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शिव के 108 नाम (अष्टोत्तर) - अर्थ और लाभ
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शिव के 108 नाम (अष्टोत्तर) - अर्थ और लाभ

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 4, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

शिव अष्टोत्तर क्या है

शिव अष्टोत्तर शतनामावली भगवान शिव के 108 नामों की पवित्र सूची है, जिनमें प्रत्येक से आरंभ और नमः से समाप्त होता है। ये नाम उनके अनगिनत रूपों का उत्सव मनाते हैं - कैलाश के शांत योगी, बुराई के उग्र नाशक, और असीम करुणामय भोलेनाथ जो सहज प्रसन्न होते हैं। इन नामों का पाठ महादेव की उपासना का सबसे सरल व शक्तिशाली तरीका है, जिसके लिए केवल जल, बेल पत्र और सच्चे हृदय की आवश्यकता है।

संख्या 108 पवित्र क्यों है

संख्या 108 हिंदू परंपरा में गहरा अर्थ रखती है। शिव भक्तों को प्रिय पारंपरिक रुद्राक्ष माला में 108 मनके होते हैं, इसलिए एक पूरी माला नामों के एक चक्र के बराबर है। परंपरा 108 को ब्रह्मांडीय व्यवस्था - 12 राशियों को 9 ग्रहों से गुणा - और सृष्टि की पूर्णता से जोड़ती है। एक बैठक में 108 नाम पूरे करना मन को शांत एकाग्रता और शिव के चरणों में पूर्ण समर्पण की स्थिति में लाता माना जाता है।

108 नामों का जप कैसे करें

1. स्नान कर शिव लिंग या चित्र के सामने स्वच्छ आसन पर उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके बैठें। 2. घी या तेल का दीपक जलाएँ और बेल (बिल्व) पत्र, जल तथा श्वेत पुष्प अर्पित करें। 3. 108 मनकों की रुद्राक्ष माला लें और ॐ नमः शिवाय से आरंभ करें। 4. प्रत्येक नाम धीरे बोलें, हर नाम पर एक मनका सरकाएँ, आदर्श रूप से सोमवार या प्रदोष के समय। 5. माला के बाद लिंग पर जल अर्पित करें और क्षण भर मौन में बैठें। सोमवार, प्रदोष, शिवरात्रि और श्रावण मास सबसे शक्तिशाली समय हैं।

प्रतिनिधि नाम और उनके अर्थ

प्रतिनिधि नाम और उनके अर्थ

यहाँ 108 में से कुछ सर्वाधिक प्रिय नाम उनके अर्थ सहित हैं:

1. शंकर - कल्याण व मंगल देने वाले। 2. महादेव - देवों में सबसे महान। 3. रुद्र - उग्र रूप जो दुख दूर करते हैं। 4. नीलकंठ - नीले कंठ वाले जिन्होंने हलाहल विष पिया। 5. भोलेनाथ - भोले प्रभु, सहज प्रसन्न होने वाले। 6. त्रिपुरारी - तीन असुर नगरों के नाशक। 7. गंगाधर - अपनी जटा में गंगा धारण करने वाले। 8. चंद्रशेखर - मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाले। 9. पशुपति - समस्त जीवों के स्वामी। 10. मृत्युंजय - मृत्यु पर विजय पाने वाले। 11. भैरव - भयावह रक्षक रूप। 12. दिगंबर - दिशाओं को वस्त्र मानने वाले, संग्रह से परे। 13. उमापति - उमा (पार्वती) के प्रिय पति। 14. विश्वनाथ - ब्रह्मांड के स्वामी।

108 नामों के पाठ के लाभ

शिव के 108 नामों का पाठ भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं को दूर करता तथा शांति, उत्तम स्वास्थ्य व मानसिक बल देता माना जाता है। उनके नामों की पुनरावृत्ति अशांत मन को स्थिर करती, रोग व शोक से उबरने में सहायक होती और वैराग्य व आंतरिक स्थिरता को गहरा करती है। सहज प्रसन्न होने वाले प्रभु के रूप में शिव उनके नामों के सरल, हार्दिक स्मरण पर भी शीघ्र प्रतिसाद देते कहे जाते हैं।

शिव उपासना का हृदय

जहाँ 108 नाम अत्यंत शुभ हैं, वहीं पाँच अक्षरों का मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' शिव उपासना का साक्षात हृदय कहलाता है। इसे कोई भी, कहीं भी, किसी भी समय, बिना शुद्धि या अनुष्ठान के नियमों के दोहरा सकता है। चाहे आप सभी 108 नाम जपें या दिन भर बस 'ॐ नमः शिवाय' दोहराएँ, महादेव को सबसे प्रिय शब्दों की संख्या नहीं बल्कि उनके पीछे का प्रेम व समर्पण है।

त्वरित उत्तर

शिव अष्टोत्तर क्या है?+

यह अष्टोत्तर शतनामावली है, भगवान शिव के 108 पवित्र नामों की सूची। प्रत्येक नाम महादेव के किसी रूप, लीला या गुण की स्तुति करता है, और इनका पाठ उपासना का सरल, पूर्ण रूप है।

शिव के ठीक 108 नाम ही क्यों हैं?+

108 हिंदू परंपरा में सबसे पवित्र संख्या है और रुद्राक्ष माला के 108 मनकों से मेल खाती है। यह 12 राशियों को 9 ग्रहों से गुणा करने से जुड़ी है, जो ब्रह्मांडीय पूर्णता का प्रतीक है।

शिव के 108 नाम जपने का सर्वोत्तम समय कब है?+

सोमवार और प्रदोष काल आदर्श हैं, तथा शिवरात्रि व श्रावण मास सबसे शक्तिशाली हैं। नित्य अभ्यास के लिए स्नान के बाद प्रातःकाल, उत्तर या पूर्व की ओर मुख करना सर्वोत्तम है।

शिव को भोलेनाथ क्यों कहते हैं?+

भोलेनाथ का अर्थ है 'भोले, सहज प्रसन्न होने वाले प्रभु'। शिव सरल भक्ति से शीघ्र संतुष्ट हो जाते कहे जाते हैं - प्रेम से अर्पित सादा जल और बेल पत्र भी उनकी कृपा पाने को पर्याप्त हैं।

क्या नाम जपने के लिए रुद्राक्ष माला आवश्यक है?+

108 मनकों की रुद्राक्ष माला पारंपरिक है और गिनती रखने में सहायक है, पर अनिवार्य नहीं। आप उँगलियों पर गिन सकते हैं। माला से कहीं अधिक सच्ची भक्ति और एकाग्रता मायने रखती है।

क्या कोई भी शिव के 108 नाम पढ़ सकता है?+

हाँ। अष्टोत्तर और ॐ नमः शिवाय मंत्र पर किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है। सभी आयु व पृष्ठभूमि के लोग शांति, स्वास्थ्य और रक्षा हेतु शिव के नाम जपते हैं।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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