सोलह शृंगार क्या है और तीज पर इसका महत्व
सोलह शृंगार का अर्थ है सोलह आभूषण और श्रृंगार की वस्तुएँ, जो विवाहित हिंदू स्त्री के संपूर्ण, शुभ और उत्सवी रूप का प्रतीक मानी जाती हैं। हरतालिका तीज पर मान्यता है कि माँ पार्वती ने शिव जी को पाने के लिए वन में तपस्या के दौरान स्वयं को इसी तरह विस्तार से सजाया था, और आज महिलाएँ इसी भक्ति भाव से शृंगार करती हैं।
हर महिला सभी सोलह वस्तुएँ ठीक उसी क्रम में नहीं अपनातीं, और उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसे क्षेत्रों में थोड़ा अंतर भी होता है। जो बात हर जगह एक जैसी रहती है वह है भाव, हर वस्तु को ध्यानपूर्वक, अक्सर परिवार और पड़ोस की महिलाओं के साथ मिलकर पहनना, जो तैयारी को स्वयं एक उत्सव बना देता है।
नीचे दी गई सूची सबसे आम सोलह वस्तुओं और उनके अर्थ को बताती है, पहली बार तैयार होने वालों के लिए भी और जिज्ञासु पाठकों के लिए भी।
वस्तु 1 से 8: चेहरा और ऊपरी शरीर
सूची का पहला हिस्सा चेहरे, हाथों और ऊपरी शरीर पर केंद्रित है, वे हिस्से जो पूजा के दौरान सबसे पहले नज़र आते हैं:
- बिंदी - माथे पर, जागरूकता की तीसरी आँख का प्रतीक
- सिंदूर - माँग में, विवाहित स्त्री की सबसे बड़ी पहचान
- मांग टीका - माँग पर सिर की सजावट, नकारात्मक ऊर्जा से बचाव मानी जाती है
- काजल - आँखों में, सुंदरता के साथ नज़र से बचाव
- मेहंदी - हाथ-पैर पर एक रात पहले, वैवाहिक सुख और खुशी का प्रतीक
- चूड़ियाँ - लाल-हरे रंग की, जिनकी खनक शुभ मानी जाती है
- हार - समृद्धि और परिवार की भलाई का प्रतीक
- कर्णफूल - कानों के आभूषण, आरती के समय चमकते हैं
ये पहली आठ वस्तुएँ सस्ती और आसानी से मिल जाती हैं, अधिकतर घर में पहले से मौजूद होती हैं।
वस्तु 9 से 16: शेष शरीर और अंतिम स्पर्श
सूची का दूसरा हिस्सा शेष शरीर और अंतिम स्पर्श जोड़ता है:
- नथ - नाक का आभूषण, सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला
- पायल - पैरों में चांदी की, शुभ उपस्थिति की सूचक
- बिछिया - पैर की दूसरी उंगली में चांदी की, पूजा से पहले पहनी जाती है
- बाजूबंद - बाजू पर पहना जाने वाला आभूषण, रोज़ाना नहीं पर उत्सव में ज़रूरी
- कमरबंद - कमर पर सजावटी पट्टा, शालीनता का प्रतीक
- अंगूठी - एक या अधिक अंगूठियाँ, अक्सर विवाह की अंगूठी सहित
- गजरा - बालों में ताज़े मोगरा या चमेली के फूल
- आल्ता/महावर - हाथ-पैर के किनारों पर लाल रंग, माँ लक्ष्मी से जुड़ा शुभ प्रतीक
ये सोलह वस्तुएँ मिलकर तीज का संपूर्ण रूप बनाती हैं, हालाँकि रोज़ाना शृंगार में केवल बिंदी, सिंदूर और चूड़ियाँ ही सबसे आम रहती हैं।
पोशाक और रंगों का चुनाव जो रूप को पूरा करता है

पोशाक पूरे शृंगार की नींव है। लाल और हरा सबसे पारंपरिक रंग हैं, लाल वैवाहिक शुभता और हरा नई शुरुआत तथा सावन-भाद्रपद के मौसम का प्रतीक। कई महिलाएँ पीला या नारंगी भी चुनती हैं, जो उत्सव और समृद्धि से जुड़े हैं।
साड़ी, लहंगा या बांधनी सूट, क्षेत्रीय परंपरा अनुसार अलग-अलग पहना जाता है, कोई सख्त नियम नहीं है। सोने के साथ पायल-बिछिया में चांदी मिलाना भी परंपरा के भीतर ही है।
दुपट्टा अक्सर मुख्य पोशाक से विपरीत या मेल खाते रंग में चुना जाता है, और कई परिवारों में माँ या दादी की साड़ी या गहना आगे बढ़ाया जाता है, जो शृंगार में एक व्यक्तिगत भावनात्मक परत जोड़ता है।
🪔 Vandnaa पर हरतालिका तीज व्रत कथा और पूजा विधि रात को पढ़ी जा सकती है।
अविवाहित लड़कियाँ इस सूची को कैसे अपनाती हैं
हरतालिका तीज विवाहित महिलाओं के साथ-साथ अविवाहित लड़कियाँ भी मनाती हैं, अच्छे जीवनसाथी की कामना के साथ, ठीक जैसे पार्वती जी ने की थी। इनके लिए सिंदूर और अक्सर मांग टीका, जो विवाह से जुड़े हैं, छोड़ दिए जाते हैं।
बिंदी, काजल, मेहंदी, चूड़ियाँ, बालियाँ और फूल पहनना आम है, यानी शृंगार का पूरा उत्सवी अनुभव, बस सिंदूर और मांग टीका के बिना। सटीक नियम से ज़्यादा त्योहार की भावना में भाग लेना मायने रखता है।
यह अक्सर माँ, बुआ या दादी से सीखने का पीढ़ी-दर-पीढ़ी पल बन जाता है, जहाँ मेहंदी और साड़ी की तकनीक के साथ-साथ हर वस्तु का अर्थ भी सिखाया जाता है।
बजट में यह रूप तैयार करने के व्यावहारिक सुझाव
पूरा सोलह शृंगार महंगा लग सकता है, लेकिन ज़्यादातर वस्तुएँ पहले से घर में होती हैं। चूड़ियाँ, बिंदी और काजल सस्ते और आसानी से उपलब्ध हैं। मांग टीका, कमरबंद जैसी वस्तुएँ सालों तक इस्तेमाल होती हैं क्योंकि ये कभी-कभार ही पहनी जाती हैं।
मेहंदी 13 सितंबर की शाम से पहले लगवाना बेहतर है ताकि रंग रात भर में प्राकृतिक रूप से गहरा हो जाए। कलाकार की बुकिंग कुछ दिन पहले कर लें, क्योंकि माँग अचानक बढ़ जाती है।
साल में एक बार पहनी जाने वाली वस्तुएँ, जैसे बाजूबंद या भारी हार, माँ या बहन से उधार लेना बिल्कुल सामान्य और स्वीकार्य है। परंपरा का सार भाव की पूर्णता है, हर वस्तु की कीमत नहीं।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
सोलह शृंगार में कौन-कौन सी 16 वस्तुएँ शामिल हैं?+
बिंदी, सिंदूर, मांग टीका, काजल, मेहंदी, चूड़ियाँ, हार, बालियाँ, नथ, पायल, बिछिया, बाजूबंद, कमरबंद, अंगूठी, गजरा और आल्ता, ये सोलह वस्तुएँ सबसे आम मानी जाती हैं।
क्या अविवाहित लड़कियों को हरतालिका तीज पर सिंदूर लगाना चाहिए?+
नहीं, सिंदूर विवाह का प्रतीक है और अविवाहित लड़कियाँ इसे नहीं लगातीं, बाकी अधिकतर शृंगार वस्तुएँ पहन सकती हैं।
हरतालिका तीज से पहले मेहंदी कब लगानी चाहिए?+
आदर्श रूप से एक दिन पहले शाम को, ताकि रात भर में रंग गहरा हो जाए और अगली सुबह पूजा तक सबसे गहरा दिखे।
क्या हर साल सभी 16 वस्तुएँ नई खरीदना ज़रूरी है?+
नहीं, अधिकतर आभूषण सालों तक इस्तेमाल होते हैं। केवल चूड़ियाँ, बिंदी, मेहंदी और फूल जैसी चीज़ें ही हर साल नई लेनी पड़ती हैं।
बिछिया परंपरागत रूप से सोने की बजाय चांदी की क्यों पहनी जाती है?+
पुरानी परंपरा और मान्यताओं के अनुसार कमर से नीचे सोना पहनना उचित नहीं माना जाता, इसलिए पायल और बिछिया चांदी की पहनी जाती हैं।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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