हनुमान वडवानल स्तोत्र क्या है
हनुमान वडवानल स्तोत्र भगवान हनुमान के सबसे शक्तिशाली रूप को संबोधित एक उग्र, रक्षक स्तोत्र है। वडवानल शब्द समुद्र के भीतर जलने वाली अग्नि को दर्शाता है - एक अजेय, सर्वभक्षी शक्ति का प्रतीक। जैसे वह अग्नि बुझाई नहीं जा सकती, वैसे ही यह स्तोत्र हनुमान की शक्ति का आह्वान करता है कि वह हर भय, रोग, शत्रु और बुरे प्रभाव को भस्म कर दे। यह रक्षा हेतु समस्त हनुमान स्तोत्रों में सबसे प्रबल माना जाता है।
स्तोत्र का उद्गम
परंपरा के अनुसार वडवानल स्तोत्र की रचना और पाठ विभीषण ने किया था, जो रावण के भक्त-भ्राता थे और जिन्होंने भगवान राम की शरण ली थी। लंका युद्ध में हनुमान की अपार शक्ति देखकर विभीषण ने इस स्तोत्र द्वारा उनकी स्तुति की, ताकि संकट, रोग और अंधकारी शक्तियों से रक्षा मिले। एक सच्चे भक्त से आने के कारण जिसने हनुमान का बल प्रत्यक्ष देखा, यह हर प्रकार की हानि के विरुद्ध कवच के रूप में विशेष ख्याति रखता है।
प्रारंभिक और मुख्य छंद
स्तोत्र पारंपरिक विनियोग से आरंभ होता है जो इसका उद्देश्य घोषित करता है। प्रारंभिक पंक्तियाँ हैं:
ॐ अस्य श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र मंत्रस्य, श्री रामचंद्र ऋषिः। श्री हनुमान देवता, संकट-निवारणाय जपे विनियोगः।
मुख्य छंद (उदाहरण): ॐ नमो भगवते श्री महाहनुमते। प्रकट-पराक्रमाय, सकल-भय-निवारणाय...
छंद बार-बार हनुमान से भय, ज्वर, रोग, शत्रुओं और हर बुरे टोने का नाश करने की प्रार्थना करते हैं, और पूर्ण रक्षा की याचना के साथ समाप्त होते हैं।
स्तोत्र का अर्थ

अर्थ में भक्त प्रकट पराक्रम वाले महाहनुमान को प्रणाम करता है और प्रार्थना करता है कि वे, अबुझ वडवानल अग्नि की भाँति, समस्त भय, ज्वर, विष, रोग और शत्रु शक्तियों को भस्म कर दें। प्रत्येक पंक्ति एक विशिष्ट संकट का नाम लेती है - रोग, अकाल मृत्यु, तंत्र-मंत्र, दृष्टि-दोष, प्रतिकूल ग्रह - और हनुमान से उसे राख कर देने को कहती है। समापन इस बात की पुष्टि करता है कि जो श्रद्धा से इसका पाठ करता है वह हनुमान की अटूट रक्षा में लिपटा रहता है।
वडवानल स्तोत्र पाठ के लाभ
भक्त इस स्तोत्र का पाठ भय, चिंता और दुःस्वप्नों से मुक्ति, शत्रुओं, मुकदमों और छिपे षड्यंत्रों से रक्षा, तथा पुराने रोग, ज्वर और अकारण बीमारी से राहत हेतु करते हैं। यह विशेषकर तंत्र-मंत्र, दृष्टि-दोष, नकारात्मक ऊर्जा और तांत्रिक प्रहार के विरुद्ध कवच के रूप में मूल्यवान है। नियमित पाठ साहस बढ़ाता, मन को स्थिर करता और घर को हनुमान की रक्षक शक्ति से घेरता माना जाता है।
स्तोत्र का पाठ कैसे करें
1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, आदर्श रूप से मंगलवार या शनिवार प्रातः। 2. हनुमान के चित्र के सामने पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर बैठें और तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। 3. लाल पुष्प, सिंदूर और बूँदी या गुड़-चना का प्रसाद अर्पित करें। 4. विनियोग से आरंभ करें, फिर एकाग्रता और श्रद्धा से पूरे स्तोत्र का पाठ करें। 5. जय श्री राम से समाप्त करें और रक्षा की प्रार्थना करें। इसे चालीस दिन तक प्रतिदिन, या जब भी भय या संकट आए, पढ़ना विशेष शक्तिशाली माना जाता है।
सावधानियाँ और भक्ति-भाव

यह एक शक्तिशाली रक्षक स्तोत्र है, अतः इसका पाठ पवित्रता, विनम्रता और शुभ भाव से करें, कभी किसी को हानि पहुँचाने हेतु नहीं। स्वच्छता रखें, पाठ के दिनों में मद्य व मांसाहार से बचें, और आचरण सत्यनिष्ठ रखें। स्तोत्र सच्चे भक्त की रक्षा करता है; इसकी शक्ति केवल शब्दों से नहीं, बल्कि भगवान हनुमान में सच्ची श्रद्धा और स्वच्छ हृदय से प्रवाहित होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हनुमान वडवानल स्तोत्र क्या है?+
यह भगवान हनुमान का एक उग्र, रक्षक स्तोत्र है जिसकी शक्ति की तुलना अबुझ समुद्री अग्नि (वडवानल) से की जाती है। इसका पाठ भय, रोग, शत्रुओं और तंत्र-मंत्र के नाश हेतु किया जाता है।
वडवानल स्तोत्र की रचना किसने की?+
परंपरा के अनुसार रावण के भक्त-भ्राता विभीषण ने, जिन्होंने भगवान राम की शरण ली थी, लंका युद्ध में हनुमान की अपार शक्ति देखकर इसकी रचना और पाठ किया।
इसके पाठ के क्या लाभ हैं?+
इसका पाठ भय व चिंता से मुक्ति, शत्रुओं व छिपे षड्यंत्रों से रक्षा, पुराने रोग व ज्वर से राहत, और तंत्र-मंत्र, दृष्टि-दोष व नकारात्मक ऊर्जा के विरुद्ध कवच के रूप में किया जाता है।
इसका पाठ कब और कैसे करना चाहिए?+
स्नान के बाद मंगलवार या शनिवार प्रातः, हनुमान के चित्र के सामने पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर, तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाकर पाठ करें। विनियोग से आरंभ करें और श्रद्धा से पढ़ें।
क्या यह सचमुच तंत्र-मंत्र से रक्षा करता है?+
भक्त मानते हैं कि वडवानल स्तोत्र तंत्र-मंत्र, दृष्टि-दोष और तांत्रिक प्रहार के विरुद्ध सबसे शक्तिशाली रक्षक स्तोत्रों में है। इसकी शक्ति सच्ची श्रद्धा और शुद्ध, विनम्र हृदय पर निर्भर मानी जाती है।
क्या कोई भी वडवानल स्तोत्र का पाठ कर सकता है?+
हाँ। श्रद्धा और स्वच्छ, विनम्र हृदय वाला कोई भी इसका पाठ कर सकता है, कभी हानि के भाव से नहीं। स्वच्छता और सत्य आचरण रखें, क्योंकि स्तोत्र सच्चे भक्तों की रक्षा करता है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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