गणेश पंचरत्न स्तोत्र क्या है?
गणेश पंचरत्न (शब्दशः 'गणेश के पाँच रत्न') भगवान गणेश की स्तुति में पाँच श्लोकों का एक छोटा, सुंदर स्तोत्र है, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य ने की। यह प्रसिद्ध पंक्ति मुदाकरात्त मोदकं सदा विमुक्तिसाधकम् से आरंभ होता है।
प्रत्येक श्लोक एक 'रत्न' है जो गणेश के स्वरूप, गुणों और कृपा का वर्णन करता है - विघ्नहर्ता और बुद्धि के स्वामी। इसका छंद तेज, लयबद्ध और आनंदमय है, जिससे इसे उच्च स्वर में गाना आनंददायक होता है। यह गणेश चतुर्थी पर, मंगलवार को और किसी भी पूजा या नए कार्य के आरंभ में व्यापक रूप से पढ़ा जाता है।
प्रथम श्लोक - मुदाकरात्त मोदकम्
श्लोक 1 (देवनागरी): मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम्। अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम्॥
लिप्यंतरण: मुदाकरात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम्
अर्थ: मैं उस विनायक को प्रणाम करता हूँ जो अपने हाथ में मधुर मोदक धारण करते हैं और सदा मुक्ति प्रदान करते हैं, जो अर्धचंद्र को आभूषण रूप में पहनते हैं और तेजस्वी लोकों की रक्षा करते हैं, जो अनाथों के एकमात्र नाथ हैं, जिन्होंने गजासुर का नाश किया, और जो प्रणाम करने वालों के अशुभ को शीघ्र दूर करते हैं।
मोदक (मिठाई) शब्द मोद (आनंद) पर भी श्लेष है - गणेश अपने हाथ में आनंद का मूल स्रोत ही धारण करते हैं।
पाँच रत्न - प्रत्येक श्लोक का भाव
पाँचों श्लोक गणेश की भिन्न-भिन्न दृष्टि से स्तुति करते हैं और प्रत्येक नमामि तं विनायकम् - 'मैं उस विनायक को प्रणाम करता हूँ' - से समाप्त होता है:
- श्लोक 1 - मुदाकरात्त मोदकम्: मुक्ति देने वाले और अशुभ हरने वाले गणेश, मोदक धारक।
- श्लोक 2 - नतेतरातीतभयम्: वे भक्तों का भय हरते हैं और कृपा के चरण-कमल देते हैं; दैत्य के अहंकार का नाश करने वाले।
- श्लोक 3 - समस्तलोकशंकरम्: वे समस्त लोकों के कल्याण के कारण हैं, एकदंत, जन्म के बंधन को दूर करने हेतु पूजित।
- श्लोक 4 - अकिंचनार्तिमार्जनम्: वे दीन-दुखियों का कष्ट मिटाते हैं, शोक को निगलने (पराजित करने) वाले, उमा (पार्वती) के स्वामी।
- श्लोक 5 - नीतान्तकान्तकण्टकम्: वे भक्तों के भय का कांटा और मृत्यु का चक्र दूर करते हैं, परम सुंदर, शाश्वत।
फलश्रुति (समापन फल श्लोक) कहती है कि जो इन पाँच रत्नों का प्रातःकाल शुद्ध हृदय से पाठ करता है, वह आरोग्य, विद्या, कीर्ति और श्रेष्ठ जीवन पाता है।
गणेश पंचरत्न पढ़ने के लाभ

- विघ्न दूर करता है: गणेश विघ्नहर्ता हैं; किसी भी कार्य से पूर्व उनकी स्तुति का पाठ सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है, ऐसा माना जाता है।
- बुद्धि को तीव्र करता है: बुद्धि के स्वामी होने के कारण उनका स्तोत्र विद्यार्थियों को अध्ययन और परीक्षा से पहले प्रिय है।
- शांति देता और भय हरता है: श्लोक बार-बार भक्त के भय और अशुभ को दूर करने की बात करते हैं।
- गाना सरल और आनंदमय: तेज, संगीतमय छंद इसे याद करना सरल और प्रतिदिन पढ़ना सुखद बनाता है।
- शुभ आरंभ: पूजा, नए कार्य, यात्रा या किसी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ में पढ़ा जाता है।
श्रेष्ठ अभ्यास हेतु पाँचों श्लोक प्रातः स्नान के बाद पढ़ें, आदर्श रूप से मंगलवार को या गणेश चतुर्थी के दौरान, घी का दीप जलाकर और गणेश को मोदक या लड्डू अर्पित कर।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
गणेश पंचरत्न स्तोत्र किसने लिखा?+
गणेश पंचरत्न की रचना आदि शंकराचार्य ने की, 8वीं शताब्दी के महान दार्शनिक-संत। यह उनके सर्वाधिक प्रिय छोटे स्तोत्रों में से एक है, जो तेज, आनंदमय छंद में रचित है।
'पंचरत्न' का अर्थ क्या है?+
'पंचरत्न' का अर्थ है 'पाँच रत्न' (पंच = पाँच, रत्न = जवाहर)। स्तोत्र में पाँच श्लोक हैं, प्रत्येक भगवान गणेश की स्तुति का एक रत्न, सभी 'नमामि तं विनायकम्' से समाप्त होते हैं।
गणेश पंचरत्न कब पढ़ना चाहिए?+
इसे प्रातः स्नान के बाद पढ़ना श्रेष्ठ है, विशेषकर मंगलवार को और गणेश चतुर्थी के दौरान। विघ्न हरने हेतु इसे किसी भी पूजा, नए कार्य या महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ में भी पढ़ा जाता है।
'मुदाकरात्त मोदकम्' का अर्थ क्या है?+
इसका अर्थ है 'जो अपने आनंदमय हाथ में मधुर मोदक धारण करते हैं'। यह पंक्ति गणेश की मोदक धारक और मुक्ति दाता रूप में स्तुति करती है, जहाँ 'मोदक' 'मोद' अर्थात आनंद का भी संकेत देता है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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