हरतालिका तीज 2026: तिथि और समय
हरतालिका तीज 2026 मुख्यतः रविवार, 13 सितंबर 2026 को मनाई जाती है, जो भाद्रपद शुक्ल तृतीया है, वह दिन जब पार्वती जी ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए वन में कठोर तपस्या की थी। सूर्योदय आधारित तिथि गणना के कारण कुछ शहरों में यह सोमवार, 14 सितंबर को भी मानी जाती है, जो उस वर्ष गणेश चतुर्थी से मेल खाता है। यह कोई गलती नहीं, बल्कि क्षेत्रीय गणना का वास्तविक अंतर है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग से तिथि की पुष्टि अवश्य करें।
व्रत सूर्योदय से शुरू होकर पूजा पूर्ण होने तक निर्जला रहता है, कई परंपराओं में यह अगली सुबह तक चलता है। यह वर्ष के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, इसलिए पहली बार व्रत करने वालों को पूजा सरल रखने और शारीरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है, विस्तृत विधि बाद के वर्षों के लिए छोड़ी जा सकती है।
निर्जला व्रत का शरीर पर वास्तव में क्या प्रभाव
निर्जला का अर्थ है बिना जल के, और यह हिंदू परंपरा के सबसे कठोर व्रतों में से एक है, फलाहार व्रतों से बिल्कुल अलग। सच्चे निर्जला व्रत में न भोजन, न जल, और यह आमतौर पर 24 घंटे से अधिक, एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय या चंद्रोदय तक चलता है।
शरीर पर इसका असर गंभीर होता है। 12-16 घंटों के बाद प्यास, मुँह सूखना और कमजोरी महसूस होने लगती है, और उसके बाद निर्जलीकरण का खतरा बढ़ता है, खासकर सितंबर की उमस भरी गर्मी में। रक्तचाप और शर्करा प्रभावित हो सकते हैं, ध्यान और संतुलन भी बिगड़ सकता है।
यह व्रत गंभीरता और सावधानी दोनों माँगता है, न कि केवल इच्छाशक्ति। लाखों महिलाएँ हर साल इसे सुरक्षित रूप से पूरा करती हैं, बशर्ते सही सावधानी बरती जाए।
किन्हें सख्त निर्जला व्रत से पहले सोचना चाहिए
आस्था और स्वास्थ्य में कोई टकराव नहीं है। इन्हें सख्त निर्जला व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, न कि केवल पारिवारिक दबाव में व्रत रखना चाहिए:
- गर्भवती महिलाएँ, विशेषकर दूसरी-तीसरी तिमाही में
- मधुमेह रोगी, खासकर इंसुलिन लेने वाली
- उच्च या निम्न रक्तचाप वाली महिलाएँ
- किडनी स्टोन या किडनी रोग का इतिहास रखने वाली
- बुज़ुर्ग महिलाएँ, जो तेज़ी से निर्जलित होती हैं
- जिन्हें दवा के साथ भोजन-जल ज़रूरी हो
- जो बीमार, बुखार में या हाल में सर्जरी से उबरी हों
इन सभी के लिए फलाहार व्रत एक पूर्णतः स्वीकृत और व्यापक रूप से प्रचलित विकल्प है। व्रत का सार श्रद्धा है, शारीरिक कष्ट नहीं, और कोई भी देवी अपनी भक्त को स्वास्थ्य दांव पर लगाने से प्रसन्न नहीं होतीं।
व्रत से पहले शरीर को तैयार करना

करवा चौथ के विपरीत, हरतालिका तीज में औपचारिक सरगी नहीं होती, लेकिन जलयोजन का सिद्धांत वैसा ही महत्वपूर्ण है। व्रत से दो-तीन दिन पहले धीरे-धीरे पानी की मात्रा बढ़ाना, आखिरी घंटों में जल्दबाज़ी में पानी पीने से कहीं बेहतर है और शरीर को बेहतर तरीके से तैयार करता है।
व्रत की पूर्व संध्या को खिचड़ी, दाल-चावल या तरबूज़-खीरे जैसा हल्का भोजन लें, तला-भुना और नमकीन खाने से बचें, क्योंकि यह अगले दिन प्यास काफी बढ़ा देता है। चाय-कॉफी भी सीमित रखें, क्योंकि यह शरीर से अतिरिक्त पानी निकालती है, ठीक उस समय जब शरीर को पानी रोके रखना सबसे ज़रूरी है।
सुबह जल्दी, तिथि बदलने से ठीक पहले, नारियल पानी, छाछ या केला लेना, जहाँ परंपरा अनुमति देती है, ऊर्जा और इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखने में मदद करता है, जिससे अगले 24 घंटे कहीं अधिक सहनीय हो जाते हैं।
व्रत के दिन को सुरक्षित रूप से निभाना
व्रत शुरू होने के बाद प्राथमिकता तैयारी से बदलकर संरक्षण की हो जाती है। शारीरिक मेहनत कम करें, धूप में देर तक खड़े रहने या बाहर लंबी यात्रा से बचें। दिन के कुछ हिस्से में ठंडी, छायादार जगह पर आराम करना पसीने से होने वाली जल हानि को काफी कम करता है, जो सितंबर की उमस में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
पूजा की तैयारी, सोलह शृंगार, भजन या हरतालिका तीज व्रत कथा सुनने में व्यस्त रहना समय बिताने में मदद करता है और भूख-प्यास से ध्यान हटाता है। यह पीढ़ियों से आजमाया गया, सचमुच कारगर तरीका है।
चक्कर आना, बेहोशी, तेज़ धड़कन या गंभीर सिरदर्द होने पर तुरंत व्रत तोड़ें, स्वास्थ्य सबसे पहले है, इसमें कोई भक्ति की कमी नहीं। किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य को दिन भर अपनी स्थिति बताते रहना एक सरल पर ज़रूरी सावधानी है।
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व्रत सही तरीके से खोलना
पारण अगली सुबह पूजा और चंद्र दर्शन के बाद किया जाता है। व्रत खोलने का तरीका उतना ही मायने रखता है जितना व्रत रखना, क्योंकि शरीर 24 घंटे से अधिक बिना जल के रहा है और उसे धीरे-धीरे सामान्य करना ज़रूरी है।
पहले धीरे-धीरे पानी या नारियल पानी लें, फिर तरबूज़ या संतरे जैसा जल-युक्त फल। इसके बाद ही हल्का भोजन जैसे खिचड़ी या दही-चावल लें, तुरंत तला-मसालेदार खाने से बचें, यह पाचन तंत्र को झटका दे सकता है।
कई महिलाओं को पारण के तुरंत बाद ठीक लगता है पर एक-दो घंटे बाद थकान महसूस होती है अगर भोजन जल्दी और भारी लिया गया हो। भोजन को आधे घंटे से एक घंटे में धीरे-धीरे लेना बेहतर है। मिठाई थोड़ी देर बाद, शरीर के ठीक से जलयोजित होने के बाद लेना उचित है।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
हरतालिका तीज 2026, 13 या 14 सितंबर को है?+
यह मुख्यतः रविवार, 13 सितंबर 2026 को है, हालाँकि कुछ शहरों में सूर्योदय आधारित तिथि के कारण 14 सितंबर को भी मनाई जाती है।
क्या हरतालिका तीज के निर्जला व्रत में पानी लिया जा सकता है?+
सख्त निर्जला व्रत में नहीं। जो स्वास्थ्य कारणों से बिना पानी नहीं रह सकतीं, वे फलाहार व्रत कर सकती हैं, जो पूर्णतः स्वीकृत है।
व्रत तुरंत तोड़ने के कौन से चेतावनी संकेत हैं?+
लगातार चक्कर आना, बेहोशी, तेज़ धड़कन, गंभीर सिरदर्द या भ्रम होने पर तुरंत व्रत तोड़ें और पानी या चिकित्सा सहायता लें।
क्या गर्भवती महिलाओं को सख्त निर्जला हरतालिका तीज व्रत रखना चाहिए?+
आमतौर पर सलाह नहीं दी जाती, खासकर बाद की तिमाही में। डॉक्टर की सलाह से फलाहार व्रत करना सुरक्षित विकल्प है।
व्रत खोलने के बाद सबसे पहले क्या खाना चाहिए?+
पहले धीरे-धीरे पानी या नारियल पानी, फिर जल-युक्त फल, और उसके बाद ही हल्का भोजन लें। भारी या तला भोजन तुरंत न लें।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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