रुद्राभिषेक क्या है
रुद्राभिषेक रुद्रम या सरल शिव मंत्रों का उच्चारण करते हुए शिव लिंग का अनुष्ठानिक स्नान (अभिषेक) है। रुद्र शिव का उग्र, पवित्र करने वाला रूप है, और अभिषेक का अर्थ पवित्र अर्पण है। लिंग पर जल, दूध और पंचामृत अर्पित करना शिव की प्रचंड ऊर्जा को शांत करता और भक्त पर शांति, स्वास्थ्य व आशीर्वाद बरसाता माना जाता है। इसे पंडितों के साथ भव्य रूप से या घर पर सरलता व प्रेम से किया जा सकता है।
सामग्री (आवश्यक वस्तुएँ)
आरंभ से पहले ये वस्तुएँ एकत्र करें: 1. स्वच्छ जलाधारी पर एक शिव लिंग (छोटा घरेलू लिंग या पारद/पत्थर का लिंग)। 2. पंचामृत - दूध, दही, घी, शहद और शक्कर। 3. स्वच्छ जल, और उपलब्ध हो तो गंगाजल। 4. बेल (बिल्व) पत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा और चाहें तो भांग। 5. चंदन, अक्षत (साबुत चावल), और घी या तेल का दीपक। 6. धूप, कपूर, ताँबे या पीतल का पात्र (लोटा), और एक चम्मच (आचमनी)। लिंग के नीचे अभिषेक जल एकत्र करने हेतु एक पात्र रखें, जो चरणामृत बन जाता है।
चरणबद्ध रुद्राभिषेक विधि
1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शांत मन से उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके बैठें। 2. दीपक व धूप जलाएँ, फिर आचमन (जल का आचमन) और संक्षिप्त संकल्प करें। 3. बाधाएँ दूर करने हेतु पहले ॐ गं गणपतये नमः से भगवान गणेश का आह्वान करें। 4. ॐ नमः शिवाय का सतत जप करते हुए सादे जल से अभिषेक आरंभ करें। 5. फिर लिंग को क्रम से दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से स्नान कराएँ, प्रत्येक के बाद जल अर्पित करें। 6. पंचामृत और अंत में स्वच्छ जल या गंगाजल अर्पित कर अभिषेक पूर्ण करें। 7. लिंग को कोमलता से पोंछें, चंदन लगाएँ, और बेल पत्र, पुष्प, धतूरा, अक्षत तथा मीठा भोग अर्पित करें। 8. कपूर जलाएँ, शिव आरती करें, और हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।
अभिषेक के लिए मंत्र

आरंभ से अंत तक जपने हेतु सबसे सरल व शक्तिशाली मंत्र है:
ॐ नमः शिवाय
जो रुद्राष्टाध्यायी (श्री रुद्रम) का पाठ कर सकते हैं वे पूर्ण रुद्राभिषेक हेतु करते हैं, पर घर पर यह आवश्यक नहीं। एक अन्य गहन रक्षक मंत्र महामृत्युंजय मंत्र है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
स्थिरता से और हृदय से जपें; सही उच्चारण से अधिक भाव मायने रखता है।
सर्वोत्तम दिन और समय
सोमवार शिव का साप्ताहिक दिन और घर पर रुद्राभिषेक के लिए सबसे प्रचलित है। प्रदोष काल (त्रयोदशी तिथि की संध्या) और महाशिवरात्रि असाधारण रूप से शक्तिशाली हैं। पूरा श्रावण मास आदर्श माना जाता है, जिसमें प्रत्येक सोमवार (श्रावण सोमवार) विशेष आशीर्वाद लाता है। स्नान के बाद और खाली पेट प्रातःकाल अभिषेक करने के लिए दिन का सर्वोत्तम भाग है।
करें और न करें
करें: सब कुछ स्वच्छ रखें, अर्पण कोमलता से करें, सतत जप करें, और एकत्र चरणामृत प्रसाद रूप में ग्रहण करें। सदा विषम, ताज़े बेल पत्र चिकनी ओर नीचे करके अर्पित करें। न करें: शिव लिंग पर तुलसी, केतकी पुष्प, हल्दी या नारियल पानी कभी न चढ़ाएँ, क्योंकि परंपरा इन्हें वर्जित करती है। अभिषेक के दौरान घंटी तेज़ न बजाएँ, लिंग को बीच अनुष्ठान में पूरी तरह सूखने न दें, और अभिषेक जल को कभी न लाँघें।
पाठकों के प्रश्न
रुद्राभिषेक क्या है?+
रुद्राभिषेक शिव लिंग का जल, दूध, पंचामृत और बेल पत्र से शिव मंत्रों या रुद्रम का उच्चारण करते हुए पवित्र स्नान है। यह शिव उपासना के सबसे शक्तिशाली रूपों में से एक है।
क्या मैं बिना पंडित के घर पर रुद्राभिषेक कर सकता हूँ?+
हाँ। जल, पंचामृत और बेल पत्र से, ॐ नमः शिवाय जपते हुए सरल घरेलू रुद्राभिषेक पूर्णतः मान्य है। पंडित के साथ पूर्ण रुद्रम भव्य अवसरों के लिए है, आवश्यकता नहीं।
शिव लिंग पर क्या कभी नहीं चढ़ाना चाहिए?+
तुलसी पत्र, केतकी पुष्प, हल्दी और नारियल पानी परंपरागत रूप से शिव लिंग पर कभी नहीं चढ़ाए जाते। बेल पत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा और जल या पंचामृत उचित अर्पण हैं।
रुद्राभिषेक के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?+
सोमवार शिव का दिन और सबसे प्रचलित विकल्प है। प्रदोष, महाशिवरात्रि और श्रावण मास का प्रत्येक सोमवार रुद्राभिषेक करने के लिए विशेष शक्तिशाली हैं।
बाद में अभिषेक जल का क्या करें?+
अभिषेक के बाद एकत्र जल चरणामृत, एक पवित्र प्रसाद बन जाता है। थोड़ा श्रद्धा से ग्रहण करें, और शेष को घर में छिड़का जा सकता है या किसी पवित्र पौधे की जड़ में अर्पित किया जा सकता है।
रुद्राभिषेक के दौरान कौन सा मंत्र जपना चाहिए?+
ॐ नमः शिवाय आरंभ से अंत तक जपने हेतु सबसे सरल व शक्तिशाली मंत्र है। जो जानते हैं वे श्री रुद्रम का पाठ कर सकते हैं, और महामृत्युंजय मंत्र भी अत्यंत शुभ है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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