एकवीरा देवी कौन हैं
लोणावला के निकट, मुंबई-पुणे मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक कार्ला गुफाओं के समीप एक पहाड़ी पर एकवीरा देवी का मंदिर है, जिन्हें अनेक भक्त यक्वीरा भी कहते हैं। उन्हें मातृ शक्ति के तेजस्वी स्वरूप के रूप में पूजा जाता है, और वे विशेष रूप से कोंकण एवं मुंबई तटीय क्षेत्र के कोली मछुआरा समुदाय की कुलदेवी के रूप में अत्यंत प्रिय हैं।
उनका मंदिर प्राचीन गुफाओं के निकट शांत भाव से स्थित है, जो इस पहाड़ी की पीढ़ियों पुरानी पवित्र भक्ति का स्मरण कराता है।
इतिहास और कथा
मान्यता है कि यह पहाड़ी सदियों से देवी पूजा का केंद्र रही है, जिसकी पवित्रता समीप स्थित प्रसिद्ध बौद्ध गुफाओं से भी पुरानी मानी जाती है, जो स्वयं में एक अलग ऐतिहासिक धरोहर हैं। भक्त क्षेत्रीय कथाओं का स्मरण करते हैं जिनमें देवी ने समुद्र और यात्रा पर निकलने वाले परिवारों को उनकी प्रार्थना सुनकर सुरक्षा प्रदान की।
पीढ़ियों के दौरान, उनकी पूजा एक साधारण पहाड़ी मंदिर से मुंबई-पुणे क्षेत्र के परिवारों के सबसे प्रिय तीर्थ स्थलों में से एक बन गई।
महत्व और भक्तों की मनोकामनाएं
विशेष रूप से कोली समुदाय के लिए एकवीरा देवी आजीविका और परिवार की रक्षक हैं:
- समुद्र में यात्रा करने वाले परिजनों की सुरक्षा
- मछली पकड़ने और व्यापार में समृद्धि
- परिवार की सुरक्षा और एकता
- विवाह और नए कार्यों से पूर्व आशीर्वाद
चैत्र पूर्णिमा के दिन मुंबई के संपूर्ण कोली परिवार एक साथ यात्रा करते हैं, और पहाड़ी की यह चढ़ाई स्वयं में भक्ति का अर्पण मानी जाती है।
दर्शन मार्गदर्शिका: समय और त्योहार

श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचने के लिए पत्थर की सीढ़ियां चढ़ते हैं, जहां प्रतिदिन प्रातः और सायं आरती का नियमित क्रम चलता है।
चैत्र पूर्णिमा का मेला मंदिर का सबसे बड़ा अवसर है, जब पहाड़ी कोली परिवारों, ढोल-नगाड़ों और शोभायात्राओं से भर जाती है, जो इसे मुंबई-पुणे क्षेत्र के सबसे जीवंत सामुदायिक उत्सवों में से एक बनाता है।
कार्ला कैसे पहुंचें
मंदिर कार्ला गांव के निकट, मुंबई-पुणे राजमार्ग से थोड़ी दूरी पर, लोणावला के समीप स्थित है।
- निकटतम रेलवे स्टेशन: मळवली या लोणावला
- निकटतम हवाई अड्डा: पुणे
- सड़क मार्ग से: एक्सप्रेसवे के माध्यम से मुंबई और पुणे दोनों से सुगमता से पहुंचा जा सकता है, पहाड़ी की तलहटी से थोड़ी चढ़ाई शेष रहती है।
जप हेतु मंत्र और सार
भक्त ॐ एकवीरा देव्यै नमः मंत्र का जप करते हैं, साथ ही यात्रा के दौरान दुर्गा और अंबा के सामान्य मंत्र भी पढ़ते हैं।
कोली समुदाय के साथ एकवीरा का यह चिरस्थायी संबंध दर्शाता है कि भक्ति पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के साथ यात्रा करती है, चाहे समुद्र हो या मार्ग। यहां की आराधना श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, कोई लेन-देन नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्ला की एकवीरा देवी की पूजा कौन करता है?+
उन्हें विशेष रूप से महाराष्ट्र के कोली मछुआरा समुदाय की कुलदेवी माना जाता है, हालांकि मुंबई-पुणे क्षेत्र के भक्त भी इस पहाड़ी मंदिर के दर्शन करते हैं।
एकवीरा देवी मंदिर का मुख्य उत्सव कब मनाया जाता है?+
सबसे बड़ा आयोजन चैत्र पूर्णिमा का मेला है, जब कोली परिवार एक जीवंत सामुदायिक उत्सव में साथ मिलकर पहाड़ी चढ़ते हैं।
कार्ला के निकट एकवीरा देवी मंदिर कैसे पहुंचें?+
मंदिर लोणावला के निकट मुंबई-पुणे राजमार्ग से थोड़ी दूरी पर है; निकटतम रेलवे स्टेशन मळवली और निकटतम हवाई अड्डा पुणे है।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
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