी करो - निर्जला - बिना अन्न, बिना जल। इससे 24 एकादशियों का पुण्य मिलेगा।'

24 एकादशियों में से सबसे महत्वपूर्ण:

  • निर्जला एकादशी (जून) और देवशयनी एकादशी (जुलाई - जब विष्णु चातुर्मास के लिए योग निद्रा में जाते हैं)

जो सभी 24 नहीं कर सकते: केवल 4 एकादशियाँ करें - आषाढ़ की दो (निर्जला और देवशयनी) + कार्तिक की दो।

🙏 वंदना ऐप में 2026 की 24 एकादशियाँ - नाम, लाभ और व्रत रिमाइंडर सहित।

निर्जला एकादशी 2026: बिना जल उपवास की व्यावहारिक गाइड

निर्जला एकादशी 2026: शनिवार, 6 जून 2026 (ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी)। उपवास 6 जून सूर्योदय से शुरू, 7 जून द्वादशी पारण तक।

'बिना जल' नियम को समझें:

  • कठोर व्याख्या: कोई जल नहीं, केवल आचमन (पूजा में 3 बूँद मंत्र के साथ)
  • उदार व्याख्या: जल मान्य है पर अन्न बिल्कुल नहीं। वृद्ध, रोगी, बच्चे, गर्भवती महिलाओं, गुर्दे की समस्या वाले - इस संस्करण का पालन करें।

तैयारी कैसे करें:

  • एक दिन पहले (5 जून - दशमी): हल्का सात्विक भोजन, रात 8 बजे के बाद कुछ नहीं
  • एकादशी की सुबह: स्नान, विष्णु पूजा
  • पारण: 7 जून, द्वादशी सूर्योदय के बाद - धीरे-धीरे फल या हल्की खिचड़ी से शुरू

निर्जला एकादशी पर 5 मुख्य अभ्यास: 1. तुलसी पत्र से विष्णु पूजा 2. विष्णु सहस्रनाम श्रवण 3. OM NAMO BHAGAVATE VASUDEVAYA तुलसी माला पर 108 बार 4. जल, भोजन, छाता दान (ग्रीष्म ऋतु में अत्यंत पुण्यकारी) 5. रात जागरण और कीर्तन (संभव हो तो)

पहली बार करने वालों के लिए: 100% कठोरता जरूरी नहीं। फल-आधारित उपवास और विष्णु भक्ति भी गहरा पुण्य देती है। हर वर्ष तपस्या बढ़ाएं।

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दैनिक विष्णु भक्ति अभ्यास का निर्माण - केवल एकादशी से आगे

दैनिक विष्णु भक्ति अभ्यास का निर्माण - केवल एकादशी से आगे

एकादशी चोटी है - पर विष्णु की कृपा उनके प्रतिदिन के अभ्यासियों पर निरंतर बहती है:

5 मिनट का दैनिक विष्णु अभ्यास: 1. प्रतिदिन विष्णु के चित्र/शालिग्राम के सामने घी या तुलसी तेल का दीया 2. तुलसी पत्र अर्पण 3. OM NAMO BHAGAVATE VASUDEVAYA 11 बार 4. भगवद्गीता का एक श्लोक या विष्णु सहस्रनाम का एक नाम 5. 'हरि ओम' से समापन

विष्णु के 4 पवित्र प्रतीक: 1. शंख - सृष्टि का आदि नाद 2. सुदर्शन चक्र - धर्म का पहिया 3. गदा - धर्म-सेवा की शक्ति 4. पद्म - कठिनाई से उठने वाली सुंदरता

श्रेष्ठ पूजा समय: ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे) आदर्श है।

विष्णु भक्ति के लिए पठन मार्ग:

  • प्रारंभिक: विष्णु सहस्रनाम (दैनिक)
  • मध्यवर्ती: भागवत पुराण (प्रतिदिन एक अध्याय)
  • उन्नत: रामायण + भगवद्गीता (बारी-बारी अध्याय)

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पाठकों के प्रश्न

क्या निर्जला एकादशी में मुख धो सकते हैं या दाँत साफ कर सकते हैं?+

कठोर अर्थ में, नहीं - मुख में एक बूँद जल भी व्रत भंग करता है। पिछली रात दाँत भली-भाँति साफ करें। दिन में 2–3 ताज़ा नीम या तुलसी पत्र चबाकर मुख ताज़ा करें। कुछ परंपराएँ बिना निगले जल कुल्ला कर थूकने की अनुमति देती हैं - अपने कुल/गुरु परंपरा का पालन करें।

यदि व्रत के दौरान भूल से जल पी लूँ तो?+

घबराएं नहीं। सच्ची भूल से पूरा व्रत नष्ट नहीं होता। तुरंत विष्णु जी से क्षमा माँगें, 108 बार 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें और शेष व्रत कठोरता से जारी रखें। प्रायश्चित्त रूप एक अतिरिक्त एकादशी व्रत का संकल्प लें। विष्णु परम दयालु हैं - वे भाव देखते हैं, दुर्घटना नहीं।

निर्जला एकादशी पर अधिकतम पुण्य के लिए क्या दान करें?+

जल से संबंधित वस्तुएं आज सहस्र गुना पुण्य देती हैं। दान करें: जल भरे मटके, हाथ के पंखे, छाते, गन्ने का रस, तरबूज, सत्तू पेय, चप्पल और श्वेत सूती वस्त्र। आज राहगीरों के लिए 'पियाऊ' (मुफ्त जल स्टॉल) लगाना स्वयं व्रत के समान मोक्ष देता है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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