गणेश अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
गणेश अष्टोत्तर शतनामावली भगवान गणेश के 108 नामों की माला है, शिव और पार्वती के गजमुख पुत्र, जो हर हिंदू अनुष्ठान में सर्वप्रथम पूजे जाते हैं। प्रत्येक नाम ॐ ... नमः के रूप में जपा जाता है, जैसे ॐ गणेशाय नमः।
गणेश विघ्नहर्ता (बाधाओं के हर्ता) और विघ्नकर्ता (आवश्यकता पर बाधा रखने वाले) हैं, आरंभ के स्वामी और बुद्धि व सिद्धि के दाता। उनके 108 नाम उनके स्वरूप, शक्तियों और प्रेममय स्वभाव का वर्णन करते हैं। इनका पाठ किसी भी नए कार्य को आरंभ करने और सफलता व सौभाग्य के आशीर्वाद का आह्वान करने का शुभ तरीका है।
अर्थ सहित प्रमुख नामों का चयन
नीचे पूर्ण 108 में से प्रतिनिधि चयन है; प्रत्येक ॐ ... नमः के रूप में जपा जाता है।
- गणेश (Ganesha) - गणों (शिव के सेवकों) के स्वामी
- गणपति (Ganapati) - गणों के नायक
- विघ्नहर्ता (Vighnaharta) - बाधाओं के हर्ता
- विनायक (Vinayaka) - परम नायक और हर्ता
- गजानन (Gajanana) - गजमुख वाले
- लम्बोदर (Lambodara) - विशाल उदर वाले
- एकदन्त (Ekadanta) - एक दाँत वाले
- वक्रतुण्ड (Vakratunda) - वक्र सूँड वाले
- गौरीसुत (Gaurisuta) - गौरी (पार्वती) के पुत्र
- हेरम्ब (Heramba) - दीन-दुर्बल के रक्षक
- धूम्रवर्ण (Dhumravarna) - धूम्र वर्ण वाले
- विकट (Vikata) - विशाल, बलशाली रूप
- गणाध्यक्ष (Ganadhyaksha) - गणों के अध्यक्ष
- भालचन्द्र (Bhalachandra) - मस्तक पर चंद्र धारी
- मूषकवाहन (Mushakavahana) - जिनका वाहन मूषक है
- सिद्धिविनायक (Siddhivinayaka) - सफलता के दाता
- मंगलमूर्ति (Mangalamurti) - मंगल की मूर्ति
- एकाक्षर (Ekakshara) - एक अक्षर वाले (ॐ / गं)
- बुद्धिप्रिय (Buddhipriya) - बुद्धि के प्रेमी और दाता
- सुमुख (Sumukha) - सुंदर मुख वाले
- कपिल (Kapila) - कपिल वर्ण वाले
- प्रसन्नमूर्ति (Prasannamurti) - सदा प्रसन्न रूप
यह परंपरागत 108 में से चयन है; पूर्ण अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ सभी नामों को समाहित करता है।
108 नामों का महत्व
क्योंकि गणेश हर अनुष्ठान में सर्वप्रथम पूजे जाते हैं, उनके 108 नाम हिंदू घरों में सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली मालाओं में हैं। कई नाम उनके अनोखे स्वरूप का वर्णन करते हैं - गजानन (गजमुख), लम्बोदर (विशाल उदर), एकदन्त (एक दाँत), मूषकवाहन (मूषक वाहन) - हर एक में बुद्धि, विनम्रता और संतुलन की गूढ़ शिक्षा है।
अन्य नाम उनकी भूमिका प्रकट करते हैं - विघ्नहर्ता बाधाएँ हरते हैं, सिद्धिविनायक सफलता देते हैं, बुद्धिप्रिय बुद्धि देते हैं। नामावली का जप आरंभ के स्वामी से मार्ग साफ करने, मन स्थिर करने और हर नए प्रयास को आशीर्वाद देने की प्रार्थना है। 108 की पवित्र गिनती इसे स्मरण का पूर्ण चक्र बनाती है, परीक्षा, यात्रा, विवाह या किसी नए कार्य से पहले श्रेष्ठ।
लाभ और जप विधि

लाभ:
- नए कार्यों और दैनिक जीवन से बाधाओं का नाश
- बुद्धि, एकाग्रता और स्पष्ट विचार
- सफलता (सिद्धि) और शुभ आरंभ
- शांति, आत्मविश्वास और नकारात्मकता से रक्षा
- परीक्षा, यात्रा, विवाह और व्यापार से पहले आशीर्वाद
जप विधि: 1. श्रेष्ठ दिन: बुधवार और मंगलवार, चतुर्थी (विशेषकर संकष्टी और विनायक चतुर्थी) और भाद्रपद का पूरा गणेश उत्सव सर्वाधिक शुभ हैं। 2. तैयारी: गणेश चित्र के समक्ष बैठें, घी का दीप जलाएँ और दूर्वा, लाल पुष्प, मोदक या लड्डू और फल अर्पित करें। 3. पाठ करें पूर्ण अष्टोत्तर शतनामावली का, हर नाम ॐ ... नमः के रूप में, श्रेष्ठ है रुद्राक्ष या लाल चंदन माला से। 4. समय कम हो तो 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जप करें और कुछ नामों पर मनन करें। 5. आरंभ करें कोई नया कार्य इसके बाद, और गणेश आरती तथा मोदक प्रसाद से समापन करें।
दूर्वा और मोदक गणेश को विशेष प्रिय हैं, इसलिए इन्हें सम्मिलित करना पूजा को पूर्ण बनाता है।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
गणेश अष्टोत्तर शतनामावली में कितने नाम हैं?+
इसमें 108 नाम हैं। अष्टोत्तर शतनामावली गणेश की 108 नामों की माला है, हर नाम 'ॐ ... नमः' के रूप में, जैसे ॐ गणेशाय नमः या ॐ विघ्नहर्ता नमः।
लम्बोदर और एकदन्त जैसे नामों का क्या अर्थ है?+
लम्बोदर का अर्थ है 'विशाल उदर वाले', जो जीवन के सभी अनुभवों को पचाने की क्षमता का प्रतीक है। एकदन्त का अर्थ है 'एक दाँत वाले', जो स्मरण कराता है कि गणेश ने एक दाँत तोड़ा और यह एकाग्रता व त्याग का प्रतीक है।
गणेश के 108 नाम जपने का श्रेष्ठ समय कब है?+
बुधवार और मंगलवार, चतुर्थी (संकष्टी और विनायक चतुर्थी) और भाद्रपद का गणेश उत्सव सर्वाधिक शुभ हैं। कोई नया कार्य आरंभ करने से पहले, दूर्वा और मोदक अर्पण के साथ जप परंपरागत विधि है।
हर पूजा में गणेश पहले क्यों पूजे जाते हैं?+
गणेश आरंभ के स्वामी और बाधाओं के हर्ता (विघ्नहर्ता) हैं, और उन्हें सर्वप्रथम पूजे जाने का वरदान मिला। आरंभ में उनका आह्वान बाधाएँ दूर करता है और सुनिश्चित करता है कि कोई अनुष्ठान या कार्य निर्विघ्न चले।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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