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काल भैरव चालीसा और आरती - बोल, अर्थ, लाभ और विधि
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काल भैरव चालीसा और आरती - बोल, अर्थ, लाभ और विधि

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 1, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

काल भैरव कौन हैं

काल भैरव भगवान शिव का उग्र रूप हैं, जो स्वयं काल (समय) का शासन करते हैं। वे काशी (वाराणसी) के कोतवाल (रक्षक) हैं, जहाँ उनके दर्शन बिना तीर्थ अधूरा कहा जाता है। कुत्ते पर सवार, त्रिशूल और दंड (न्याय का दंड) धारण करते हुए, वे भय, अहंकार और नकारात्मक शक्तियों का नाश करते हुए शरणागतों की उग्र रक्षा करते हैं। उनका रूप भयावह है, पर सच्चे भक्तों के लिए वे शीघ्र फलदायी और करुणामय रक्षक हैं।

महत्व और कब उपासना करें

भैरव की उपासना भय, शत्रुओं, तंत्र-मंत्र और अकाल संकट से रक्षा के लिए, तथा काल सर्प व अन्य दोषों के निवारण हेतु की जाती है। उनका सबसे महत्वपूर्ण दिन मार्गशीर्ष मास की भैरव अष्टमी (काल भैरव जयंती) है। रविवार और मंगलवार उनके साप्ताहिक दिन हैं, और सूर्यास्त के बाद उपासना विशेष प्रभावी मानी जाती है। यात्रा और नए कार्यों के आरंभ में भी उनका आह्वान किया जाता है।

भैरव चालीसा - सार और प्रारंभिक दोहा

भैरव चालीसा काल भैरव की काशीपति, भय के नाशक और भक्तों के शीघ्र रक्षक रूप में महिमा गाती है। प्रारंभिक दोहा:

जय जय भैरव काशिपति, संकट हरण सुजान। शरण पड़ी जो आपकी, देहु अभय वरदान।

चौपाई (उदाहरण): जय भैरव भयहारी स्वामी, कोतवाल काशी के नामी। श्वान-सवारी शोभा पाये, त्रिशूल-दंड कर में धाये।

छंद उनके काशी-रक्षण और हर संकट को काटने की शक्ति का स्मरण कराते हैं।

काल भैरव आरती

काल भैरव आरती

सूर्यास्त के बाद दीपक (सरसों या तिल का तेल) जलाएँ और गाएँ:

जय जय भैरव देव, काशी के राजा। भक्त जनों के संकट, पल में तुम काजा। श्वान चढ़े प्रभु सोहे, त्रिशूल गदा धारी। भय-भंजन दुख-हारी, जय जय भैरव प्यारी।

दीपक को दक्षिणावर्त घुमाएँ, फिर प्रणाम कर निर्भयता और अपने घर-परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें।

भैरव मंत्र और पूजा विधि

मुख्य मंत्र:

ॐ काल भैरवाय नमः

विधि: 1. रविवार या मंगलवार को सूर्यास्त के बाद उपासना करें; उत्तर या पूर्व की ओर मुख करें। 2. सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएँ और काले या लाल पुष्प अर्पित करें। 3. जलेबी, उड़द, नारियल या मिठाई का भोग लगाएँ; कुछ भक्त भैरव के वाहन रूप में कुत्ते को भोजन कराते हैं। 4. ॐ काल भैरवाय नमः का 108 बार जप करें। 5. चालीसा पढ़ें, फिर आरती करें। 6. रक्षा और साहस के लिए विनम्रता से प्रार्थना करें। भैरव अष्टमी और काल भैरव जयंती की रात्रि सबसे शक्तिशाली अवसर हैं।

काल भैरव की उपासना के लाभ

भक्त काल भैरव की उपासना निर्भयता, शत्रुओं, दुर्घटनाओं व नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा, काल सर्प व शनि-संबंधी कष्टों से राहत, और कठिन कार्यों व यात्रा में सफलता के लिए करते हैं। काल के स्वामी होने के कारण विलंब व बाधाएँ दूर करने और हर चुनौती का सामना करने का साहस पाने हेतु भी उनका आह्वान किया जाता है।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

काल भैरव कौन हैं?+

काल भैरव भगवान शिव का उग्र रक्षक रूप और काशी के कोतवाल हैं। वे काल का शासन करते, भय व नकारात्मकता का नाश करते और शरणागतों की उग्र रक्षा करते हैं।

काल भैरव मंत्र क्या है?+

मुख्य मंत्र 'ॐ काल भैरवाय नमः' है, जिसे रविवार या मंगलवार को सूर्यास्त के बाद, सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाकर 108 बार जपा जाता है।

भैरव की उपासना के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?+

रविवार और मंगलवार, विशेषकर सूर्यास्त के बाद, उत्तम हैं। मार्गशीर्ष मास की भैरव अष्टमी (काल भैरव जयंती) उनका सबसे महत्वपूर्ण पर्व है।

कुत्ता काल भैरव से क्यों जुड़ा है?+

कुत्ता (श्वान) काल भैरव का वाहन और निष्ठा व सतर्कता का प्रतीक है। अनेक भक्त कुत्तों को भोजन कराना भैरव को प्रसन्न करने वाला भक्ति-कर्म मानते हैं।

भैरव चालीसा के क्या लाभ हैं?+

इसका पाठ निर्भयता, शत्रुओं, दुर्घटनाओं व तंत्र-मंत्र से रक्षा, काल सर्प व शनि कष्टों से राहत, और कठिन कार्यों व यात्रा में सफलता के लिए किया जाता है।

क्या भैरव की उपासना सम्मान और सावधानी से करनी चाहिए?+

हाँ। भैरव के पास विनम्रता, स्वच्छता व शुद्ध भाव से जाएँ, कभी किसी को हानि पहुँचाने हेतु नहीं। सूर्यास्त के बाद भक्ति से उपासना करें, और कुत्तों व जरूरतमंदों के प्रति दयालु रहें, यह उन्हें प्रिय है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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