हिंगुला देवी कौन हैं
ओडिशा के अंगुल जिले में तालचर के निकट गदगड़िया पहाड़ी पर, ब्रह्मणी नदी के तट पर हिंगुला देवी का मंदिर विराजमान है। यह स्थानीय मंदिर, बलूचिस्तान की प्रसिद्ध हिंगलाज माता से भिन्न, इस कोयला संपन्न क्षेत्र के लोगों की अपनी दीर्घकालीन भक्ति परंपरा रखता है।
भक्त हिंगुला को परमात्मा माता के रक्षक स्वरूप के रूप में मानते हैं, जो ब्रह्मणी के किनारे बसे गांवों और समुदायों की रखवाली करती हैं।
परंपरा और स्थानीय आस्था
स्थानीय परंपरा के अनुसार, देवी की पूजा इस पहाड़ी पर पीढ़ियों से होती आ रही है, उनका नाम अग्नि तत्व और उनकी रक्षक शक्ति में भक्तों की गहरी आस्था को दर्शाता है। क्षेत्र के कई परिवार उन्हें अपनी कुलदेवी मानते हैं, अपने वंश की रक्षक देवी।
समय के साथ, तालचर के उद्योग और खनन के इर्द-गिर्द विकसित होने के बावजूद हिंगुला देवी के प्रति स्थानीय भक्ति स्थिर बनी रही है, भक्त मानते हैं कि देवी हर बदलाव के बीच भी भूमि और उसके लोगों की रखवाली करती रहती हैं।
महत्व और भक्तों की प्रार्थनाएं
भक्त हिंगुला देवी से परिवार की सुरक्षा, कार्यस्थल पर संरक्षण और सामान्य कल्याण की प्रार्थना करते हैं। तालचर के कई कामकाजी परिवार नई नौकरी शुरू करने या महत्वपूर्ण कार्य करने से पहले मंदिर आते हैं।
परंपरा के अनुसार, देवी को कठिन दैनिक श्रम से जुड़े समुदाय के लिए एक स्थिर, सांत्वनादायी उपस्थिति माना जाता है, जो भक्तों को सुरक्षा और शांति का अनुभव कराती हैं।
दर्शन गाइड: समय और उत्सव

मंदिर में प्रातः और सायं आरती का क्रम चलता है, तथा दिनभर दर्शन खुले रहते हैं। उत्सवों के दौरान भक्तों को स्थानीय जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।
- यहां दुर्गा पूजा और नवरात्रि स्थानीय उत्साह के साथ मनाई जाती है
- आसपास के गांवों के भक्त प्रायः सप्ताह के शुभ दिनों में देवी पूजा हेतु आते हैं
- पहाड़ी परिवेश पूजा के साथ-साथ चिंतन हेतु एक शांत स्थान प्रदान करता है
तालचर कैसे पहुंचें
तालचर ओडिशा के अंगुल जिले में स्थित है और रेल मार्ग से भली-भांति जुड़ा है। तालचर रेलवे स्टेशन नगर की सेवा करता है, जो राज्य के प्रमुख शहरों तथा अन्य स्थानों से जुड़ा है।
निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर है, जहां से तालचर सड़क मार्ग से पहुंचा जाता है। स्थानीय परिवहन नगर को गदगड़िया पहाड़ी और मंदिर से जोड़ता है।
जप हेतु मंत्र और भक्त के लिए संदेश
भक्त 'ॐ हिंगुलायै नमः' का जप करते हैं, जिसका अर्थ है 'देवी हिंगुला को नमन', उनकी स्थिर सुरक्षा की कामना करते हुए।
अपनी शांत पहाड़ी पर हिंगुला देवी की स्थायी उपस्थिति, क्षेत्र में पीढ़ियों के परिवर्तन के बीच भी, भक्तों को स्मरण कराती है कि आस्था स्थिर रहती है, भले ही उसके चारों ओर की दुनिया बदलती रहे। उनके मंदिर में पूजा श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, न कि कोई लेन-देन।
त्वरित उत्तर
क्या हिंगुला देवी बलूचिस्तान की हिंगलाज माता के समान हैं?+
नहीं, तालचर की हिंगुला देवी ओडिशा का एक अलग स्थानीय मंदिर है जिसकी अपनी परंपरा है, यह बलूचिस्तान के प्रसिद्ध हिंगलाज माता मंदिर से भिन्न है, हालांकि दोनों नामों में अग्नि तत्व का संबंध समान है।
हिंगुला देवी को कुलदेवी के रूप में कौन पूजता है?+
तालचर और अंगुल क्षेत्र के कई स्थानीय परिवार हिंगुला देवी को अपनी कुलदेवी मानते हैं, अपने वंश की रक्षक देवी, जिनकी पूजा पीढ़ियों से की जा रही है।
भक्त हिंगुला देवी मंदिर में क्या प्रार्थना करते हैं?+
भक्त परिवार की सुरक्षा, कार्यस्थल की रक्षा और सामान्य कल्याण की प्रार्थना करते हैं, विशेष रूप से आसपास के तालचर क्षेत्र की औद्योगिक और खनन प्रकृति को देखते हुए।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
Meet the Vandnaa editorial team →

